पर्यटकों को लुभा नहीं पा रहा मसानजोर डैम

Published at :02 Oct 2016 5:02 AM (IST)
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पर्यटकों को लुभा नहीं पा रहा मसानजोर डैम

विडंबना. कनाडा के सहयोग से 1955 में किया गया था निर्माण, 60 साल बाद भी स्थिति यथावत टूरिस्ट काॅम्प्लेक्स की आधारशिला के आगे नहीं बढ़ सका काम पर्यटकों को ठहरने की नहीं है मुकम्मल व्यवस्था प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र में एक दशक से डॉक्टर नहीं रानीश्वर : प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत दुमका जिले के मयुराक्षी […]

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विडंबना. कनाडा के सहयोग से 1955 में किया गया था निर्माण, 60 साल बाद भी स्थिति यथावत

टूरिस्ट काॅम्प्लेक्स की आधारशिला के आगे नहीं बढ़ सका काम
पर्यटकों को ठहरने की नहीं है मुकम्मल व्यवस्था
प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र में एक दशक से डॉक्टर नहीं
रानीश्वर : प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत दुमका जिले के मयुराक्षी नदी पर पर्वत श्रृंखला को बांध कर मयुराक्षी नदी पर मसानजोर डैम का निर्माण 1955 में हुआ था. तत्कालीन बिहार की जमीन पर पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कनाडा सरकार के सहयोग से इस डैम का निर्माण कराया गया था. उसके बाद न तो बिहार और न ही पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की पहल हुई. झारखंड बनने के बाद भी कोई ईमानदार कोशिश इसके लिए नहीं की गयी. एक टूरिस्ट काॅम्प्लेक्स का निर्माण की आधारशिला भी रखी भी गयी, तो एक दशक में यह बनकर तैयार तक नहीं हो पाया.
नतीजतन यह डैम देश के मानचित्र पर पर्यटन स्थल के रूप में पहचान बनाने में पीछे ही रह गया. 1991 में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी को लेकर चर्चा रही. उस वक्त मसानजोर की पहचान जरूर बनी थी़ डैम अविभाजित बिहार में बना था़ वर्तमान में झारखंड के इलाके में है, पर डैम पर नियंत्रण पश्चिम बंगाल सरकार का है. पर्यटकों के लिए खास बुनियादी सुविधाएं भी नहीं है़ पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा विश्राम गृह मयुराक्षी भवन तथा यूथ हॉस्टल बनाया गया है़ जबकि अविभाजित बिहार के वक्त सिंचाई विभाग द्वारा चार कमरे का भवन बनाया गया था, आम पर्यटकों के ठहरने के लिए सरकार की ओर से कोई व्यवस्था नहीं है़
मसानजोर डैम व डैम का एक नंबर गेट.
1995 से दुमका को बिजली भी नहीं मिल रही
मसानजोर डैम निर्माण की कल्पना तत्कालीन पश्चिम बंगाल के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ विधान चंद्र राय व बिहार के मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की थी. डैम निर्माण कर यहां जमा पानी से पन बिजली उत्पादन करना तथा डैम में पानी को रोक कर उसे सिंचाई के काम में लाना ही मुख्य उद्देश्य था. पन बिजली उत्पादन के लिए दो यूनिट है़
दोनों यूनिट में चार मेगावाट बिजली उत्पादन होती है़ वर्ष 2000 में पन बिजली उत्पादन केंद्र में बाढ़ का पानी घुस जाने से बिजली उत्पादन बंद हो चुका था. फिर वर्ष 2010-11 में मरम्मति कर उसे चालू किया था. यहां उत्पादित बिजली पश्चिम बंगाल ही भेजी जा रही है. 1995 तक डैम से अविभाजित बिहार के दुमका जिले के दुमका व रानीश्वर को बिजली मिलती थी़
नहीं हो पाया दायां तट नहर का निर्माण
फिलवक्त डैम से पश्चिम बंगाल के वीरभूम व मुर्शिदाबाद जिले के किसानों को सिंचाई के लिए पटवन उपलब्ध होता है़ झारखंड में दुमका व रानीश्वर प्रखंड क्षेत्र के किसानों को 260 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराने के लिए मयुराक्षी बांया तट नहर का निर्माण कराया गया था, जिसका पक्कीकरण भी हो रहा है, पर साठ साल बाद भी डैम के दांये ओर नहर का निर्माण नहीं हो सका़
सूना पड़ा बागीचा, फूल पत्ती भी अब नहीं दिखती
डैम बनने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से कर्मियों के सुविधा के लिए एक प्राथमिक विद्यालय व एक प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाया गया था़ यहां पदस्थापित कर्मी सेवानिवृत्त होते गये, पर कभी नये सिरे से बहाली नहीं हुई. कर्मियों की संख्या भी बेहद कम रह गयी है. यहां का प्राथमिक विद्यालय बंद हो गया़ प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र खुलता तो है, पर एक दशक से डाॅक्टर नहीं है. डैम के नीचे एक बगीचा हुआ करता था़ रख रखाव के अभाव में बगीचा सूना पड़ा हुआ है, जिसमें फूल-पत्ती भी अब नहीं दिखती.
घट रही सुविधाएं
पश्चिम बंगाल स्टेट गर्वनमेंट इम्पलाइज फेडरेशन के सचिव सह चीफ एडवाइजर व मसानजोर डैम के कर्मी अशोक सिंह थापा ने बताया कि डैम में पहले जो सुविधा थी, वह धीरे-धीरे कम होती चली गयी. डैम कर्मियों को भी सुविधाएं पहले जैसी नहीं मिल रही है. चिकित्सा, शिक्षा व अन्य सुविधा भी नहीं मिल पा रही है़
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