सावन में शिवमय हुआ बासुकिनाथ : 95 हजार से ज्यादा कांवरियों ने चढ़ाया जल, हर-हर महादेव से गूंजा बाबा का धाम

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बासुकिनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ | Prabhat Khabar Network

सावन के 16वें दिन बासुकिनाथ धाम में 95,826 कांवरियों ने बाबा फौजदारीनाथ पर जलार्पण किया. मंदिर प्रबंधन को लाखों की आय हुई.

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बासुकिनाथ : राजकीय श्रावणी मेला महोत्सव के 16वें दिन शुक्रवार को सावन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर बाबा फौजदारीनाथ की नगरी पूरी तरह शिवमय नजर आयी. मंदिर प्रबंधन के अनुसार करीब 95,826 कांवरियों ने बाबा फौजदारीनाथ पर जलार्पण कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की. भोर से ही शिवगंगा घाट, मंदिर प्रांगण और मेला क्षेत्र कांवरियों से पट गया. चारों ओर केसरिया वस्त्रों में सजे कांवरिये, कंधे पर कांवर और जुबां पर बोल बम तथा हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा धाम गुंजायमान रहा.

बासुकिनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़, कतारबद्ध श्रद्धालु, जयकारा लगाते सिलीगुड़ी के भक्त | Prabhat Khabar Network
बासुकिनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़, कतारबद्ध श्रद्धालु, जयकारा लगाते सिलीगुड़ी के भक्त | Prabhat Khabar Network

दो बजे खोला गया मंदिर का कपाट

मंदिर का कपाट भोर दो बजे खोला गया. भोलेनाथ की प्रभातकालीन पुरोहित पूजा संपन्न होने के बाद कांवरिया श्रद्धालुओं के लिए गर्भगृह का पट खोल दिया गया. सुबह तीन बजे से श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध और सुरक्षित व्यवस्था के तहत बाबा फौजदारीनाथ के शिवलिंग पर जलाभिषेक प्रारंभ किया. गर्भगृह में अरघा के माध्यम से लगातार जलार्पण होता रहा. महिला और पुरुष कांवरियों की अलग-अलग कतार बनाकर उन्हें चरणबद्ध तरीके से बाबा के दरबार तक पहुंचाया गया. श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती रही. कांवरियों की कतार संस्कार मंडप होते हुए क्यू कॉम्पलेक्स और शिवगंगा पीड़, कुशवाहा धर्मशाला तक पहुंच गयी थी.

घंटों कतार में खड़े रहने के बावजूद श्रद्धालुओं के चेहरे पर उत्साह और आस्था साफ झलक रही थी. जैसे ही भक्तों को बाबा के गर्भगृह में पहुंचकर जलार्पण का अवसर मिला, वे भाव-विभोर हो उठे. शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित कर श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की. शाम पांच बजे भोलेनाथ की विश्राम पूजा के लिए कांवरियों का जलार्पण और पूजा-अर्चना रोक दी गयी. षोडशोपचार पूजन के बाद बाबा फौजदारीनाथ के क्षणिक विश्राम के लिए मंदिर का कपाट बंद किया गया. इस दौरान श्रद्धालुओं को बाबा के पुनः दर्शन और जलार्पण के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ी. विश्राम पूजा संपन्न होने के बाद मंदिर का पट फिर खोला गया और कांवरियों ने जलार्पण शुरू किया, जो रात्रिकालीन श्रृंगार पूजा तक जारी रहा.

बासुकिनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़, कतारबद्ध श्रद्धालु, जयकारा लगाते सिलीगुड़ी के भक्त | Prabhat Khabar Network
बासुकिनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़, कतारबद्ध श्रद्धालु, जयकारा लगाते सिलीगुड़ी के भक्त | Prabhat Khabar Network

18,505 कांवरियों ने जलार्पण काउंटर पर गंगाजल अर्पित किया

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रबंधन की ओर से जलार्पण काउंटर की व्यवस्था भी की गयी है. मंदिर प्रबंधन के अनुसार 18,505 कांवरियों ने जलार्पण काउंटर पर गंगाजल अर्पित किया. श्रद्धालुओं ने एलईडी स्क्रीन पर बाबा फौजदारीनाथ के शिवलिंग का दर्शन किया और काउंटर पर जल चढ़ाया. काउंटर पर अर्पित गंगाजल पाइपलाइन के माध्यम से सीधे बाबा के शिवलिंग तक पहुंचता है. इस व्यवस्था से श्रद्धालुओं को लंबी कतार में लगे बिना अपनी आस्था अर्पित करने का अवसर मिला. शिव मंदिर न्यास पर्षद को 22.60 लाख रुपये की आमदनी :

बाबा फौजदारीनाथ के दरबार में श्रद्धालुओं की आस्था का असर मंदिर की आय पर भी दिखा. शिव मंदिर न्यास पर्षद को मंदिर प्रांगण स्थित विभिन्न स्रोतों से कुल 22,60,184 रुपये प्राप्त हुए. विभिन्न दानपेटियों से 2,44,380 रुपये, गर्भगृह गोलक से 49,800 रुपये तथा अन्य स्रोतों से 10,504 रुपये प्राप्त हुए. दानपेटी और गोलक से प्राप्त राशि की गिनती मंदिर प्रशासनिक भवन में सीसीटीवी की निगरानी और अधिकारियों की उपस्थिति में की गयी.

बासुकिनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़, कतारबद्ध श्रद्धालु, जयकारा लगाते सिलीगुड़ी के भक्त | Prabhat Khabar Network
बासुकिनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़, कतारबद्ध श्रद्धालु, जयकारा लगाते सिलीगुड़ी के भक्त | Prabhat Khabar Network

3911 श्रद्धालुओं ने किया शीघ्रदर्शनम

शीघ्रदर्शनम व्यवस्था के तहत शुक्रवार को 3911 श्रद्धालुओं ने बाबा फौजदारीनाथ का सुलभ जलार्पण किया. इससे शिव मंदिर न्यास पर्षद को 19 लाख 55 हजार 500 रुपये की आमदनी हुई. इस व्यवस्था के तहत कांवरियों को मंदिर कार्यालय से 500 रुपये का टोकन लेना पड़ता है. इसके बाद सिंह द्वार से मंदिर प्रांगण में प्रवेश कराया जाता है, विशेष द्वार से गर्भगृह में पहुंचाकर सुलभ जलार्पण कराया जाता है. मंदिर प्रबंधन की इस व्यवस्था से श्रद्धालुओं ने संतोष जताया.

शिव तांडव स्तोत्र के पाठ से गूंजा भक्तिमय वातावरण

सावन के पवित्र मास में कांवरियों ने शिव तांडव स्तोत्र का पाठ कर पुण्य अर्जित किया. सूर्यास्त के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना की. शिवलिंग पर धतूरा, भांग, बेलपत्र, गंगाजल, अक्षत, पुष्प, फल, शहद, दूध और दही अर्पित कर आरती की गयी.पंडित सुधाकर झा ने बताया कि सावन माह में भगवान शिव की विधिवत उपासना करने से भक्तों को विशेष आध्यात्मिक लाभ मिलता है. शिव तांडव स्तोत्र भगवान शिव की स्तुति में रावण द्वारा रचित माना जाता है. श्रद्धा और भक्ति के साथ इसके पाठ से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं तथा भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है. सावन में शिव आराधना करने से साधक को जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति और मानसिक शांति प्राप्त होती है.

सिलीगुड़ी की कांवर मंडली ने किया जलार्पण

श्रावणी मेला के दौरान सिलीगुड़ी से पहुंची कांवर मंडली ने भी शुक्रवार को बाबा फौजदारीनाथ का जलार्पण किया. मंदिर प्रांगण में मंडली के सदस्यों ने भव्य आरती की और बाबा से सुख-समृद्धि की कामना की. भक्त राजेश सिंह, मोती सिंह, संतोष कुमार और बबलू कुमार ने बताया कि वे पिछले छह वर्षों से लगातार बासुकिनाथ पहुंचकर बाबा का जलार्पण कर रहे हैं. कांवरियों ने उत्तरवाहिनी गंगा से जल लेकर पहले बैद्यनाथधाम में जलार्पण किया और इसके बाद बासुकिनाथ पहुंचकर बाबा फौजदारीनाथ की पूजा-अर्चना की. उन्होंने कहा कि भोलेनाथ दयालु हैं और सच्चे मन से दरबार में आने वाले प्रत्येक भक्त की पुकार सुनते हैं. बासुकिनाथ धाम में सावन की भक्ति अपने चरम पर है. हर ओर बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष गूंज रहे हैं. कांवरियों की आस्था, शिव आराधना और बाबा फौजदारीनाथ के प्रति अटूट विश्वास से पूरा धाम आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आ रहा है.


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आदित्यनाथ पत्रलेख

लेखक के बारे में

By आदित्यनाथ पत्रलेख

आदित्यनाथ पत्रलेख वर्ष 2011 से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया, दोनों में दो दशकों से अधिक का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की बारीकियां सीखीं और राजनीतिक, सामाजिक तथा विकासात्मक मुद्दों पर सटीक एवं निष्पक्ष रिपोर्टिंग की। जनहित से जुड़े विषयों पर फोकस्ड रिपोर्टिंग और तथ्यों को सत्य एवं तटस्थता के साथ प्रस्तुत करना उनकी कार्यशैली की प्रमुख पहचान है।

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