राष्ट्रपति से सरना धर्म कोड को मान्यता देने की मांग
Updated at : 08 Apr 2024 10:03 PM (IST)
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आदिवासी सेंगेल अभियान ने सरना धर्म को मान्यता देने की मांग की. सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम एक मांग पत्र पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को सौंपा गया. उनका कहना है कि सरना धर्म को मान्यता नहीं मिलने की वजह से आदिवासी समाज खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं.
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जमशेदपुर.
आदिवासी सेंगेल अभियान ने प्रकृति पूजक आदिवासियों को सरना धर्म कोड को अविलंब मान्यता देने की मांग राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से की है. इसको लेकर सोमवार को सेंगेल अभियान ने एक मांग पत्र राष्ट्रपति के नाम उपायुक्त को सौंपा है. सौंपे गये मांग पत्र में कहा है कि प्रकृति पूजक आदिवासियों को अविलंब सरना धर्म कोड प्रदान किया जाये. 2011 की जनगणना के अनुसार सरना धर्म को मानने वालों की संख्या करोड़ों में है. लेकिन 50 लाख से अधिक लोगों ने जनगणना में अपना धर्म सरना लिखा है. वहीं जैन धर्म के लोगों की आबादी मात्र 44 लाख है. उसे उनका धार्मिक पहचान दे दिया गया है. जैन धर्म की तुलना में सरना धर्म को मानने वालों की संख्या बहुत अधिक है. बावजूद इसके आदिवासियों को उनका धार्मिक पहचान नहीं देना, उन्हें उनके धार्मिक आजादी से वंचित करना है. आगे लिखा गया है कि धार्मिक पहचान नहीं मिलने से देश के आदिवासी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं. वहीं कई लोग आदिवासियों को कई लोग जबरन धर्मांतरण करने को बाध्य कर रहे हैं. धर्मांतरण पर भी अविलंब रोक लगना चाहिए. उपायुक्त को मांग पत्र सौंपने वालों में जूनियर मुर्मू, सोनाराम सोरेन व विमो मुर्मू आदि शामिल थे.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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By Prabhat Khabar News Desk
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