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Deoghar News : ईश्वर तर्क का नहीं, प्रत्यक्ष दर्शन का विषय है : साध्वी अमृता

Updated at : 13 Dec 2025 8:54 PM (IST)
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Deoghar News : ईश्वर तर्क का नहीं, प्रत्यक्ष दर्शन का विषय है : साध्वी अमृता

बीएड कॉलेज परिसर में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से आयोजित श्रीरामचरितमानस व गीता ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे. दूसरे दिन गुरुदेव आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी अमृता भारती ने गूढ़ आध्यात्मिक प्रसंगों के माध्यम से ईश्वर तत्व को सरल शब्दों में समझाया.

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संवाददाता, देवघर : बीएड कॉलेज परिसर में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से आयोजित श्रीरामचरितमानस व गीता ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे. दूसरे दिन गुरुदेव आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी अमृता भारती ने गूढ़ आध्यात्मिक प्रसंगों के माध्यम से ईश्वर तत्व को सरल शब्दों में समझाया. उन्होंने कहा कि भगवान शिव की अर्धांगिनी मां सती अगस्त मुनि के आश्रम में कथा श्रवण करने जाती थीं, लेकिन जब तर्क-बुद्धि से प्रेरित होकर उन्होंने प्रभु श्रीराम को साधारण नर लीला करते देखा तो उनके मन में संशय उत्पन्न हो गया. उन्हें यह समझ नहीं आया कि जो ईश्वर सर्वव्यापक, सर्व अंतर्यामी, माया रहित और इच्छा रहित है वह शरीर कैसे धारण कर सकता है. यहां तक की उन्हें यह भी संदेह हुआ कि यदि श्रीराम ईश्वर हैं तो क्या उन्हें यह भी ज्ञात नहीं कि उनकी अर्धांगिनी कहां हैं. भगवान शिव के कहने पर जब मां सती प्रभु श्रीराम की परीक्षा लेने गईं, तो वे उसमें असफल रहीं. साध्वी ने कहा कि स्वयं भगवान शिव यह बताते हैं कि ईश्वर तर्क, मन, वाणी और बुद्धि से अति परे है. तर्क बुद्धि का विषय है और जिसकी बुद्धि जितनी तीव्र होती है, उसका तर्क उतना ही प्रखर होता है. रावण वेदों का ज्ञाता था, उसने भी बुद्धि से प्रभु राम को समझने का प्रयास किया, लेकिन वह असफल रहा. ईश्वर तर्क का नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष दर्शन का विषय है. समय के पूर्ण सद्गुरु द्वारा दिव्य दृष्टि के उद्घाटन के बाद ही ईश्वर का साक्षात्कार संभव है, इसलिए तत्ववेत्ता सद्गुरु से ब्रह्मज्ञान प्राप्त करना आवश्यक है. जो कल्याण चाहता है वह मृत्यु और भगवान को नहीं भूले : स्वामी धनंजयानंद वहीं स्वामी धनंजयानंद ने कहा कि जिस प्रकार भोजन की चर्चा से भूख नहीं मिटती, उसी प्रकार केवल भगवान की कथाएं सुनने मात्र से कल्याण नहीं होता. उन्होंने महापुरुषों के वचन दोहराते हुए कहा कि जो कल्याण चाहता है, वह मृत्यु और भगवान- इन दोनों को कभी न भूले. मौके पर सुनील बरनवाल, आरती सिंह, गौतम सिंह, सचिन सुलतानिया, एचडी मिश्रा, राजकुमार ड्रोलिया समेत अन्य थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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