देवघर : दो फीडरों का अंडरग्राउंड केबल कटा, 24 घंटे तक एक ही फीडर से हुई आपूर्ति

बिहार में बिजली रेट (सांकेतिक)
केबल विशेषज्ञों की मानें तो गैस पाइप डालने वाली एजेंसी के पास लाइन लोकेटर मशीन नहीं है और न ही उसने उक्त इलाके में अंडरग्राउंड काम करने को लेकर बिजली विभाग को सूचना ही दी.
देवघर : आइओसीएल की गैस पाइप लगाने वाली एजेंसी (संतोष इंजीनियर्स) द्वारा जसीडीह के इलाके में गैस पाइप डालने का काम एजेंसी के द्वारा तेजी से चल रहा है. इसी क्रम में रविवार को देवघर-जसीडीह मार्ग स्थित डढ़वा पुल के समीप गड्ढा खोदने के क्रम में एजेंसी की हैवी मशीन द्वारा दो फीडरों के चार सेट में लगभग 170 मीटर लंबा 11 केवीए का अंडरग्राउंड केबल पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया. इससे डाबरग्राम पावर सब स्टेशन से निकलने वाले दो फीडरों (सिटी टू व देवघर टू) से विद्युत आपूर्ति घंटों बाधित रही. शहरी क्षेत्र के राय कंपनी मोड़, बाजला चौक, बंपास टाउन, बस स्टैंड, कास्टर टाउन इलाके में शाम 4 बजे के बाद से रात के 10.30 बजे तक विद्युत आपूर्ति नहीं रहने से अंधेरा पसरा रहा और लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी. सूचना पर बिजली विभाग की टीम पहुंची और आनन-फानन में किसी तरह से केबुल की बाइंडिंग की. वैकल्पिक उपाय करते हुए सिटी-वन फीडर से लाइन जोड़कर शहर में बिजली आपूर्ति शुरू की गयी.
विभागीय जानकारी के अनुसार डाबरग्राम पीएसएस से निकलने वाले सिटी-टू तथा देवघर-टू फीडर की लाइन बंद हो जाने व शहरवासियों की समस्या को देखते हुए सिटी-वन फीडर से आपूर्ति बहाल तो कर दी गयी. मगर एक ही फीडर पर दो अतिरिक्त फीडरों को भी आपूर्ति शुरू हो जाने से सिटी-वन फीडर पर अत्यधिक लोड बढ़ गया है. यदि किसी तरह के फॉल्ट होने या लाइन डिस्टर्ब होने की स्थिति में उसकी मरम्मत करने के लिए शहरी क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति पूरी तरह से बंद करने की नौबत आन पड़ेगी. इससे शहरी क्षेत्र खासकर मुख्य बाजार, प्रतिष्ठान, होटल व क्लिनिक सहित आम लोगों के घरों में अंधेरा छा जायेगा. समस्या से निजात दिलाने के लिए बिजली विभाग के पदाधिकारी व एजेंसी की टीम सोमवार को भी सुबह से लेकर रात 8.40 बजे तक नया केबल डालकर लाइन चालू किया गया.
एजेंसी के पास नहीं है लाइन लोकेटर मशीन
केबल विशेषज्ञों की मानें तो गैस पाइप डालने वाली एजेंसी के पास लाइन लोकेटर मशीन नहीं है और न ही उसने उक्त इलाके में अंडरग्राउंड काम करने को लेकर बिजली विभाग को सूचना ही दी. यदि लाइन लोकेटर मशीन होती तो उसे अंडरग्राउंड केबल की दूरी व लंबाई की सही-सही जानकारी मिल पाती और शायद यह समस्या पैदा ही नहीं होती. शहरवासियों को अंधेरे से जूझना नहीं पड़ता. इसके लिए जिम्मेवार एजेंसी व साइट इंचार्ज पर कार्रवाई क्यों नहीं हो.
आपूर्ति बाधित होने की समस्या की गंभीरता को देखते हुए आइओसीएल के अधिकारियों के समक्ष नाराजगी जतायी गयी. इसके बाद आइओसीएल के असिस्टेंट मैनेजर किसलय कुमार व पाइप डालने वाली एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनजर तथा बिजली विभाग के पदाधिकारियों के साथ सोमवार की शाम लंबी बैठक हुई. कार्यपालक अभियंता नीरज आनंद ने बताया कि आगे से बिजली विभाग के सुपरविजन में पाइप डालने का काम करना होगा. इसके लिए एक संयुक्त व्हाटसएप ग्रुप बना कर प्रत्येक दिन की सूचना से अवगत कराने की बात कही गयी. तत्काल डैमेज केबल को आइओसीएल की ओर से मरम्मत कराने की बात कही गयी. आगे से डैमेज करने पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई की बातें कही गयी.
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