चास में धंधेबाजों ने सरकारी जमीन भी बेच दी

Updated at : 07 Jan 2020 12:52 AM (IST)
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चास में धंधेबाजों ने सरकारी जमीन भी बेच दी

धनबाद : जिला-बोकारो, अंचल-चास, मौजा-बांधगोड़ा, खाता संख्या-28, प्लॉट संख्या-978. यह वह जमीन है, जिसका बंटवारा मूल रैयतों द्वारा पुरुलिया कोर्ट में दायर टीएस (टाइटल सूट)- 46/1953 के जरिये प्रथम पक्ष के ज्योतिलाल महथा व सर्वानंद महथा दोनाें पिता स्व सुधाकर महथा व मां श्रीमात्या तीतू महतनी पति स्व सुधाकर महथा और दूसरे पक्ष के विद्याधर […]

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धनबाद : जिला-बोकारो, अंचल-चास, मौजा-बांधगोड़ा, खाता संख्या-28, प्लॉट संख्या-978. यह वह जमीन है, जिसका बंटवारा मूल रैयतों द्वारा पुरुलिया कोर्ट में दायर टीएस (टाइटल सूट)- 46/1953 के जरिये प्रथम पक्ष के ज्योतिलाल महथा व सर्वानंद महथा दोनाें पिता स्व सुधाकर महथा व मां श्रीमात्या तीतू महतनी पति स्व सुधाकर महथा और दूसरे पक्ष के विद्याधर महथा (सुधाकर महथा के भाई) के बीच हुआ. इसमें प्रथम पक्ष को 18़ 97 एकड़ और दूसरे पक्ष को 2.91 एकड़ जमीन मिली.

प्रथम पक्ष ने 1958 से 1991 के बीच 18.97 एकड़ में से 16.60 एकड़ जमीन विभिन्न लोगों के साथ-साथ वन विभाग व डीपीएलआर (निदेशक परियोजना एवं भूमि पुनर्वास) बोकारो को दे दी. इस तरह प्रथम पक्ष के मूल रैयत के पास केवल 2.37 एकड़ ही जमीन बची.

इसके बाद 2007 में धंधेबाजों ने प्रथम पक्ष से 2.37 एकड़ की जगह छह एकड़ जमीन का गलत पावर ऑफ अटार्नी ले लिया, फिर इस जमीन को कागजों पर 20 एकड़ (रास्ता सहित 25 एकड़) बना कर बेच दिया. वहीं दूसरे पक्ष ने अपनी जमीन 2.91 एकड़ किसी को नहीं बेची, जबकि उक्त प्लॉट का कुल रकबा 21.88 (18़ 97 + 2.91 ) एकड़ ही है.

कब, किसे और कितनी बेची गयी जमीन : एक पक्ष के ज्योतिलाल महथा व सर्वानंद महथा व उनकी मां श्रीमात्या तीतू महतनी को जब 1953 में 18़ 97 एकड़ जमीन मिली, तो शुरुआत में सबकुछ ठीक रहा. कुछ साल बाद जमीन को बेचने का सिलसिला शुरू हो गया.

शुरुआत हुई 1958 में इस साल वन विभाग ने 4.76 एकड़ वन भूमि (सुरक्षित वन भूमि) का अधिग्रहण कर लिया. इसके बाद 1962 में डीपीएलआर ने 3.98 एकड़ जमीन (सरकारी) ले ली. इसके बाद वर्ष 1973 में 2.40 एकड़ भूमि उत्तम शर्मा व तपन शर्मा को उनकी दादी श्रीमात्या तीतू महतनी ने दे दी.

फिर वर्ष 1988 में 0.46 एकड़ जमीन शंकर प्रसाद सिंह, सुधांशु कुमार, शिवेंद्र कुमार, मनीष कुमार व अन्य को बेच दी गयी. और अंत में वर्ष 1987 से लेकर 1991 के बीच पांच एकड़ जमीन आर्यभट्ट आवास सहयोग समिति लिमिटेड को बेच दी गयी. इस तरह इतने वर्षों में पहले पक्ष द्वारा 18़ 97 एकड़ में से 16.60 एकड़ जमीन विभिन्न लोगों को बेच दी गयी और इनके पास केवल 2.37 एकड़ ही जमीन रह गयी.

दूसरे पक्ष द्वारा अपने 2.91 एकड़ जमीन की कोई बिक्री नहीं की गयी. इस बात की पुष्टि डीसी बोकारो के निर्देश पर अंचल अधिकारी, चास द्वारा पत्रांक-2222 दिनांक छह नवंबर 2018 के माध्यम से अपर समाहर्ता को सौंपी गयी उक्त प्लाॅट की संयुक्त भू मापी की रिपोर्ट से होती है.

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