Deoghar News : सौर ऊर्जा से जगमग होंगे जिले के दो हजार से अधिक सरकारी स्कूल

Published by : AMRENDRA KUMAR Updated At : 21 Jun 2025 2:23 AM

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देवघर जिले के सरकारी स्कूलों को अब निर्बाध बिजली आपूर्ति और बेहतर बुनियादी सुविधाओं से लैस किया जा रहा है. ‘‘जगमग पाठशाला’’ परियोजना के तहत जिले के स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से सोलर पैनल लगाये जा रहे हैं.

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विजय कुमार, देवघरदेवघर जिले के सरकारी स्कूलों को अब निर्बाध बिजली आपूर्ति और बेहतर बुनियादी सुविधाओं से लैस किया जा रहा है. ‘‘जगमग पाठशाला’’ परियोजना के तहत जिले के स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से सोलर पैनल लगाये जा रहे हैं. पहले चरण में आर मित्रा प्लस टू स्कूल, मातृ मंदिर गर्ल्स स्कूल, आरएल सर्राफ हाइस्कूल सहित आधा दर्जन स्कूलों में सौर ऊर्जा से रोशन होने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इस पहल से जहां विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण मिलेगा, वहीं स्कूलों को हर महीने के भारी-भरकम बिजली बिल से भी राहत मिलेगी. देवघर के करीब आधा दर्जन स्कूलों में सोलर पैनल लगाने का काम भी शुरू हो गया है. प्रथम चरण में सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस आर मित्रा प्लस टू स्कूल, मातृ मंदिर गर्ल्स प्लस टू स्कूल के साथ आरएल सर्राफ हाइस्कूल में सोलर पैनल लगाने का काम शुरू कर दिया गया है. सोनारायठाढ़ी स्थित प्लस टू स्कूल, तिलकपुर में करीब दो माह पहले 50 केवी का सोलर पैनल इंस्टॉल कर उसे चालू कर दिया गया है. आर मित्रा प्लस टू स्कूल, देवघर में जेरेडा (झारखंड अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी) के द्वारा 50 केवी का सोलर पैनल लगाया गया है. जून के अंत तक यह चालू हो जायेगा. सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो जिले के सभी कोटि के दो हजार से ज्यादा स्कूलों में अगले कई चरणों में सोलर पैनल लगाने की योजना है. विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरकार की यह पहल शिक्षा एवं पर्यावरण के दृष्टिकोण से काफी फायदेमंद होगा. इधर, झारखंड सरकार भी अलग अलग जिलों में ””””जगमग पाठशाला”””” परियोजना के तहत सरकारी स्कूलों में सोलर पैनल लगाने का काम कर रही है, ताकि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ साथ निर्बाध बिजली सौर ऊर्जा के माध्यम से मिल सके. बिजली बिल से मुक्ति मिलेगी जिले के सरकारी स्कूलों में जहां-जहां बिजली का कनेक्शन है. वहां-वहां हजारों रुपये का बिजली बिल हर माह आता है. कुछ स्कूल प्रशासन नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान कर देते हैं. वहीं अधिकांश स्कूलों में फंड नहीं होने के कारण नियमित रूप से बिजली बिल का भुगतान नहीं होता है. नतीजा कहीं-कहीं हजारों तो कहीं-कहीं लाखों में बिजली बिल का बकाया हो जाता है. सोलर पैनल लग जाने एवं सौर ऊर्जा चालू होने के बाद स्कूलों को बिजली बिल से मुक्ति मिल जायेगी. यह ना सिर्फ स्कूलों के विकास के दृष्टिकोण से लाभकारी होगा, बल्कि स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के अलावा शिक्षकों एवं कर्मचारियों को मौसम की मार से काफी राहत महसूस होगी.

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