..और बंदूक से दी जाती है सलामी

खरसावां : खरसावां के शत प्रतिशत ब्राण परिवार मां दुर्गा की पूजा करते हैं. घरों में मां दुर्गा की खंडा, माता की तसवीर, मान पत्र व बेल रख कर माता की पूजा करते हैं. ब्राण परिवार नवमी के दिन घरों में बलि चढ़ कर भंडारा का आयोजन कर करते हैं. खरसावां में वर्षो से चली […]
खरसावां : खरसावां के शत प्रतिशत ब्राण परिवार मां दुर्गा की पूजा करते हैं. घरों में मां दुर्गा की खंडा, माता की तसवीर, मान पत्र व बेल रख कर माता की पूजा करते हैं. ब्राण परिवार नवमी के दिन घरों में बलि चढ़ कर भंडारा का आयोजन कर करते हैं. खरसावां में वर्षो से चली आ रही इस परंपरा को ढुसमा कहा जाता है, जो आज भी कायम है.
ढुसमा के तहत लोगों को दिया जाने वाला प्रसाद को पाने के लिए सभी जाति, समुदाय के लोग पहुंचते. ढुसमा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लगभग सभी ब्राण परिवारों में इसका आयोजन होने के बावजूद हर कोई दूसरे के घर में जा कर माता का प्रसाद सेवन करता है.
लगता है भंडारा
इसी प्रकार क्षेत्र के राजपूत परिवारों में महाष्टमी की रात माता भगवती के उग्र रूप की पूजा कर भंडारा का आयोजन किया जाता है. मध्य रात्रि देवी के उग्र रूप की पूजा कर बलि चढ़ायी जाती है. इसके पश्चात इसे तैयार प्रसाद के रूप में भक्तों में बांटा जाता है. वर्षो से चली आ रही यह परंपरा आज भी खरसावां में कायम है. महाष्टमी और नवमी के बीच के समय में संधि पूजा का आयोजन किया जाता है. संधिकाल में बलि दी जाती है और ठीक उसी समय बंदूक से गोली दाग कर सलामी दी जाती है.
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