आंतरिक सेमिनार में भाषा के उत्थान पर दिया गया जोर

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आंतरिक सेमिनार में भाषा के उत्थान पर दिया गया जोर

प्राचार्य सिकंदर प्रसाद सिंह ने इस संदर्भ में चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को अपने स्थानीय भाषा में पठन-पाठन करने को कहा. उन्होंने कहा कि स्थानीय एवं सर्वव्यापी भाषाओं के समायोजन से अपेक्षित विद्वता हासिल की जा सकती है, जो भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने में सहायक होगा.

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प्रतिनिधि, शिकारीपाड़ा शिकारीपाड़ा महाविद्यालय में मानव विकास में भाषा की भूमिका पर आंतरिक सेमिनार आयोजित की गयी. सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि जय चौधरी ने भाषा के उत्थान एवं मानव जीवन में उसकी भूमिका की जानकारी दी. कहा कि भाषा के माध्यम से ही मनुष्य अपने विचारों, भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त कर पाता है. इससे सामाजिक, सांस्कृतिक व संज्ञानात्मक विकास होता है. प्राचार्य सिकंदर प्रसाद सिंह ने इस संदर्भ में चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को अपने स्थानीय भाषा में पठन-पाठन करने को कहा. उन्होंने कहा कि स्थानीय एवं सर्वव्यापी भाषाओं के समायोजन से अपेक्षित विद्वता हासिल की जा सकती है, जो भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने में सहायक होगा. सेमिनार को आदित्य नारायण महाविद्यालय दुमका के डॉ अनहद लाल आर्या, मयूराक्षी ग्रामीण महाविद्यालय रानीश्वर के डॉ हिमांशु कुमार सिंह, रुणु कर्मकार, बद्री नारायण भगत, मनोज कुमार सिंह, शशि शेखर झा, आलोक कुमार आदि ने भी संबोधित किया. मौके पर रेफाइल मरांडी, मुरारी सिंह, रेजलिन मुर्मू, आबिदा खानम, कुमारी सुजाता, मीरा कुमारी, अबुल कलाम आजाद, इकराम हुसैन, प्रभात कुमार सिन्हा मौजूद थे.

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