सिर्फ नाम का रह गया बासुकिनाथ सोलर सिटी
Updated at : 11 Dec 2017 5:59 AM (IST)
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बासुकिनाथ : भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय व झारखंड सरकार के सहयोग से 1.25 करोड़ की लागत से 10 अगस्त 2011 में बासुकिनाथ को सोलर सिटी बनाया गया था. भारत सरकार में तत्कालीन ऊर्जा मंत्री डॉ फारूख अब्दुल्ला ने इसका विधिवत शुभारंभ किया था. इस प्रोजेक्ट से लोगों को विशेष लाभ नहीं […]
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बासुकिनाथ : भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय व झारखंड सरकार के सहयोग से 1.25 करोड़ की लागत से 10 अगस्त 2011 में बासुकिनाथ को सोलर सिटी बनाया गया था.
भारत सरकार में तत्कालीन ऊर्जा मंत्री डॉ फारूख अब्दुल्ला ने इसका विधिवत शुभारंभ किया था. इस प्रोजेक्ट से लोगों को विशेष लाभ नहीं मिल पा रहा है. कंपनी के मनमानी रवैये से 50 केवीए का सोलर पावर संयंत्र का संचालन ठीक तरीके से नहीं हो रहा है.
बासुकिनाथ सोलर सिटी सिर्फ नाम का रह गया है. मंदिर के नाम पर लगाया गया इस संयंत्र से मंदिर को लाभ नहीं मिल पा रहा है. अधिकांश सोलर लाइटें खराब है. सड़क किनारे यह शोभा की वस्तु बनी हुई है. सोलर लाइट के कुछ खंभे पर तो चिड़िया का घोंसला तक बना लिया है.
सड़क किनारे स्थित सोलर लाइट के पथ प्रकाश स्तंभ झुक गया है. देखरेख के अभाव में सवा करोड़ का यह परियोजना हाथी का दांत साबित हो रहा है. देख-रेख के अभाव में प्रखंड कार्यालय के छत पर लगा हुआ पावर संयंत्र के कई सोलर प्लेट उखड़ भी गये हैं सरकार की महत्वाकांक्षी सौर ऊर्जा योजना का नहीं मिल रहा है लाभ.
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