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श्रीराम-सीता विवाह प्रसंग ने किया भाव विभोर

Updated at : 14 Feb 2024 8:10 PM (IST)
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श्रीराम-सीता विवाह प्रसंग ने किया भाव विभोर

धनबाद: जाकर नाम सुनत शुभ होई, मोरे गृह आवा प्रभु सोई. अर्थात जिनका नाम लेने से शुभ होता है वही मेरे घर में पुत्र बन कर आ गये. भगवान राम के जन्म की चर्चा करते हुए यह बात बुधवार को अंबाला से आये स्वामी राकेश महाराज ने कही. उन्होंने श्री राम की बाल लीला, विश्वामित्र […]

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धनबाद: जाकर नाम सुनत शुभ होई, मोरे गृह आवा प्रभु सोई. अर्थात जिनका नाम लेने से शुभ होता है वही मेरे घर में पुत्र बन कर आ गये. भगवान राम के जन्म की चर्चा करते हुए यह बात बुधवार को अंबाला से आये स्वामी राकेश महाराज ने कही. उन्होंने श्री राम की बाल लीला, विश्वामित्र के राम-लक्ष्मण की मांग, अहिल्या उद्धार, ताड़का मारिच का उद्धार, जनक पुर में प्रवेश, धनुष यज्ञ व श्री राम विवाह का वर्णन कर भक्तों को भाव विभोर कर दिया. जिला स्कूल बाबूडीह प्रांगण में संगीतमयी श्रीराम कथा अमृतवर्षा आयोजन समिति की ओर से आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा का आज पांचवां दिन था.
धनुष यज्ञ में क्या हुआ: स्वामी राकेश महाराज ने राम विवाह के प्रसंग पर कहा कि महाराज जनक ने धनुष यज्ञ का आयोजन जनकपुर में किया. सभी राजाओं को निमंत्रण दिया गया. सभी राजा शिव धनुष यज्ञ देखने आये. राजा जनक की यह प्रतिज्ञा थी कि इस धनुष का खंडन करने वाले को ही सीता वरण करेंगी. सभी राजा ने उस धनुष को तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन धनुष हिला तक नहीं. तब महाराज जनक को चिंता हुई कि धरती वीरों से विहीन हो चुकी है. अगर मैं यह जानता तो यह कठिन प्रतिज्ञा कभी नहीं करता. मैंने जान लिया कि मेरी सीता का विवाह ब्रह्माजी ने लिखा ही नहीं है. इस दौरान राजा जनक ने कहा कि हे राजाओं अपनी-अपनी आशाओं को त्याग कर अपने घर चले जाओ. उसी सभा में विश्वामित्र के साथ दोनों भाई राम व लक्ष्मण भी बैठे हुए थे. लक्ष्मण जी को अचानक क्रोध आया और वह सभा में खड़े होकर बोल उठे-हे जनक आपने इस सभा में अनुचित वचन का प्रयोग क्यों किया. जिस सभा में रघुवंशी बैठा हो, तो किसी की हिम्मत नहीं है कि वह अनुचित बोल दे. लक्ष्मण ने कहा कि यदि भैया श्रीराम की आज्ञा हो तो इस धनुष को गेंद की तरह उठा लूं, कच्चे घड़े की तरह फोड़ दूं, मूली की तरह तोड़ दूं. तभी विश्वामित्र जी ने श्रीराम को आदेश दिया और कहा कि हे राम उठो और इस विशाल धनुष का खंडन करो और जनक का दु:ख दूर करो. तब राम उठे और मन ही मन अपने गुरु को प्रणाम कर धनुष को बीचों बीच तोड़ दिया. इसके बाद सीता-राम विवाह हुआ.
निकली झांकी: कथा के दौरान राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान की झांकी निकाली गयी. विवाह के मौके पर पुष्प वर्षा हुई और वेद मंत्रोच्चार हुआ. इस दौरान मौके पर राकेश जी महाराज को माल्यार्पण करने वालों में धनबाद विधायक राज सिन्हा, भाजपा नेता सत्येंद्र कुमार, रवि चौधरी, योगेंद्र शर्मा, पिंटू कुमार सिंह, राकेश शर्मा, वैभव सिन्हा, हरिओम शर्मा, धनलाल दूबे, हरेराम सिंह, प्रमोद सिंह, सियाशरण सिंह, केके सिन्हा, प्रेम गोप, विनय राय, राकेश सिंह आदि शामिल थे.
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