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East Singhbhum : घाटशिला अनुमंडल अस्पताल की एसएनसीयू में शिशु विशेषज्ञ नहीं, अस्थायी तीन एएनएम के भरोसे इकाई

न्यू सिक बोर्न केयर यूनिट नवजात के लिए वरदान

ललन सिंह, घाटशिलाघाटशिला अनुमंडल अस्पताल में संचालित न्यू सिक बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) शिशु रोग विशेषज्ञ चिकित्सक के बिना चल रहा है. 15 वर्ष पहले 2009-10 में स्थापित इकाई अस्थायी तीन एएनएम के भरोसे है. यह इकाई नवजात के लिए वरदान साबित हो रहा है. अनुमंडल अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ आर एन सोरेन ने बताया कि 15 साल से अस्थायी रूप से एएनएम सेवा दे रही हैं. कोरोना काल में इन लोगों ने सेवा दी. जिला में प्रस्ताव भेजा जाता है कि इन्हें स्थायी रूप से नियुक्ति दी जाये. अस्पताल में ए ग्रेड नर्स की जरूरत है. वहीं, स्वास्थ्य कर्मियों की कमी है. जिला को इस विषयों से अवगत कराया गया है.

15 वर्षों में करीब 8000 नवजात को मिला इलाज

एसएनसीयू में बीते 15 वर्षों में लगभग 7500 से 8000 नवजात को इलाज मिला है. वर्ष 2023 में 572 नवजात का इलाज हुआ. वहीं, 2024 के जनवरी में 35, फरवरी में 41, मार्च में 36, अप्रैल में 44, मई में 46, जून में 40, जुलाई में 52, अगस्त में 54, अक्तूबर में 47 सहित 395 नवजात का इलाज हुआ है.

यूनिट के कारण शिशु मृत्यु दर में आयी कमी

डॉ सोरेन ने बताया कि अनुमंडल अस्पताल में नवजात का नि:शुल्क इलाज होता है. एसएनसीयू में 12 बेड का बेबी वार्मर है. जिन नवजात का वजन कम होता है या समय से पूर्व जन्म होता है. उन्हें भर्ती किया जाता है. गरीब और मध्यम वर्ग के लिए यह यूनिट वरदान साबित हो रही है. उन्होंने कहा कि यूनिट के कारण शिशु मृत्यु दर घटी है. 100 में एक नवजात की मौत होती है. नवजातों को मेडिकल के हिसाब से पौष्टिक आहार मिलता है.

…क्या कहती हैं एएनएम…

14 वर्षों से अस्थायी नर्स के रूप में सेवा दे रही हूं. सेवा ही धर्म की तर्ज पर काम करती हूं. नवजातों को जीवन दान और उनकी सेवा का मौका मिलना बड़ी बात है.

– पुनिता केरकेट्टा, अस्थायी एएनएम, एसएनसीयूएसएनसीयू में 21 जनवरी, 2010 में योगदान दिया. 14 साल से सेवा कर रही हूं. 14 साल कैसे बीत गये, मालूम नहीं हुआ. नवजात की सेवा करना गर्व की बात है.- स्नेहलता राव, अस्थायी एएनएम, एसएनसीयू2 जून, 2010 को अस्थायी तौर पर नियुक्ति हुई. अब उनकी स्थायी नियुक्ति होनी चाहिए. 14 सालों में बहुत उतार-चढ़ाव देखा. यहां से परिजनों को खुशी से लौटते देख सुकून मिलता है.- अलिशा अंकुश कुजूर, अस्थायी एएनएम, एसएनसीयू

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Prabhat Khabar News Desk
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