धनबाद : सांस रुकने के तीन मिनट के अंदर बचायी जा सकती है जान

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Oct 2019 8:37 AM

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धनबाद : जब किसी व्यक्ति की धड़कन व सांस अचानक रुक जाये, किसी को दिल का दौरा पड़ जाये और उस वक्त चिकित्सीय उपचार चाह कर भी न मिल पाये तो ऐसे मौके पर बेसिक लाइफ सपोर्ट उस व्यक्ति की जान बचाने में काफी सहायक साबित हो सकती है. इसकी मदद से तीन मिनट के […]

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धनबाद : जब किसी व्यक्ति की धड़कन व सांस अचानक रुक जाये, किसी को दिल का दौरा पड़ जाये और उस वक्त चिकित्सीय उपचार चाह कर भी न मिल पाये तो ऐसे मौके पर बेसिक लाइफ सपोर्ट उस व्यक्ति की जान बचाने में काफी सहायक साबित हो सकती है.
इसकी मदद से तीन मिनट के अंदर मरीज की जान बचायी जा सकती है. अगर उसे ऑक्सीजन मिल जाये तो उसके बचने की संभावना होती है. तीन मिनट के बाद सेल्स डेड होने लगते हैं. इस समय का निर्धारण उसके शरीर व सांस रोकने की क्षमता पर निर्भर करती है. इसके लिए उसके चेस्ट को पंप करते रहना होगा. मुंह से सांस देनी होगी.
ये बातें बुधवार को पीएमसीएच के लेक्चर थियेटर टू में आयोजित कार्यशाला में बतायी गयी. वर्ल्ड एनेस्थेसिया डे के मौके पर आयोजित इस कार्यशाला में छात्रों को बीएलएस, ट्रामा एंड डिजास्टर मैनेजमेंट, एनेस्थेटिक वाइटल रूल, मैनेजिंग पेन, सीपीआर सहित अन्य विषयों पर प्रस्तुतिकरण किया गया. कार्यशाला में पीएमसीएच के एनेस्थेसिया के विभागध्यक्ष डॉ के विश्वास ने कहा कि एनेस्थेसिया के आठ चिकित्सक हैं. ऑपरेशन में एक सर्जन की जितनी भूमिका होती है उतनी ही एनेस्थेसिया चिकित्सक की भी होती है. उसकी हर गतिविधि पर एनेस्थेसिया चिकित्सक ही नजर रखते हैं.
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