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Deoghar news : एसआईआर की कानूनी और सामाजिक महत्ता बतायी, इसके प्रभाव और जनसहभागिता पर मुस्लिम स्कॉलर और धर्मगुरुओं ने की मंत्रणा

मधुपुर के खलासी मोहल्ला के दारुल-कजा में गुरुवार को प्रायोगिक सह प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया. स्कॉलर ने कहा कि यह एक नियमित प्रक्रिया है, जिसमें सहयोग करें.

मधुपुर . शहर के खलासी मोहल्ला के दारुल-क़ज़ा में गुरुवार को व्यावहारिक सह प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित किया गया. कार्यशाला की अध्यक्षता इमारत-ए-शरिया के सहायक नाज़िम मौलाना अहमद हुसैन क़ासमी ने की. मौके पर उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से सभी राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी की जानी है. इसके तहत बिहार, बंगाल व झारखंड में बीएलओ के माध्यम से पैरेंटल मैपिंग कराया जा रहा है. इसी क्रम में इमारत-ए-शरिया बिहार, ओडिशा व झारखंड से आये उलेमाओ ने एसआइआर व पैरेंटल मैपिंग से संबंधित जारी प्रशिक्षण अभियान में जिले के सिलगड़िया व मधुपुर शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को कई जानकारी दी. कहा कि एसआइआर सामान्यतः कुछ वर्षों के अंतराल पर होने वाली एक नियमित प्रक्रिया है. लेकिन इस बार सरकार की नीयत और नीति में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है. उन्होंने असम का उदाहरण देते हुए आशंका को व्यक्त किया कि कहीं वर्तमान एसआईआर की आड़ में एनआरसी की भूमिका न बना दी जाये. इसलिए उन्होंने सभी से अपील की कि वे सतर्क रहें और बिना किसी धार्मिक भेदभाव के हिंदू, मुस्लिम, आदिवासी सभी को जागरूक करें और दस्तावेज़ों और प्रक्रियाओं में उनका सहयोग करें. उन्होंने इसे नैतिक दायित्व बताया. इमारत-ए-शरिया की रिसर्च टीम के सदस्य मुफ़्ती इकरामुद्दीन क़ासमी ने सामूहिक जीवन को संगठित व अनुशासित रखने के लाभों को विस्तार से बताया. वहीं इमारत-ए-शरिया बिहार, ओडिशा व झारखंड की रिसर्च टीम के सदस्य मौलाना डॉ. हिफ़्ज़ुर्रहमान हफ़ीज़ ने वक़्फ़ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारी धार्मिक और मिल्ली संपत्तियों के लिए वास्तविक खतरा बाहरी नहीं, बल्कि हमारी अपनी लापरवाही और असावधानी है. क़ाज़ी-ए-शरिया मधुपुर के मौलाना इमरान क़ासमी ने एसआईआर की क़ानूनी और सामाजिक महत्ता, इसके प्रभाव, जन-सहभागिता की आवश्यकता पर तार्किक और प्रभावी चर्चा की. रिसर्च टीम के सदस्य मुफ़्ती क़यामुद्दीन क़ासमी ने प्रोजेक्टर व प्रेज़ेंटेशन के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया. इस सत्र की विशेषता यह रही कि प्रतिभागियों ने मौके पर ही इन विषयों का प्रायोगिक अभ्यास भी किया. मुफ़्ती क़यामुद्दीन क़ासमी ने प्रतिभागियों के प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर दिये और ज़मीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं के समाधान भी प्रस्तुत किये, साथ ही एसआइआर की प्रक्रिया उनके क्षेत्र में होगी, तो वे घर-घर जाकर पूरी निष्ठा के साथ इस ज़िम्मेदारी को निभायेंगे. बताया कि झारखंड में चल रहे एसआइआर प्रशिक्षण अभियान का वफ़्द हज़रत अमीर-ए-शरिया मौलाना सैयद अहमद वली फ़ैसल रहमानी के सतत संपर्क और निगरानी में कार्य कर रहा है. जबकि नाज़िम इमारत-ए-शरिया हज़रत मुफ़्ती मुहम्मद सईदुर्रहमान क़ासमी भी निरंतर इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कहीं ग़रीब और बेसहारा लोग अज्ञानवश किसी नुकसान का शिकार न हो जाये. वहीं मुफ़्ती मुहम्मद अंजार आलम क़ासमी भी क़ाज़ियों को आवश्यक निर्देश दे रहे हैं और वफ़्द के संपर्क में है. कार्यक्रम में अल्ताफ़ हुसैन, राशिद ख़ान, खुर्शीद, क़ारी इमरान, मो. अमन, ताहिर अहमद, रूक़ी समेत शहर के गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी व सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया. ॰दारुल-क़ज़ा में व्यावहारिक सह प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

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