महीने भर बाद भी माता पार्वती की कान बाली नहीं हो सकी ठीक

बाबा बासुकिनाथ मंदिर अपार संपत्ति का स्वामी है, किंतु, यह विडंबना ही है कि माता पार्वती के दाहिने कान की सोने की बाली, जो एक माह पूर्व टूट गई थी, अब तक पुनः नहीं जड़ी जा सकी है.
प्रतिनिधि, बासुकिनाथ बाबा बासुकिनाथ का मंदिर अपार संपत्ति का स्वामी है, जहां करोड़ों रुपये नगदी और स्वर्ण-रजत मुद्राओं के रूप में संचित हैं. किंतु, यह विडंबना ही है कि माता पार्वती के दाहिने कान की सोने की बाली, जो एक माह पूर्व टूट गई थी, अब तक पुनः नहीं जड़ी जा सकी है. ऐसा कहा जाता है कि गृहप्रवेश के अवसर पर भगवान भोलेनाथ ने रावण को सोने की लंका दान में दे दी थी. लेकिन स्वयं उनकी अर्धांगिनी माता पार्वती का हाल यह है कि एक कान में सोने की बाली विद्यमान है, जबकि दूसरा कान अब भी सूना पड़ा हुआ है. यह स्थिति तब है जब बाबा बासुकिनाथ का खजाना सोने-चांदी से भरा पड़ा है. इस पूरे मामले को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि मंदिर प्रशासन किसी उदार दानदाता की प्रतीक्षा में है. जानकारी के अनुसार, माता पार्वती की वह टूटी हुई बाली मंदिर के पुजारी द्वारा कार्यालय में जमा कराई गई थी, लेकिन एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अभी तक उनकी कान की शोभा वापस नहीं लौट पायी है. दूसरी ओर, महाशिवरात्रि की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक अधिकारी लगातार बासुकिनाथ धाम में बैठकें कर रहे हैं. विधि-व्यवस्था और अन्य तैयारियों की समीक्षा की जा रही है, अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी दिए जा रहे हैं. किंतु यह विचारणीय विषय है कि जिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह को लेकर इतना व्यापक आयोजन किया जा रहा है, उन्हीं के विग्रहों की देखभाल में मंदिर प्रशासन कितनी संजीदगी दिखा रहा है. यह स्थिति मंदिर प्रशासन की कार्यशैली और प्राथमिकताओं पर एक महत्वपूर्ण प्रश्नचिह्न खड़ा करती है. लोगों का कहना है कि, शिव-पार्वती के इस पावन धाम में, जहां आस्था की गूंज हर क्षण सुनाई देती है, क्या देवी-देवताओं के विग्रहों की गरिमा को बनाये रखना प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए.
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By Prabhat Khabar News Desk
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