महिला कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य समेत 3 पर एससी-एसटी का केस दर्ज

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कैप्शन- महिला महाविद्यालय मधुपुर | Prabhat Khabar Network

महिला महाविद्यालय मधुपुर | Prabhat Khabar Network

मधुपुर महिला कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ भरत प्रसाद समेत तीन लोगों पर एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है.

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मधुपुर (देवघर): प्रखंड के राजाभिटा स्थित महिला महाविद्यालय में शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक कर्मियों के बीच चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. लगातार बढ़ते विवाद का असर कॉलेज के शैक्षणिक माहौल पर भी पड़ रहा है. इसी क्रम में कॉलेज की गैर शैक्षणिक कर्मी शीला देवी ने प्रभारी प्राचार्य डॉ. भरत प्रसाद समेत तीन लोगों के खिलाफ मधुपुर थाना में एससी-एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई है.

दर्ज प्राथमिकी में प्रभारी प्राचार्य डॉ. भरत प्रसाद के अलावा शैक्षणिक कर्मी देवाशीष कुमार और विकास चंद्र झा को नामजद किया गया है. शीला देवी ने आरोप लगाया है कि वह रीना देवी, सुशीला देवी, रेणु मरांडी समेत अन्य गैर शैक्षणिक कर्मियों के साथ कॉलेज में कार्यरत हैं. उनके अनुसार प्रभारी प्राचार्य अक्सर उनके साथ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज करते हैं. आरोप है कि इसमें देवाशीष कुमार और विकास चंद्र झा भी शामिल रहते हैं.

दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि 14 जुलाई को प्रभारी प्राचार्य दोनों कर्मियों के साथ कार्यालय में मौजूद थे. आरोप है कि गैर शैक्षणिक कर्मियों को कार्यालय में बुलाकर हंगामा किया गया, मोबाइल फोन छीन लिया गया और दुर्व्यवहार किया गया. साथ ही सादे कागज पर हस्ताक्षर कर माफीनामा देने का दबाव बनाया गया और ऐसा नहीं करने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी गई. शीला देवी ने आरोप लगाया कि भय के कारण कर्मियों ने सादे कागज पर हस्ताक्षर कर दिया. इस मामले में मधुपुर थाना कांड संख्या 159/26 दर्ज किया गया है.

बताया गया कि एक सप्ताह पूर्व भी कॉलेज की शैक्षणिक कर्मी रजनी मुर्मू ने विकास चंद्र झा के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था. वहीं रजनी मुर्मू ने अपने सहयोगियों के साथ प्रभारी प्राचार्य पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कॉलेज में तालाबंदी भी की थी. पूरे विवाद की जांच के लिए दुमका विश्वविद्यालय की तीन सदस्यीय टीम कॉलेज पहुंचकर जांच कर चुकी है.

प्रभारी प्राचार्य ने आरोपों को बताया निराधार

प्रभारी प्राचार्य डॉ. भरत प्रसाद ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि दुर्भावना से प्रेरित होकर मनमाने कार्य कराने के लिए दबाव बनाना कुछ कर्मियों की फितरत है. उन्होंने कहा कि गलत आरोप लगाकर अपनी गलतियों को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है. पूरे मामले की जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को दे दी गयी है. जांच कमेटी भी कॉलेज आकर जांच कर चुकी है.


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