एसपीटी-सीएनटी में संशोधन से रैयतों का अहित नहीं : मंत्री

Published at :29 Aug 2016 8:02 AM (IST)
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एसपीटी-सीएनटी में संशोधन से रैयतों का अहित नहीं : मंत्री

दुमका : बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री डाॅ लोइस मरांडी ने सीएनटी एवं एसपीटी एक्ट में संशोधन को लेकर विपक्ष पर जनता को दिग्भ्रमित करने का आरोप लगाया है. कहा, दोनों एक्टों में संशोधन के बावजूद रैयतों का मालिकाना हक कायम रहेगा. रविवार को दुमका में अपने आवास में आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में उन्होंने […]

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दुमका : बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री डाॅ लोइस मरांडी ने सीएनटी एवं एसपीटी एक्ट में संशोधन को लेकर विपक्ष पर जनता को दिग्भ्रमित करने का आरोप लगाया है. कहा, दोनों एक्टों में संशोधन के बावजूद रैयतों का मालिकाना हक कायम रहेगा. रविवार को दुमका में अपने आवास में आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का सीएनटी एक्ट की धारा 21 एवं एसपीटी एक्ट की धारा 13 में मामूली संशोधन करने का प्रस्ताव है,

लेकिन विपक्ष इन दोनों एक्टों में संशोधन के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है. डॉ लोइस ने कहा कि विपक्ष के नेता हेमंत सोरेन इस संशोधन का अब विरोध कर रहे हैं, पर जब वे राज्य के मुख्यमंत्री की कुरसी पर काबिज थे, तब उन्होंने खुद बदलाव की बात कही थी. आज वे राज्य की जनता को दिग्भ्रमित कर रहे हैं. लोगों के बीच गलत संदेश फैलाया जा रहा है कि उनकी जमीन छीन ली जायेगी और उन्हें विस्थापित कर दिया जायेगा.

एसपीटी-सीएनटी में संशोधन…
इन संशोधनों से कोई रैयत न तो विस्थापित होगा और न ही उनका कुछ अहित होगा. इन संशोधनों के पीछे सरकार का मकसद केवल क्षेत्र का विकास है, दूसरा कुछ नहीं. विकास योजनाओं के लिए जमीन की आवश्यकता है.
जमीन के अभाव से योजनाएं हैं लंबित : जमीन के अभाव में यहां पर लगभग 400 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों का निर्माण अधर में लटका हुआ है. उन्होंने कहा कि छोटानागपुर अधिनियम 1908 एवं संताल परगना काश्तकारी अधिनियम 1949 में भूमि का उपयोग मात्र कृषि एवं संबंधित कार्य के लिए किया जा सकता है, लेकिन वर्तमान संशोधन के प्रस्ताव से भू स्वामी अपनी भूमि का उपयोग गैर कृषि कार्य के लिए कर सकेंगे. स्वरोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखकर कोई भी भू-स्वामी अपनी भूमि पर होटल, दुकान, मैरेज हाल आदि बनवा सकता है. लोइस ने प्रस्ताव की प्रति दिखाते हुए कहा कि भूमि का स्वामित्व हस्तांतरित नहीं होगा. पूर्व में यदि किसी भू-स्वामी द्वारा कृषि भूमि का प्रयोग गैर कृषि कार्य के लिए किया जा रहा है तो उसे विनियमित किया जा सकेगा. उन्होंने कहा कि यह संशोधन जनजातीय परामर्श दात्री परिषद की बैठक में लिये गये प्रस्तावों के तहत ही किया जा रहा है. इससे विकास का मार्ग प्रशस्त होगा.
बाेलीं डॉ लोइस
एसपीटी-सीएनटी एक्ट में संशोधन पर दिग्भ्रमित कर रहा विपक्ष
कायम रहेगा मालिकाना हक
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