Lead News : सिंगा-सकवा व मदानभेरी की गूंज के बीच हिजला मेला शुरू

Updated at : 21 Feb 2025 7:32 PM (IST)
विज्ञापन
Lead News : सिंगा-सकवा व मदानभेरी की गूंज के बीच हिजला मेला शुरू

राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव-2025 का शुभारंभ शुक्रवार को किया गया. उद्घाटन से पूर्व उल्लास जुलूस निकाला गया. इसमें काफी संख्या में आदिवासी समाज के लोग परंपरागत परिधान पहनकर पारंपरिक वाद्य यंत्र के साथ शरीक हुए. महोत्सव की शुरुआत से पूर्व हिजला मेला परिसर में स्थित मांझी थान में पूजा की गयी.

विज्ञापन

जनजातीय महोत्सव. विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर कल्याणकारी योजनाओं की दी जा रही जानकारी

संवाददाता, दुमका

सिंगा, सकवा व मदानभेरी जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच मयूराक्षी नदी के तट पर 28 फरवरी तक आयोजित होनेवाले राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव-2025 का शुभारंभ शुक्रवार को किया गया. उद्घाटन से पूर्व उल्लास जुलूस निकाला गया. इसमें काफी संख्या में आदिवासी समाज के लोग परंपरागत परिधान पहनकर पारंपरिक वाद्य यंत्र के साथ शरीक हुए. महोत्सव की शुरुआत से पूर्व हिजला मेला परिसर में स्थित मांझी थान में पूजा की गयी. स्थानीय ग्राम प्रधान ने फीता काटकर मेले का शुभारंभ किया. इसके उपरांत अनुमंडल पदाधिकारी अभिनव प्रकाश ने मंच के समीप ध्वजारोहण कर कार्यक्रम की शुरुआत की. विभिन्न विद्यालयों के छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया. इसके साथ ही छऊ नृत्य और नटवा नृत्य भी पेश किए गये. महोत्सव की अवधि में कृषि प्रदर्शनी, ट्राइबल म्यूजियम और विभिन्न विभागों के स्टॉल मेला में आने वाले लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा. ये प्रदर्शनियां न केवल झारखंड की पारंपरिक कृषि पद्धतियों और जनजातीय जीवनशैली को दर्शाती है. बल्कि नयी तकनीकों और सरकारी योजनाओं के बारे में जागरुकता भी बढ़ाती है. मेला जनजातीय समाज के सांस्कृतिक संकुल की तरह है. जिसमें सिंगा-सकवा, मांदर व मदानभेरी जैसे परंपरागत वाद्ययंत्र की गूंज तो सुनने को मिलती ही है. झारखंडी लोक संस्कृति के अलावा अन्य प्रांतों के कलाकार भी अपनी कलाओं का प्रदर्शन करने पहुंचे हैं. बदलते समय के साथ मेले को भव्यता प्रदान करने की कोशिशें सरकार द्वारा लगातार होती रही हैं. मेला क्षेत्र में इस साल कई आधारभूत संरचनाएं विकसित हो गयी हैं, जो मेले के उत्साह को दाेगुना करने में सहायक साबित हो रहा है.

मेले में दिख रही संस्कृतिक व लोकसंगीत की अद्भुत झलक : डीडीसी

उप विकास आयुक्त अभिजीत सिन्हा ने कहा कि मेले में यहां की संस्कृति, लोकसंगीत की अदभुत झलक देखने को मिलती है. संताल परगना की संस्कृति,खानपान,नृत्य,लोकसंगीत सहित जनजातीय समाज से जुड़ी कई जानकारी का यह मेला संगम है. पूरे मेला अवधि में सतला की कला संस्कृति की झलक, नवीन कृषि तकनीक देखने को मिलेगी, जबकि सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं से अवगत कराने का यह बड़ा मंच साबित होगा. उन्होंने कहा कि मेले के आयोजन का इंतजार यहां के लोगों के द्वारा पूरे वर्ष किया जाता है. कहा कि अधिक से अधिक लोग मेले में आयें एवं यहां के गौरवशाली संस्कृति को देखें यही हमारा प्रयास है. उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा कि किसी भी प्रकार के विधि व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न नहीं हो इसका ध्यान रखे.मेला नहीं हमारी संस्कृति की महत्वपूर्ण पुस्तक है: जॉयस

जिला परिषद अध्यक्ष जॉयस बेसरा ने कहा कि यह सिर्फ मेला नहीं. हमारी परंपरा हमारी संस्कृति की एक महत्वपूर्ण पुस्तक है. जनजातीय समाज की संस्कृति, संगीत, नृत्य रहन सहन सहित और भी कई महत्वपूर्ण बातों को मेले के माध्यम से समझा जा सकता है. उन्होंने कहा कि हम सभी मिलकर आयोजन को सफल बनाये. आयोजन का हिस्सा बनायें. इसके बाद अतिथियों ने स्टॉल का निरीक्षण किया. समारोह में जिला परिषद के उपाध्यक्ष सुधीर मंडल, आइटीडीए के निदेशक रवि जैन, वन प्रमंडल पदाधिकारी सात्विक व्यास, प्रशिक्षु आइएएस अभिनव प्रकाश, अपर समाहर्ता राजीव कुमार, एसडीओ कौशल कुमार, डीटीओ जयप्रकाश करमाली, डीपीआरओ रोहित कंडुलना, इडीएम अमरदीप हेंब्रम आदि मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola