गुड़ाबांदा. प्रखंड में सिर्फ एक बैंक की शाखा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :08 Dec 2016 6:08 AM (IST)
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गुड़ाबांदा : गुड़ाबांदा प्रखंड में नोटबंदी का असर जारी है. जनता त्राहिमाम कर रही है. यहां के ग्रामीण, किसान, ट्रैक्टर मालिक और पेटी ठेकेदार सीमा से सटे ओड़िशा के सारसकोना की एटीएम पर निर्भर हैं. ग्रामीणों को दो हजार रुपये उठाने के लिए 13 किलोमीटर दूर सारसकोना जाना पड़ता है. ठेकेदारों ने बैंक से रुपये […]
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गुड़ाबांदा : गुड़ाबांदा प्रखंड में नोटबंदी का असर जारी है. जनता त्राहिमाम कर रही है. यहां के ग्रामीण, किसान, ट्रैक्टर मालिक और पेटी ठेकेदार सीमा से सटे ओड़िशा के सारसकोना की एटीएम पर निर्भर हैं. ग्रामीणों को दो हजार रुपये उठाने के लिए 13 किलोमीटर दूर सारसकोना जाना पड़ता है. ठेकेदारों ने बैंक से रुपये नहीं मिलने के कारण काम बंद कर दिया है. प्रखंड में ट्रैक्टरों का चलना बंद हो रहा है. इससे क्षेत्र में बेरोजगारी फैल रही है.
ग्रामीणों के मुताबिक आठ पंचायतों वाले प्रखंड में बैंकिंग सेवा दुरुस्त नहीं है. ज्वालकांटा में बैंक ऑफ इंडिया की एक मात्र शाखा है. बैंक में एटीएम की व्यवस्था नहीं है. बैंक में कभीकैश रहता है, तो कभी नहीं रहता है. इसका असर व्यवसाय पर पड़ रहा है. ऐसे में बाध्य होकर उन्हें सारसकोना एटीएम जाना पड़ता है. गुड़ाबांदा से सारकोना की दूरी 13 किमी है. अपने क्षेत्र में बैंकिंग सुविधा और एटीएम नहीं होने के कारण यहां के ग्रामीण मजबूरी में सारसकोना स्थित एटीएम जाते हैं.
ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से ज्वालकांटा शाखा के रुपये नहीं मिल रहे हैं. ग्रामीणों ने कहा कि यहां एक और बैंक और एटीएम की व्यवस्था होनी चाहिए. ग्रामीणों ने कहा कि नोटबंदी का असर यदि दिसंबर भर रहा, तो इसका प्रभाव मकर पर्व पर पड़ेगा. ग्रामीण अब मकर पर्व की तैयारी में जुटे हुए हैं. ग्रामीणों ने कहा कि वे धान बेच कर परिवार चलाने पर मजबूर हो गये हैं. धान बेचने पर भी जरूरत के हिसाब से रुपये नहीं मिल रहे हैं.
गुड़ाबांदा से 13 किमी दूर सारसकोना में है एटीएम
नोट की कमी बना बेरोजगारी का प्रमुख कारण
स्वच्छता व कैशलेस ट्रांजैक्शन पर जोर
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