दुमका: दीवारों में सीपेज से लगातार रिसता है पानी, जर्जर दीवारों के बीच चल रही बच्चों की पढ़ाई
कक्षा की दीवार में दिखता रिसाव और वहीं पढ़ाई करते बच्चे | Prabhat Khabar Network
दुमका के अस्तजोड़ा स्कूल की हालत खस्ता है. जर्जर भवन, सीपेज और बाउंड्री वॉल न होने से 316 बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा खतरे में है. प्रशासन से सुधार की मांग.
झारखंड के दुमका जिले के काठीकुंड प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय, अस्तजोड़ा (यूएमएस अस्तजोड़ा) में जर्जर भवन के बीच बच्चों की पढ़ाई हो रही है. विद्यालय में कुल 316 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. विद्यालय में पांच सरकारी और दो पारा शिक्षक कार्यरत हैं, लेकिन भवन और आधारभूत सुविधाओं की कमी के कारण पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है.
चार कमरों में संचालित हो रही आठ कक्षाएं
विद्यालय में पर्याप्त कमरों का अभाव है. महज चार कमरों में पहली से आठवीं तक की आठ कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है. कमरों की कमी के कारण शिक्षकों को एक साथ कई कक्षाओं का संचालन करना पड़ता है, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षण प्रभावित हो रहा है.
सीपेज से दीवारों में लगातार रिसता है पानी
विद्यालय भवन की अधिकांश कक्षाएं जर्जर अवस्था में हैं. दीवारों में सीपेज होने के कारण पानी लगातार रिसता रहता है. बरसात के दिनों में कक्षाओं की दीवारें नम रहती हैं और कई जगह प्लास्टर झड़ चुका है. इससे कक्षाओं का वातावरण भी प्रभावित होता है और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है.
इसी व्यवस्था के भरोसे संचालित हो रही आईसीटी लैब
विद्यालय में आईसीटी लैब की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन उसके लिए अलग कक्ष नहीं है. चार कमरों की इसी सीमित व्यवस्था में सभी कक्षाओं के साथ आईसीटी लैब व स्मार्ट क्लासेज का भी संचालन किया जाता है. जगह की कमी के कारण डिजिटल शिक्षा का समुचित लाभ विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है. कई बार आईसीटी गतिविधियों और नियमित कक्षाओं के संचालन में भी परेशानी होती है.
बाउंड्री वॉल नहीं, सुरक्षा भी बनी चुनौती
विद्यालय परिसर में बाउंड्री वॉल नहीं है. इससे विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है. खुले परिसर में बाहरी लोगों और मवेशियों के प्रवेश की आशंका बनी रहती है, जिससे विद्यालय का शैक्षणिक माहौल भी प्रभावित होता है.
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सात शिक्षक संभाल रहे पूरी व्यवस्था
विद्यालय में पांच सरकारी एवं दो पारा शिक्षक कार्यरत हैं. सीमित संसाधनों और जर्जर भवन के बावजूद शिक्षक बच्चों की पढ़ाई सुचारु रूप से चलाने का प्रयास कर रहे हैं. हालांकि, पर्याप्त कमरों और सुरक्षित भवन के अभाव में उन्हें कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
ग्रामीणों ने नए भवन की उठाई मांग
ग्रामीणों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से विद्यालय के लिए नए भवन का निर्माण, अतिरिक्त कक्षों की व्यवस्था तथा बाउंड्री वॉल के निर्माण की मांग की है. उनका कहना है कि यदि जल्द पहल नहीं की गई तो जर्जर भवन में बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा दोनों पर खतरा बना रहेगा.
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