नहीं होती है नियमित जांच, दुकानदार काट रहे चांदी
Updated at : 27 Apr 2018 5:03 AM (IST)
विज्ञापन

इलेक्ट्रॉनिक तराजू में भी करते हैं सेटिंग कर्मियों व अधिकारियों की कमी का रोना रो रहा विभाग दुमका : जिले का माप-तोल विभाग भगवान भरोसे चल रहा है. पदाधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक की कमी का खमियाजा ग्राहकों को भुगतना पड़ रहा है. वहीं व्यापारियों की चांदी कट रही है. महंगाई के इस जमाने में […]
विज्ञापन
इलेक्ट्रॉनिक तराजू में भी करते हैं सेटिंग
कर्मियों व अधिकारियों की कमी का रोना रो रहा विभाग
दुमका : जिले का माप-तोल विभाग भगवान भरोसे चल रहा है. पदाधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक की कमी का खमियाजा ग्राहकों को भुगतना पड़ रहा है. वहीं व्यापारियों की चांदी कट रही है. महंगाई के इस जमाने में सामान्य लोगों को सामानों की खरीदारी में वजन में भी कमी से उन पर दोहरी मार पड़ रही है. इससे उपभोक्ताओं को प्रतिवर्ष काफी चूना लग रहा है. दुकानदारों ने वाटों में छेड़छाड़ कर वजन घटा दिया जाता है. लोहे के विभिन्न वजनों के बने वाटों को पत्थर पर घीस कर या दूसरे तरीके से नीचे से उसको काट दिया जाता है, ताकि उसका वजन कम हो सके. कई जगह तो एक किलो की जगह वाट में छेड़छाड़ करके लगभग ढाई सौ ग्राम तक कम कर दिया जाता है और ग्राहकों को एक किलो की जगह महज पौन किलो ही सामान मिलता है. वाट में छेड़छाड़ का अधिकांश मामला फुटपाथ और अस्थायी दुकानदारों में ही देखा जाता है.
विभागीय पचड़े के कारण लोग नहीं करते शिकायत
परंपरागत वाटों के अलावा इलेक्ट्रॉनिक तराजू में भी छेड़छाड़ की जाती है तथा उसे इस तरह सेट किया जाता है कि उसका वजन कम हो. इतना ही नहीं, कपड़ा दुकानों पर उपयोग आनेवाले मीटर में भी छेड़छाड़ की जाती है तथा उसे घटा दिया जाता है. हालांकि विभागीय पचड़ों और जागरूकता की कमी के कारण ग्राहकों द्वारा भी इसकी शिकायत नहीं किये जाने से माप की चोरी करने वाले दुकानदारों की चांदी कट रही है.
पिछले दो सालों में जिले में नहीं चला जांच अभियान
विभाग द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वाटों का साल में विधिवत तरीके से एक बार तथा मैनुअल वाटों को दो वर्ष में एक बार जांच किये जाने का प्रावधान है. जांच करके वाटों व इलेक्ट्रानिक तराजू का वजन सुधारा जाता है. तथा समय-समय पर संघन जांच अभियान चलाकर वाटों की जांच की जाती. लेकिन दुमका जिले में पिछले दो साल में एक बार भी सघन जांच नहीं की गयी है. जिस कारण दुकानदारों का मनोबल बढ़ने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को आर्थिक क्षति हो रही है.
पदाधिकारी से लेकर अनुसेवक तक के पद रिक्त
जिले के नाप-तौल विभाग में कर्मियों का टोटा है, सभी पद रिक्त पड़े हुए हैं. जिस कारण नाप तौल विभाग का कार्य भी सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा है. जिले में तीन पद सृजित हैं, जिसमें एक निरीक्षक, एक लिपिक तथा एक अनुसेवक का पद है. परंतु ये तीनों पद रिक्त पड़े हुए हैं. निरीक्षक के पद पर देवघर के निरीक्षक प्रभार में हैं. वहीं लिपिक तथा अनुसेवक का पद रिक्त पड़ा हुआ है. जिस कारण नाप-तौल के कार्य में ब्रेक लग गया है.
बोले उपभोक्ता
-आज कल दुकानों में दो तरह का बटखारा रखा जाता है. जिसमें दिखाने के लिए एक और नापने के लिए दूसरे बटखारा उपयोग किया जाता है. लेकिन इस पर कार्रवाई नहीं होती है.
रिंकू कुमार राम
-बाजार से जब भी मीट या मछली खरीदते हैं, तो वहां नाप तो सही दिखता है पर जब घर आकर उसे नापते हैं तो ढेड़ सौ से दो सौ ग्राम तक कम हो जाता है.
संतोष कुमार तांती
बोले पदाधिकारी
विभाग में कर्मियों की भारी कमी है, मेरा पदस्थापन देवघर में है लेकिन मैं दुमका और जामताड़ा के अतिरिक्त प्रभार में भी हूं, कर्मियों की कमी के करण ही काम बेहतर ढंग से नहीं हो पा रहा है.
प्रदीप कुमार, प्रभारी निरीक्षक
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




