मंदारहील-दुमका-रामपुरहाट नयी लाइन परियोजना पूरी

दिल्ली/दुमका : मंदारहील-दुमका-रामपुरहाट नयी लाइन परियोजना 130 किलोमीटर की थी, जिसे दो खंडों में बांटकर पूरा किया गया है. 2001-02 में स्वीकृत रामपुरहाट -मंदारहील वाया दुमका (130.20 किमी) रेलवे लाइन की कुल लागत 907.86 करोड़ रुपये थी. इस परियोजना को पूरा करने की प्लानिंग दो फेज में की गयी. पहला दुमका से रामपुरहाट (64.36 किमी.) […]
दिल्ली/दुमका : मंदारहील-दुमका-रामपुरहाट नयी लाइन परियोजना 130 किलोमीटर की थी, जिसे दो खंडों में बांटकर पूरा किया गया है. 2001-02 में स्वीकृत रामपुरहाट -मंदारहील वाया दुमका (130.20 किमी) रेलवे लाइन की कुल लागत 907.86 करोड़ रुपये थी. इस परियोजना को पूरा करने की प्लानिंग दो फेज में की गयी. पहला दुमका से रामपुरहाट (64.36 किमी.) एवं दूसरा, मंदारहील से
दुमका(65.90 किमी.) .रेलखंड रामपुर हाट-दुमका कॉस्ट शेयरिंग के आधार पर बना है जिसमें रेल मंत्रालय और राज्य सरकार दोनों की भागीदारी है. 64.36 किलोमीटर रेल लाइन रामपुर हाट से दुमका की लागत 450.81 करोड़ रुपये में से राज्य सरकार ने अपने हिस्से से 251.59 करोड़ रुपये दी है.
दूसरे खंड के दुमका-रामपुरहाट रेल लाइन जिसकी लंबाई 64.30 किलोमीटर है, उसे भी जून 2015 में जनता को समर्पित कर दिया गया. इसी तरह से मंडरहील-हंसडीहा(24.25 किमी) और दुमका-बारापलासी(13.80 किमी) को यात्री के लिए क्रमश: दिसंबर 2012 एवं फरवरी 2014 में शुरू किया गया.
वहीं 28.15 किलोमीटर हंसडीहा-बारापलासी रेल खंड को जनवरी 2016 में खोल दिया गया. हंसडीहा-बारापलासी रेल खंड को बुधवार को यात्रियों के लिए खोल दिया गया है. यह पूरा सेक्शन भागलपुर से रामपुरहाट वाया दुमका है. इस रेल खंड के शुरू होने के बाद पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित रामपुरहाट नये रूट के रूप में शुरू हो गया है. इस नये रूट से बैद्यनाथधाम (देवघर), दुमका में बासुकीनाथ और मलाैती मंदिर के दर्शन करने में आम लोगों को सुविधा होगी.
वहीं दुमका-भागलपुर रेलवे लाइन रेलवे ट्रैफिक के लिए हावड़ा-भागलपुर को वैकल्पिक मार्ग के रूप में भी प्रयोग किया जायेगा. इस रेलखंड के शुरू होने के बाद भागलपुर से दुमका सीधे जुड़ गया है. इसकी दूरी अब 116 किलोमीटर होगी. जबकि भागलपुर से दुमका वाया साहिबगंज इसकी दूरी 272 किलोमीटर थी. इस रेल खंड के पूरा होने के बाद रामपुरहाट-भागलपुर के लिए एक वैकल्पिक रूट भी मिल गया है. जो पुराने रूट से 27 किलोमीटर कम है. इस अवसर पर रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने से प्रदेश सहित अन्य राज्यों को भी इसका फायदा मिलेगा. उन्होंने इस रेलखंड के पूरा होने के बाद यात्रियों के काफी समय बचने की बात कही. रेल मंत्री मनोज सिन्हा और राजेन गोहिन भी उपस्थित थे.
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