Deoghar News : त्याग, दान और पुण्य करने से ही आत्मकल्याण संभव : पं ज्ञानचंद्र

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दशलक्षण महापर्व के नौवें दिन शुक्रवार को उत्तम आकिंचन धर्म के रूप में मनाया गया. सुबह प्रथम अभिषेक ज्ञानचंद्र जैन व नमन जैन ने किया.

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संवाददाता, देवघर : दशलक्षण महापर्व के नौवें दिन शुक्रवार को उत्तम आकिंचन धर्म के रूप में मनाया गया. सुबह प्रथम अभिषेक ज्ञानचंद्र जैन व नमन जैन ने किया. शांतिधारा सुरेश पाटनी व निखिल जैन पाटनी द्वारा किया गया. इसके बाद आरती, सामूहिक पूजन, दशलक्षण धर्म पूजन, उत्तम आकिंचन धर्म पूजन, कर्मदहन पूजन, नेमिनाथ पूजन व भगवान पार्श्वनाथ पूजन संपन्न हुए. शाम में आरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम व शास्त्र वाचन का आयोजन किया गया. पं ज्ञानचंद्र जैन ने कहा कि परिग्रह का पूर्ण त्याग होने पर ही उत्तम आकिंचन धर्म प्रकट होता है. जन्म से लेकर मृत्यु तक सब कुछ परिग्रह है, यहां तक की तन भी अपना नहीं है. उन्होंने कहा कि आप अकेला अवतरे, मरे अकेला होय, यूं कबहूं ना इस जीव को, साथी सगा ना कोय. उन्होंने बताया कि जितना परिग्रह बढ़ेगा उतना दु:ख मिलेगा और जितना त्याग होगा उतना सुख प्राप्त होगा. आकांक्षाओं को सीमित कर त्याग, दान और पुण्य करने से ही आत्मकल्याण संभव है. यही उत्तम आकिंचन धर्म का सार है. मौके पर जैन मंदिर के अध्यक्ष राजेश जैन, मंत्री सुरेश जैन पाटनी, कोषाध्यक्ष जुगल किशोर पाटनी समेत विनोद सेठी, शीतल सेठी, वसंत जैन, राजा, अभिनव, अंशु, जौली, राहुल छाबड़ा, प्रमोद जैन, धैर्य जैन, पवन जैन काला, अशोक जैन, डॉ. आनंद जैन, अजीत जैन, प्रेमचंद जैन, प्रीतम जैन, नरेंद्र जैन, सन्नी जैन, पवन जैन आदि थे.

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