एसएनएमएमसीएच के कल्चर एंड डीएसटी लैब में 30 लाख रुपये के रिएजेंट किट एक्सपायर

Updated at : 09 Aug 2024 1:38 AM (IST)
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एसएनएमएमसीएच के कल्चर एंड डीएसटी लैब में 30 लाख रुपये के रिएजेंट किट एक्सपायर

राज्य सरकार ने अगले साल तक ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) के उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है. लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से एसएनएमएमसीएच के कल्चर एंड डीएसटी लैब में लगभग 30 लाख रुपये के रिएजेंट किट पड़े-पड़े एक्सपायर हो गये.

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विक्की प्रसाद, धनबाद.

राज्य सरकार ने अगले साल तक ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) के उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है. लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण मरीज स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं. ताजा मामला शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) स्थित कल्चर एंड डीएसटी लैब का है. यहां लगभग 30 लाख रुपये के रिएजेंट किट पड़े-पड़े एक्सपायर हो गये. कल्चर एंड डीएसटी लैब के निरीक्षण के लिए रांची से पहुंचे राज्य यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ कमलेश कुमार को जांच के दौरान गुरुवार को इसका पता चला. निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि 2022 में लैब में लगभग 30 लाख रुपये के रिएजेंट किट की खरीदारी हुई थी. इनका इस्तेमाल नहीं किया गया. किट 2023 में ही एक्सपायर हो चुके हैं. वर्तमान में लैब के फ्रीज में एक्सपायर हो चुके किट रखे हुए हैं. राज्य यक्ष्मा पदाधिकारी ने लैब का संचालन करने वाले संबंधित अधिकारी को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है.

छह माह से लैब बंद होने पर जतायी नाराजगी :

निरीक्षण के दौरान डॉ कमलेश कुमार को यह भी जानकारी मिली कि विगत छह माह से कल्चर एंड डीएसटी लैब में जांच बंद है. लैब की एकमात्र चिकित्सक के मैटरनिटी लीव पर चले जाने के बाद से यहां टीबी मरीजों के सैंपलों की जांच बंद है.

कल्चर एंड डीएसटी लैब में एक्सडीआर की होती है जांच:

जब कोई टीबी मरीज मिलता है, तो उसमें दो प्रकार के लक्षण होते हैं. एक सेंसिविटी और दूसरा रेसिस्टेंस. टीबी संक्रमित गंभीर मरीज, जिन पर टीबी के इलाज से जुड़ी अधिकतर दवाइयां बेअसर साबित होती हैं, तो इसे एक्सडीआर यानी एक्सट्रा ड्रग रेजिस्टेंस टीबी कहा जाता है. कल्चर एंड डीएसटी लैब में एक्सडीआर जांच किट व रिएजेंट से की जाती है. इधर राज्य यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ कमलेश कुमार ने कहा कि कल्चर एंड डीएसटी लैब के लंबे समय से बंद होने की जानकारी मिली है. रिएजेंट किट एक्सपायर होने पर रिपोर्ट मांगी गयी है. लैब में चिकित्सक व स्टाफ की कमी है. जल्द ही इसपर काम कर सुनिश्चित किया जायेगा कि लैब का सही तरीके से संचालन हो. चिकित्सक के छुट्टी पर चले जाने के बाद क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई. इसकी जानकारी अधिकारियों से ले रहे हैं.

दुमका से पहुंची टीबी की दवा, आज से बांटी जायेगी :

राज्य यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ कमलेश कुमार ने गुरुवार को सिविल सर्जन कार्यालय में जिला के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की. इस दौरान टीबी उन्मूलन को लेकर चलाये जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी ली और जिले में टीबी की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया. बाद में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न जिलों में टीबी की दवा की आपूर्ति के लिए रांची व दुमका में स्टोर बनाये गये हैं. धनबाद को दुमका स्टोर से जोड़ा गया है. दुमका से धनबाद के लिए टीबी की दवा भेजी गई है. शुक्रवार से जिले के विभिन्न अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों में दवा का वितरण शुरू कर दिया जायेगा.

फिलहाल राशनिंग कर बांटी जा रही दवा :

उन्होंने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग से टीबी की दवा राज्य को मिलती है. कुछ माह से दवा की अनियमित आपूर्ति के कारण मरीजों को समय पर दवा नहीं मिल पा रही है. ऐसे में अभी राशनिंग कर मरीजों को दो माह की जगह एक सप्ताह की दवा दी जा रही है. वहीं स्थानीय स्तर पर टीबी की दवा की खरीदारी के लिए टेंडर निकाला गया है. टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मरीजों को नियमित रूप से दवा मिलने लगेगी.

टीबी विभाग में भरे जायेंगे रिक्त पद :

डॉ कमलेश कुमार ने कहा कि जिले के विभिन्न प्रखंडों पर संचालित टीबी विभाग में सीएचओ, लैब टेक्नीशियन, सुपरवाइजर समेत अन्य रिक्त पदों को भरा जायेगा. टीबी उन्मूलन को लेकर पंचायत स्तर पर हर माह कैंप लगाने की योजना है. कैंप में टीबी के संभावित मरीजों का सैंपल कलेक्ट किया जायेगा.

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