आंगनबाड़ी केंद्रों में कम होने लगी है बच्चों की संख्या

Updated at : 14 Nov 2017 6:43 AM (IST)
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आंगनबाड़ी केंद्रों में कम होने लगी है बच्चों की संख्या

केंद्रों के उद्देश्य पर ग्रामीण उठाने लगे हैं सवाल दुमका : जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 6 साल तक के बच्चों को पोषाहार नसीब नहीं हो रहा है. जिले में एक-दो महीने से नहीं, बल्कि इस वित्तीय वर्ष में चावल ही आवंटित नहीं हुआ है. इस वजह से दुमका के आधे से अधिक […]

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केंद्रों के उद्देश्य पर ग्रामीण उठाने लगे हैं सवाल

दुमका : जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 6 साल तक के बच्चों को पोषाहार नसीब नहीं हो रहा है. जिले में एक-दो महीने से नहीं, बल्कि इस वित्तीय वर्ष में चावल ही आवंटित नहीं हुआ है. इस वजह से दुमका के आधे से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों में खिचड़ी नहीं बन पा रही है. बच्चों को भूखे ही रहना पड़ जा रहा है. केवल उन्हीं आंगनबाड़ी केंद्रों में अभी खिचड़ी संचालित हो रही है, जहां पहले से आवंटित चावल बचा है. ऐसे केंद्रों की संख्या काफी कम ही है. विभाग के अधिकारी भी स्वीकार कर रहीं हैं कि केंद्रों में खिचड़ी बंद है, बच्चे पोषाहार से वंचित हो रहे हैं.
2060 आंगनबाड़ी केंद्र हैं संचालित : दुमका जिले में अभी 2060 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं.
जहां स्कूल पूर्व शिक्षा संचालित की जाती है. इसके अलावा उन्हें हॉट कुक मील (गर्म तथा ताजा पूरक पोषाहार) तथा रेडी टू इट के तहत फॉर्टिफाइड पैकेज्ड सप्लीमेंटरी फूड दिये जाते हैं. टीकाकरण की भी सुविधा इन्हीं केंद्रों में उपलब्ध करायी जाती है. गर्भवती महिलाओं को भी पोषाहार यहीं उपलब्घ कराया जाता है.
वर्षों पुरानी दर पर ही होता भुगतान : महिला बाल विकास व समाज कल्याण विभाग ने आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्म भोजन उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय स्तर पर सरकार चावल तो उपलब्ध करा देती है. लेकिन उसे बनाने के लिए दाल, तेल, चीनी, सोयाबीन बड़ी, दलिया आदि पुरानी दर पर भुगतान कर रही है, जो कई वर्ष पहले दिया करती थी.
इस वर्ष चावल का आवंटन हमें नहीं मिल पाया है. जो पूर्व का चावल बचत का है, उसी से कुछ केंद्रों में काम चलाया जा रहा है. आधे केंद्रों में ही बच्चों को खिचड़ी मिल पा रही है. 3 से 6 साल के बच्चे आंगनबाड़ी केंद्रों में होते हैं. बहुत परेशानी हो रही है. बच्चे पोषाहार से वंचित हो रहे हैं.
श्वेता भारती, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी
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