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Dhanbad News : आइआइटी आइएसएम में बोले केंद्रीय शिक्षा मंत्री : छात्रों को अपनी मातृभाषा में लेक्चर समझने की सुविधा दें संस्थान

Updated at : 01 Aug 2025 2:13 AM (IST)
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Dhanbad News : आइआइटी आइएसएम में बोले केंद्रीय शिक्षा मंत्री : छात्रों को अपनी मातृभाषा में लेक्चर समझने की सुविधा दें संस्थान

आइआइटी आइएसएम के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों को किया संबोधित, 45वें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेने धनबाद पहुंचे केंद्रीय शिक्षा मंत्री

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आइआइटी जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों को अपनी मातृभाषा में पढ़ाई समझने की सुविधा मिलनी चाहिए. यह जिम्मेदारी संस्थान प्रबंधन की होनी चाहिए कि हर छात्र को विषयवस्तु समझने में भाषा बाधा न बने. नयी शिक्षा नीति भी मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा देती है. श्री प्रधान गुरुवार को आइआइटी आइएसएम धनबाद में बीटेक के नये छात्रों के ओरिएंटेशन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने छात्रों के सवालों का उत्तर भी दिया. बिहार के मधुबनी से आये छात्र मो कलाम ने केंद्रीय मंत्री से सवाल किया कि वह बिहार बोर्ड के छात्र हैं. उनकी स्कूली शिक्षा हिंदी माध्यम में हुई है. जेइइ एडवांस्ड में सफलता के बाद आइआइटी आइएसएम में नामांकन मिला़ लेकिन कक्षाओं में पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी होने के कारण उन्हें विषयवस्तु समझने में कठिनाई हो रही है. इस पर केंद्रीय मंत्री ने संस्थान के निदेशक प्रो सुकुमार मिश्रा को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि मो कलाम जैसे छात्रों को उनकी मातृभाषा में लेक्चर समझाने की समुचित व्यवस्था हो. मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों के सर्वांगीण विकास की बात करते हुए कहा कि जिस प्रकार आइआइटी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हर छात्र के लिए अनिवार्य विषय है, उसी तरह खेल को भी अनिवार्य बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि रचनात्मकता और खेल दोनों विद्यार्थियों के मानसिक व शारीरिक विकास के लिए जरूरी हैं. मथुरा की एक छात्रा रितिका सिंह द्वारा खेलों में भागीदारी को लेकर उठाये गये सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि आइआइटी जैसे संस्थानों को छात्रों को खेलों में भाग लेने की पूरी आजादी देनी चाहिए.

छात्रों को मिले रचनात्मकता की स्वतंत्रता :

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस सभागार में उपस्थित सभी छात्र-छात्राएं बेहद प्रतिभाशाली हैं, जिन्होंने दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक में सफलता पायी है. ऐसे छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न कर, उन्हें रचनात्मक कार्यों में भाग लेने की स्वतंत्रता दी जानी चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि दूसरे सेमेस्टर से तीसरे सेमेस्टर में जाने वाले छात्रों के लिए क्लास अटेंडेंस से संबंधित नियमों को इतना कठोर न बनाया जाये कि उनकी उन्नति बाधित हो. धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें. उन्होंने कहा कि 2014 में जहां देश में केवल 500 स्टार्टअप थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 1.57 लाख हो चुकी है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ऐसे युवाओं को हर स्तर पर सहयोग कर रही है. पटना के छात्र शुभम के उस सवाल पर कि स्नातक के बाद 70 प्रतिशत युवा बेरोजगार रह जाते हैं, उन्होंने कहा कि असफलता से घबराना नहीं चाहिए. सरकार हर परिस्थिति में युवाओं के साथ है.

लाडली और मईंया योजना कल्याणकारी दायित्व :

बोकारो के छात्र तुषार कांति सिंह द्वारा लाडली और मईंया योजना पर उठाये गये सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि ये योजनाएं सरकार का सामाजिक दायित्व हैं. भारत एक कल्याणकारी राज्य है और इन योजनाओं को समाप्त नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि सरकार उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले हर छात्र पर भी लाखों रुपये खर्च कर रही है.

छठी से आठवीं तक शुरू हुआ स्किल कोर्स :

मंत्री ने बताया कि स्कूलों में छठी कक्षा से ही कौशल आधारित विषयों की पढ़ाई शुरू कर दी गई है. उन्होंने आइआइटी आइएसएम के निदेशक से आग्रह किया कि छात्रों को हर सेमेस्टर में धनबाद की भूमिगत खदानों का भ्रमण कराया जाए, ताकि वे व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर सकें.

झरिया के पुनर्विकास पर खर्च होंगे हजारों करोड़ :

केंद्रीय शिक्षा मंत्री बताया कि केंद्र सरकार झरिया क्षेत्र के पुनर्विकास की दिशा में काम कर रही है. इस पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे. धनबाद जल्द ही कोल बेड मिथेन (सीबीएम) उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है. इसकी शुरुआत हो चुकी है. इस कार्यक्रम में उन्होंने छात्रों के कई सवालों का जवाब दिया. छात्रों ने उनके जवाब पर खूब तालियां बजायी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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NARENDRA KUMAR SINGH

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