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जिला उपभोक्ता आयोग ने दिया इंश्योरेंस कंपनी को भुगतान का आदेश

अदालत से : मानसिक परेशानी के लिए पांच हजार मुआवजा और वाद खर्च के रूप में पांच हजार का भुगतान दो माह के अंदर करने का आदेश

विधि प्रतिनिधि, धनबाद,

जिला उपभोक्ता आयोग धनबाद के अध्यक्ष ललित प्रकाश चौबे, सदस्य चंद्रशेखर झा व शिप्रा ने गुरुवार को एक बीमा मामले में संयुक्त रूप से आदेश पारित कर विपक्षी ब्रांच मैनेजर एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस धनबाद को आदेश दिया कि वह परिवादी राजकुमार सौंधी को डेथ क्लेम की राशि चार लाख 37 हजार 26 रुपए व एक लाख 79 हजार 740 रुपये में से वापस की गयी प्रीमियम राशि के साथ मानसिक परेशानी के लिए पांच हजार मुआवजा और वाद खर्च के रूप में पांच हजार का भुगतान दो माह के अंदर कर दे. यदि विपक्षी ब्रांच मैनेजर निर्धारित समय में परिवादी को उपरोक्त राशि का भुगतान नहीं करते हैं, तो उन्हें 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से आदेश पारित होने की तिथि से भुगतान करना होगा.

क्या है मामला :

परिवादी राजकुमार सौंधी की मां ने अपने जीवनकाल में 4 लाख 37 हजार 26 व 1 लाख 79 हजार 740 रुपये की दो पॉलिसी एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस धनबाद ब्रांच में करायी थी. 23.12.2018 को उनकी मृत्यु हो गयी. परिवादी ने डेथ क्लेम के लिए आवेदन किया. इसे विपक्षी ब्रांच मैनेजर ने केवल पॉलिसी होल्डर द्वारा जमा की गयी प्रीमियम राशि का भुगतान कर शेष लाभ से वंचित कर दिया. साथ ही परिवादी के आवेदन को खारिज कर दिया. तब 9 जुलाई 2021 को परिवादी ने उपभोक्ता आयोग धनबाद में एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस धनबाद के ब्रांच मैनेजर के विरुद्ध मुकदमा दायर किया.

डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव ऑफिसर धनबाद और ब्लॉक को ऑपरेटिव ऑफिसर टुंडी का वेतन रोकने का आदेश :

जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष ललित प्रकाश चौबे ने गुरुवार को डीसी धनबाद को एक पत्र भेज कर डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव ऑफिसर धनबाद व ब्लॉक को-ऑपरेटिव ऑफिसर टुंडी का वेतन रोकने का आदेश दिया है. लटानी निवासी मनोज कुमार कविराज ने आयोग में लटानी पैक्स के खिलाफ सीसी केस दायर किया था. इसमें आयोग ने विपक्षी पैक्स को आदेश दिया था कि वह परिवादी मनोज को 10 लाख रुपए का भुगतान कर दे. लेकिन परिवादी को मात्र पांच लाख रुपए का भुगतान किया गया. बाद में मनोज ने शेष राशि की वसूली के लिए उपभोक्ता आयोग धनबाद में एक जारी वाद दायर किया. इसमें आयोग ने पैक्स को उक्त शेष राशि का भुगतान परिवादी को करने का आदेश दिया. फिर भी विपक्षी ने उक्त राशि का भुगतान नहीं किया. तब आयोग ने पैक्स के अधिकारी के खिलाफ डिस्ट्रेस वारंट जारी किया है.

कोल शॉर्टेज मामले में सीबीआइ को गवाह पेश करने का आदेश :

भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के बस्ताकोला क्षेत्र के कुइया उत्खनन परियोजना में हुए लाखों मिट्रिक टन कोल शॉर्टेज मामले की सुनवाई गुरुवार को सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश रजनीकांत पाठक की अदालत में हुई. अभियोजन की ओर से सीबीआइ कोई गवाह पेश नहीं कर सकी. अदालत ने सीबीआइ को गवाह पेश करने का आदेश दिया है. अदालत ने साक्ष्य के लिए अगली तारीख निर्धारित कर दी. अदालत में सुनवाई के दौरान बस्ताकोला क्षेत्र के पूर्व महाप्रबंधक आरयू पांडेय, पूर्व वरीय सर्वे ऑफिसर अरविंद घोष, पूर्व एरिया सर्वे ऑफिसर सरित सुधा सरकार, केओसीपी के पूर्व परियोजना पदाधिकारी शंभू दयाल धुर्वा व प्रबंधक किशोर यादव उपस्थित थे. उनकी ओर से उनके अधिवक्ता ने पैरवी की.

क्या है आरोप :

सीबीआइ व विजिलेंस की संयुक्त टीम ने कुइया उत्खनन परियोजना के कोयले के बुक स्टॉक की जांच की. इस दौरान वर्ष 2009 से 2011 की अवधि में कुइया उत्खनन परियोजना में 4 लाख 24 हजार 689 मिट्रिक टन कोल शॉर्टेज था. इससे बीसीसीएल को 46 करोड़ 39 लाख 76 हजार 979 रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ था. बता दें कि सीबीआइ ने अनुसंधान के उपरांत 6 मई 2016 को उपरोक्त आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर किया था.

मटकुरिया गोलीकांड अनुसंधानकर्ता ने दी गवाही :

मटकुरिया गोलीकांड की सुनवाई गुरुवार को जिला व सत्र न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत में हुई. सुनवाई के दौरान कांड के आरोपी पूर्व मंत्री बच्चा सिंह, मन्नान मल्लिक व अन्य हाजिर नहीं थे. लगातार दूसरे दिन मामले के अनुसंधानकर्ता शिव शंकर तिवारी का बयान दर्ज किया गया. गुरुवार को भी समयाभाव के कारण आइओ का मुख्य परीक्षण पूरा नहीं किया जा सका. अदालत ने अभियोजन को गवाह पेश करने का आदेश देते हुए 21 जून की तारीख निर्धारित की है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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