स्नातकोत्तर में बांग्ला विषय की पढ़ाई पुनः प्रारंभ किये जाने की मांग

Author Balram
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स्नातकोत्तर में बांग्ला विषय की पढ़ाई पुनः प्रारंभ किये जाने की मांग

मधुपुर: एसकेएमयू से बंगला भाषा हटाये जाने पर विवाद

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मधुपुर. झारखंड बंगाली समिति के प्रदेश सचिव विद्रोह मित्रा ने आरोप लगाया है कि सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका के स्नातकोत्तर विभाग से मातृभाषा बंगला को हटा दिया गया है. उन्होंने कहा कि संथाल परगना प्रमंडल में बंगला भाषा को प्रथम भाषा के रूप में स्वीकृति प्राप्त है, इसके बावजूद विश्वविद्यालय स्तर पर इसका अध्ययन प्रभावित होना चिंताजनक है. विद्रोह मित्रा ने कहा कि 1932 के अंतिम सर्वे रिकॉर्ड मुख्य रूप से बांग्ला भाषा में दर्ज हैं और इस क्षेत्र में सदियों से सामाजिक, आर्थिक तथा वैवाहिक संबंध गहरे रहे हैं. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि रवींद्रनाथ टैगोर समेत कई साहित्यकारों का इस क्षेत्र से गहरा जुड़ाव रहा है. उन्होंने आगे कहा कि संथाल विद्रोह जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों ने बांग्ला साहित्य को भी गहराई से प्रभावित किया है. संथाल परगना की भौगोलिक स्थिति, जो बंगाल से सटी हुई है, इस क्षेत्र को सदियों से बंगला भाषा और साहित्य के एक महत्वपूर्ण विस्तार केंद्र के रूप में स्थापित करती है. ऐसी स्थिति में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में बंगला भाषा की पढ़ाई बंद होना या इसे पर्याप्त महत्व न दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है, ऐसा उन्होंने कहा. इस मुद्दे को लेकर बंगाली समुदाय के लोग राज्य के शिक्षा विभाग और राजभवन तक ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रहे हैं. विद्रोह मित्रा ने मांग की है कि अविलंब सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभाग में मातृभाषा बंगला विषय की पढ़ाई पुनः शुरू की जाये.

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