किसानों व विस्थापितों के हक में हो निर्णय

Published at :12 May 2016 5:19 AM (IST)
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किसानों व विस्थापितों के हक में हो निर्णय

पहल. नन सेलेबुल जमीन के बाजार दर निर्धारण को लेकर आयुक्त ने की बैठक. कहा आम व कटहल आदि फलदार वृक्ष का मुआवजा बीस साल की उत्पादकता पर होगा तय कृषि भूमि के मूल्य निर्धारण में 30 वर्षों के उपज को बनाया जायेगा आधार सरकार का न्यूनतम समर्थन मूल्य तथा मुद्रा स्फीति के अनुसार होगा […]

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पहल. नन सेलेबुल जमीन के बाजार दर निर्धारण को लेकर आयुक्त ने की बैठक. कहा

आम व कटहल आदि फलदार वृक्ष का मुआवजा बीस साल की उत्पादकता पर होगा तय
कृषि भूमि के मूल्य निर्धारण में 30 वर्षों के उपज को बनाया जायेगा आधार
सरकार का न्यूनतम समर्थन मूल्य तथा मुद्रा स्फीति के अनुसार होगा समायोजित
26 मार्च 2011 में वर्णित धानी 1 भूमि के मूल्य निर्धारण की पद्धति से होगा मूल्य निर्धारित
अविक्रयशील जमीन निर्धारित न्यूनतम कृषि मूल्य के अवरोही रूप से होगा क्रमबद्ध
दुमका : संताल परगना के प्रमंडलीय आयुक्त बालेश्वर सिंह ने अविक्रयशील रैयती कृषि भूमि के मूल्य निर्धारण पर जारी सरकार की अधिसूचना के अनुरूप गठित समिति की बैठक बुधवार को अपने कार्यालय में की. यही समिति न्यूनतम मूल्य निर्धारण के लिए अधिकृत की गयी है. समिति के सदस्य जिलों के उपायुक्त हैं, जिनसे आयुक्त ने कहा कि किसानों और विस्थापितों के हक में शीघ्र निर्णय लिया जाना चाहिए.
आयुक्त बालेश्वर सिंह ने बताया कि सरकार ने न्यूनतम मूल्य निर्धारण के लिए मार्गदर्शक सिद्वांत अधिसूचित किये हैं. ऐसे अंचल जहां अविक्रयशील और अविक्रयशील दोनों प्रकार की कृषि भूमि हो, अंचल के सभी अविक्रयशील मौजों के निर्धारित न्यूनतम कृषि मूल्य को अवरोही रूप से क्रमबद्ध किया जायेगा. उच्च मूल्य वाले कुल मौजों में से कम से कम आधी संख्या के मौजों का औसत मूल्य को निर्धारित किया जायेगा, जो उस अंचल के सभी मौजों की अविक्रयशील कृषि भूमि का प्रति डिसमिल न्यूनतम मूल्य माना जायेगा. आयुक्त ने कहा कि ऐसे अंचल जहां केवल अविक्रयशील कृषि भूमि हो,
वहां सीमावर्ती अंचल की बिक्रयशील कृषि भूमि के न्यूनतम मूल्य के आधार पर अविक्रयशील कृषि भूमि का न्यूनतम मूल्य निर्धारित किया जायेगा. यह सीमावर्ती अंचल इसी जिले का, इसी प्रमंडल का इस प्रमंडल और झारखंड के सीमावर्ती दूसरे राज्य का सीमावर्ती अंचल हो सकता है. आयुक्त श्री सिंह ने सभी उपायुक्तों को स्पष्ट किया कि यदि सीमावर्ती अंचल एक से अधिक हो तो सबको अवरोही क्रम में औसत मूल्य निर्धारित किया जायेगा तथा अधिकतम औसत वाले मूल्य को उस अंचल के सभी मौजों का न्यूनतम मूल्य माना जायेगा. आयुक्त ने यह भी कहा कि यदि सीमावर्ती अंचल में भी विक्रयशील भूमि ना हो तब सबसे समीपवर्ती अविक्रयशील कृषि भूमि वाले अंचल चाहे वह उसी जिला,
उसी प्रमंडल या किसी अन्य प्रमंडल का जिला या बिहार राज्य का जिला जो इस प्रमंडल की सीमा पर अवस्थित हो, का चयन यह समिति करेगी.आयुक्त बालेश्वर सिंह ने कहा कि उपज के आधार पर अविक्रयशील भूमि का बाजार मूल्य निर्धारण के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पत्रांक 292 दिनांक 26 मार्च 2011 में वर्णित धानी 1 भूमि के मूल्य निर्धारण की पद्धति के अनुसार भूमि का मूल्य निर्धारित किया जायेगा. मूल्य निर्धारण में 30 वर्षों के उपज को आधार बनाते हुए बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के वर्ष 2011-12 में आय मूल्य (प्रॉफिट वेल्यू) की अनुशंसा को भारत सरकार का न्यूनतम समर्थन मूल्य तथा मुद्रा स्फीति के अनुसार समायोजित किया जायेगा. आयुक्त ने सबों को उदाहरण से समझाते हुए कहा कि धानी- 1 का मूल्य – (20,000 रुपये + 13000 रुपये) गुणा 30 गुणा (1+गणना वर्ष से गेहूं एवं धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में हुई कृषि का प्रतिशत) होगा.
आयुक्त ने कहा कि धानी-॥ एवं धानी-॥।, बारी-। एवं बारी-॥ का बाजार मूल्य पूर्व की पद्धति से तथा बारी-॥ का मुआवजा धानी-॥। के अनुसार होगा. आयुक्त ने बताया कि धानी-। का 3/4 धानी-॥, धानी-।, का 1/2 धानी-॥।, धानी-। का 5/8 बारी-। तथा धानी-1 का 1/2 बारी-॥ होगा. आयुक्त ने कहा कि खतियान में वर्णित भूमि की श्रेणी के अनुसार भूमि की श्रेणी निर्धारित की जायेगी, यदि कृषि भूमि पर आवासीय या व्यावसायिक भवन निर्मित हो तो उसे आवासीय (होमस्टिड) माना जायेगा. आम कटहल आदि फलदार वृक्ष का मुआवजा उनके बीस साल की उत्पादकता के आधार पर तय किया जायेगा. आयुक्त ने इस बात पर बल दिया कि जो भी अधिक मूल्य प्राप्त होगा, उस मूल्य को भूमि अधिग्रहण के लिए अविक्रयशील भूमि का बाजार मूल्य माना जाये ताकि किसानों को अधिक से अधिक मुआवजा प्राप्त हो सके. आयुक्त ने कहा कि एक सप्ताह में सभी अपना-अपना प्रस्ताव तैयार कर लें ताकि अगली बैठक में निर्णय लिया जा सके. आयुक्त ने यह भी कहा कि पूर्व की अधिसूचना 1336, 28 अक्टूबर 2015 के द्वारा कोई अवार्ड घोषित किया गया है तो उसे निरस्त मानते हुए इसी प्रक्रिया से निर्धारण किया जाय.
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