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सुविधा व संसाधनयुक्त बदलाव से अब दुनिया के नक्शे पर संताल परगना

Updated at : 03 Aug 2023 12:29 PM (IST)
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सुविधा व संसाधनयुक्त बदलाव से अब दुनिया के नक्शे पर संताल परगना

जब मैं पहली बार टिकट लेकर नामांकन करने हंसडीहा से गोड्डा की ओर जा रहा था, तो मुझे खराब सड़कों की वजह से हंसडीहा से गोड्डा की दूरी तय करने में ढाई घंटे लग गये.

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डॉ निशिकांत दुबे,

सांसद, गोड्डा

कभी पिछड़े जिलों में शामिल देवघर, गोड्डा व दुमका का जरमुंडी में पिछले 10 साल में अतुलनीय विकास के काम हुए. इन इलाकों के विकास को लेकर 10 वर्ष पहले खीची गयी लकीर और तैयार नक्शे कदम पर देवघर, गोड्डा और जरमुंडी का इलाका उतरने लगा है. यहां तेजी से बदलाव हुए.

जब मैं पहली बार टिकट लेकर नामांकन करने हंसडीहा से गोड्डा की ओर जा रहा था, तो मुझे खराब सड़कों की वजह से हंसडीहा से गोड्डा की दूरी तय करने में ढाई घंटे लग गये. आज देवघर से गोड्डा की दूरी तय करने में एक से डेढ़ घंटे लगते हैं. वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद मेरे सारे प्रोजेक्ट पर तेजी से काम हुए. आज कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जो समय से पहले पूरे हो चुके हैं. इन सालों में विकास के मामले में गोड्डा संसदीय क्षेत्र पूरे देश में अव्वल है. यहां इन 10 वर्षों में सवा लाख करोड़ के प्रोजेक्ट चल रहे हैं.

रेल, सड़क व हवाई मार्ग से बढ़ी कनेक्टिविटी

देवघर और गोड्डा कनेक्टिविटी के मामले में काफी आगे निकल चुका है. रेल, सड़क व हवाई मार्ग से कनेक्टिविटी में देवघर और गोड्डा पर अब पूरे देश की नजर में है. हवाई मार्ग से जुड़ने के बाद विदेशी श्रद्धालु व पर्यटक सीधे देवघर पहुंच रहे हैं. अगर हम रेल कनेक्टिविटी की बात करें तो देवघर से दुमका रेल परियोजना का शुभारंभ से लेकर इस लाइन पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने और इलेक्ट्रिफिकेशन के काम के साथ-साथ कई नये हॉल्ट की स्थापना हुई.

गोड्डा में रेल सेवा जो पहले 70 सालों से राजनीतिक मुद्दा हुआ करता था, कई लोग चुनाव में गोड्डा से रेल सेवा शुरू करने की एजेंडा को लेकर उतरते थे. कई आंदोलन हुए. महज तीन साल में ही गोड्डा में रेल सेवा के लिए काम शुरू हुए और अब तक एक दर्जन ट्रेनों का परिचालन भी शुरू हो चुका है. गोड्डा जैसी जगह से दिल्ली, पटना, रांची जमशेदपुर और कोलकाता के लिए ट्रेनें चल रही हैं. लंबी दूरी की ट्रेनों में देवघर, जसीडीह और मधुपुर भी शामिल हो चुका है.

जसीडीह से पहले कभी भी लंबी दूरी की ट्रेनें नहीं थी. पिछले चार सालों में जसीडीह से चेन्नई, वास्कोडिगामा, दिल्ली और मुंबई तथा देवघर से अगरतला व मधुपुर से पहली बार दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन खुली. रेल कनेक्टिविटी बढ़ने से इस इलाके से पढ़ाई, रोजगार और व्यापार के सिलसिले में दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई मुंबई आने -जाने वाले लोगों को सहूलियत हुई. देवघर आने वाले श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों को सुविधा हो गयी.

मेडिकल, नर्सिंग, एग्रीकल्चर की पढ़ाई शुरू हुई

शिक्षा के क्षेत्र में अगर आकलन करेंगे तो देवघर और गोड्डा ने कई ऊंचाइयों को छुआ है. देवघर में पहली बार राष्ट्रीयस्तर की मेडिकल और नर्सिंग की पढ़ाई एम्स के जरिए शुरू हुई. देवघर और गोड्डा में एग्रीकल्चर कॉलेज, देवघर में बीआइटी मेसरा, देवघर और गोड्डा के कॉलेजों में बीबीए की पढ़ाई के साथ-साथ देवघर कॉलेज में कानून की पढ़ाई की शुरुआत की गयी.

इन दोनों जिलों के अलग-अलग क्षेत्रों में 15 आईटीआई कॉलेज व मधुपुर में पॉलिटेक्निक कॉलेज खुले. टूरिस्ट सेक्टर में रोजगार के लिए फूड क्राफ्ट इंस्टीट्यूट बनकर तैयार है. बिजली के मामले में भी देवघर और गोड्डा में शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में एक्शन प्लान के तहत काम किया गया. एक भी गांव व टोलों को बिजली कनेक्शन से वंचित नहीं रखा गया है.

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