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Dhanbad News: कालीपुर : बीमारों को खाट पर लाद कर ले जाना पड़ता है अस्पताल

Updated at : 26 Mar 2025 2:32 AM (IST)
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Dhanbad News: कालीपुर : बीमारों को खाट पर लाद कर ले जाना पड़ता है अस्पताल

Dhanbad News: फ्लोराइड युक्त पानी के सहारे कट रही जिंदगी

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Dhanbad News: शोभित रंजन/अजय उपाध्याय, धनबाद. आजादी के लगभग आठ दशक बाद भी धनबाद जिले के बलियापुर प्रखंड की घड़बड़ पंचायत के कालीपुर गांव की स्थिति बदहाल है. विकास की तरह-तरह की योजनाएं शुरू होने के बाद भी इस पंचायत के लोगों को शुद्ध पानी तक नहीं मिल रहा. फ्लोराइड युक्त पानी पी कर लोग गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं. गांव तक जाने के लिए पक्की सड़क तक नहीं है. बीमार पड़ने पर खाट पर लाद कर बीमारों को मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है.

एक तरफ डीएमएफटी, सांसद, विधायक निधि सहित विकास के लिए कई तरह की योजनाएं चल रही हैं. लेकिन, बलियापुर प्रखंड के घड़बड़ पंचायत के कालीपुर गांव के लोग ग्रामीण सड़क, बिजली, स्वास्थ्य सुविधा और स्वच्छ पेयजल के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं. इस गांव की आबादी लगभग 1800 है. गांव के लोगों का कहना है कि कई वर्षों से लोग सरकार से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन समाधान अभी तक नहीं मिला है. पक्की सड़क नहीं होने से उन्हें आवागमन में काफी परेशानी होती है. खासकर बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाने में बहुत कठिनाई होती है. बिजली नहीं होने से शाम ढलते ही पूरा गांव अंधेरे के आगोश में डूब जाता है. बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. ग्रामीणों को पीने के लिए भी साफ पानी नहीं मिल पा रहा है. जो पानी वे पी रहे हैं, उसमें फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा है. जिससे उन्हें स्वास्थ्य संबंधित समस्या का सामना करना पड़ रहा है. यहां दामोदर नदी से बिना फिल्टर किये जलापूर्ति की जा रही है. वह भी सप्ताह में एक या दो बार. मजबूरन ग्रामीणों को चापाकल का पानी पीना पड़ता है, जिसमें फ्लोराइड की मात्रा बहुत ज्यादा है. इस पानी को गर्म कर दैनिक कार्यों के लिए इस्तेमाल करते हैं.

दांत, कमर दर्द, हड्डी डेढ़ी जैसी बीमारियों से जूझ रहे ग्रामीण :

जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर बसे कालीपुर गांव की स्थिति काफी बदहाल है. ग्रामीणों के अनुसार इस गांव में शुरू से पानी में फ्लोराइड की ज्यादा मात्रा परेशानी का कारण बनी हुई है. गांव में सभी चापाकलों के पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा होने की वजह से इस पानी को पीने से दांत का खराब होना शुरुआती लक्षण है. गर्दन, कमर, घुटने की हड्डी टेढ़ी होने लगती है. लोग सीधा नहीं चल पाते हैं. सुबह में बिस्तर से उठने में भी दिक्कत होती है. महिलाओं में बांझपन की समस्या भी हो रही है. आंख की रोशनी व किडनी पर भी असर पड़ता है.

आधे घंटे में पानी में जम जाती है पीली परत :

गांव में जब प्रभात खबर की टीम पहुंची तो चापाकल से बाल्टी व अन्य बर्तन में पानी भरा गया. देखते ही देखते आधे घंटे में ही पानी एकदम गंदा हो गया. बर्तन के पानी में पीला परत बन गया. पीना तो दूर, इस पानी से खाना भी नहीं बना सकते. गांव में आठ चापाकल लगाया गया है, जिसमें से छह खराब पड़े हैं. मात्र दो चापाकलों पर पूरी आबादी टिकी हुई है.

आजादी के बाद से नहीं हुई है सड़क की मरम्मत :

ग्रामीणों ने बताया कि आजादी के बाद से गांव की सड़क की मरम्मत नहीं हुई है. नुकीले पत्थर युक्त कच्ची सड़क पर चलना पड़ता है. जर्जर सड़क के कारण बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है. गांव तक एंबुलेंस तो दूर बाइक आने में दिक्कत होती है. कई बार एंबुलेंस गांव तक नहीं आ पाने की वजह से बीमार लोगों को खाट पर लेकर डेढ़ किमी दूर मेन सड़क पर ले जाना पड़ता है. सीएचसी बलियापुर या एसएनएमएमसीएच अस्पताल पहुंचाने में विलंब होने से कई बार लोगों जान चली जाती है.

क्या कहते हैं ग्रामीण

विजय कुमार महतो :

आजादी के बाद से गांव की सड़क की मरम्मत नहीं हुई है. कई बार विधायकों से भी इसकी शिकायत की गयी है. सड़क जर्जर होने से काफी परेशानी होती है. गांव में एंबुलेंस भी नहीं आ पाती है.

श्यामपद महतो :

गांव में पीने के पानी के लिए सुविधा नहीं है. यहां आठ चापाकलों में से छह खराब हैं. दो चापाकलों से जो पानी आ रहा है, उसमें फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा है, जिससे लोग बीमार हो रहे हैं.

श्रीराम महतो :

गांव में बिजली का पोल तो लगाया गया. मगर घर तक कनेक्शन नहीं दिया गया. कनेक्शन लेने तार बगैरह में काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं. इसके बाद भी गांव में बिजली नहीं के बराबर रहती है. लोग परेशान हैं.

महादेव महतो :

आजादी के समय गांव में बनी सड़क की आज तक एक बार भी मरम्मत नहीं की गयी है. पूरा गांव आठ से दस किलोमीटर में फैला हुआ है. जिसमें मात्र 100 मीटर सड़क की मरम्मत मुखिया के फंड से एक बार हुई थी.

संदीप कुमार महतो :

गांव में स्वास्थ्य केंद्र नहीं है. इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बलियापुर या एसएनएमएमसीएच धनबाद जाना पड़ता है. कई बार अस्पताल पहुंचे में देरी होने की वजह से लोगों की जान भी चली गयी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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MANOJ KUMAR

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MANOJ KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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