आस्था का केंद्र श्मशान रहा है विवादों में

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विडंबना श्मशान घाट के ट्रस्टियों की नहीं होती है बैठक देवघर : देवघर श्मशान घाट भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है. यहां के मुख्य दरवाजा पर मां काली की प्रतिमा है. यहां 24 घंटे अलख जलती रहती है. इसमें नाथ संप्रदाय के साधु-संत रहते हैं. मां काली व भैरव की पूजा-अर्चना करने महिला-पुरुष समान […]

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विडंबना श्मशान घाट के ट्रस्टियों की नहीं होती है बैठक

देवघर : देवघर श्मशान घाट भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है. यहां के मुख्य दरवाजा पर मां काली की प्रतिमा है. यहां 24 घंटे अलख जलती रहती है. इसमें नाथ संप्रदाय के साधु-संत रहते हैं. मां काली व भैरव की पूजा-अर्चना करने महिला-पुरुष समान रूप से दूर-दूर से आते हैं. वार्षिक पूजा में 10 हजार से अधिक कन्या-बटुक महाप्रसाद ग्रहण करने आता था.
इधर, कुछ सालों से श्मशान विवादों में रहा है. इसमें संचालक सह प्रधान पुजारी ध्रुवनाथ बाबा का नाम प्रमुखता से आ रहा है. इससे लोगों की आस्था पर चोट पहुंच रही है. कुछ वर्ष पूर्व श्मशान में परिसर में पूर्व वार्ड कमिश्नर बबलू राउत उर्फ जग्गा व तीर्थपुरोहित समाज के युवा समाजसेवी राजेश मिश्रा का मर्डर हो गया है. इसमें भी बाबा ध्रुवनाथ का नाम भी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से लोगों के बीच जुड़ने की बात कही जा रही थी.
अलग बात है कि कोर्ट ने बात को नकार दिया. एक बार फिर बाबा ध्रुव नाथ का नाम तीर्थपुरोहित समाज के एक तांत्रिक ऋषभ कुमार सरेवार के मर्डर में आ रहा है. परिवार के लोगों ने ध्रुवनाथ पर ऋषभ को जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है. इस पर पुलिस अनुसंधान के बाद ही मामला साफ हो पायेगा. बावजूद लोगों में श्मशान के प्रति आस्था पर चोट पहुंच रही है.
लगातार घट रही भक्तों की संख्या
श्मशान में भैरव चतुर्दशी पर महाकाल की भव्य वार्षिक पूजा होती है. इसमें 10 हजार तक कन्या-बटूक भोजन करता था. बाबा के चर्चा में आते ही कुछ वर्षों से कन्या-बटुक भंडारा में गिनती के भक्त पहुंच रहे हैं.
शाम होते बंद हो जाता है मेन गेट
श्मशान काली मंदिर का मुख्य दरवाजा कहने को शाम में आरती के बाद बंद हो जाता है. बावजूद पिछले गेट से लोगों का अाना-जाना होता है. इसमें एक गेट श्मशान लकड़ी गोला के बगल से है. जबकि दूसरा गेट श्मशान परिसर के पीछे से है.
श्मशान की बनी है कमेटी
श्मशान के सुचारु रूप से संचालन के लिए एक कमेटी भी बनी है. इसमें देश के कई प्रांतों के लोग सदस्य हैं. सभी लोग श्मशान की भलाई के लिए संकल्पित हैं. लेकिन बाबा ध्रुवनाथ अपनी मनमर्जी चलाने के लिए केवल महाकाल भैरव की वार्षिक पूजा को छोड़ कर शायद ही कभी संचालन कमेटी की बैठक बुलाते हैं. इससे कोई सदस्य अपनी राय नहीं दे पाते हैं.
मंदिर थाना पुलिस भी सतर्क नहीं
घटना स्थल मंदिर थाना से बगल में है. सड़क पार करते ही घटना स्थल शुरू हो जाती है. बावजूद पुलिस श्मशान में देर रात्रि तक अाने-जानेवालों से कभी पूछताछ नहीं की.
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