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श्रावणी मेला : 40 हजार कांवरियों ने किया जलार्पण

Updated at : 21 Jul 2016 8:23 AM (IST)
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श्रावणी मेला : 40 हजार कांवरियों ने किया जलार्पण

देवघर : विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला प्रारंभ होते ही पूरा देव नगरी गेरुआ वस्त्रधारियों से पटने लगा है. मेले के पहले दिन तकरीबन 40 हजार कांवरियों ने जलार्पण किया. इससे पूर्व श्रावणी मेले के पहले दिन बुधवार अल सुबह बाबा का पट खुलते ही परंपरागत तरीके से कांचा जल पूजा प्रारंभ हुई. कांचा जल पूजा […]

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देवघर : विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला प्रारंभ होते ही पूरा देव नगरी गेरुआ वस्त्रधारियों से पटने लगा है. मेले के पहले दिन तकरीबन 40 हजार कांवरियों ने जलार्पण किया. इससे पूर्व श्रावणी मेले के पहले दिन बुधवार अल सुबह बाबा का पट खुलते ही परंपरागत तरीके से कांचा जल पूजा प्रारंभ हुई. कांचा जल पूजा करीब बीस मिनट तक चली. उसके तुरंत बाद पुजारी विद्यानंद झा ने मंदिर इस्टेट की ओर से बाबा बैद्यनाथ की सरकारी पूजा की. सरकारी पूजा करीब चालीस मिनट तक चलने के बाद आम भक्तों के लिये बाबा का पट खोल दिया गया. सुबह भक्तों की कतार बरमसिया चौक के पार नंदन पहाड़ के पास तक पहुंच गयी थी. वहीं वीआइपी पूजा बंद होने के बावजूद वीआपी का आना कम नहीं हुआ. पहले दिन बिहार के भू राजस्व मंत्री मदन मोहन प्रसाद बाबा मंदिर पहुंचे. उन्होंने करीब दस बजे शीघ्र दर्शनम पास के माध्यम से जलार्पण किया.

सुलभ जलार्पण से गदगद दिखे कांवरिये

पहले दिन जितने भी कांवरियों ने नयी व्यवस्था के तहत जलार्पण किया. सभी सुलभ जलार्पण व्यवस्था से जल चढ़ाकर गदगद दिख रहे थे. जलार्पण के बाद बाहर निकलते ही जय बाबा बैद्यनाथ और बोल बम के नारे लगा रहे थे. सबों ने इस बार की व्यवस्था की प्रशंसा की.

सीसीटीवी से अधिकारी रख रहे पैनी नजर

मेला शुरू होते ही जिला व पुलिस प्रशासन के आलाधिकारी भी सुबह से ही मंदिर पहुंचे. सबसे पहले एसपी ए विजयालक्ष्मी ने मंदिर परिसर के चारों ओर व्यवस्था का मुआयना किया. इसके बाद सीसीटीवी कंट्रोल रूम पहुंच कर हर तरह की जानकारी ली. वहीं डीसी अरवा राजकमल भी कंट्रोल रुम में रहे और विभिन्न कैमरों के जरिए टीवी पर लाइव व्यवस्था देख कर सुधार का निर्देश देते रहे.

रूट लाइनिंग में मुस्तैद रहे सीआरपीएफ व रैफ के जवान

पहले दिन हालांकि अपेक्षाकृत भीड़ कम थी. लेकिन अल सुबह से दिनभर कतार व्यवस्थित ढ़ंग से चलती रही. रूट लाइनिंग व्यवस्था की कमान सीआरपीएफ व रैफ के जवान संभाल रहे थे. वहीं मेला क्षेत्र में जैप, आइआरबी, एनडीआरएफ, बम निरोधी दस्ता, स्वान दस्ता, एटीएस व जिला बल की पुलिस टीम के अलावा सभी प्रमुख क्षेत्र में दंडाधिकारी मुस्तैद दिखे.

मेला में प्रति कांवरिया एक लीटर मिलेगा केरोसिन

श्रावणी मेला- 2016 को सफल बनाने के लिए झारखंड सरकार हर संभव प्रयास कर रही है. खाद्य आपूर्ति विभाग भी कांवरियों की सेवा में केरोसिन तेल का वितरण करेगी. कांवरियों को जिले के विभिन्न स्थानों पर प्रति कांवरिया एक लीटर केरोसिन का वितरण उचित मूल्य पर किया जायेगा. यह वितरण 22 जुलाई से 17 अगस्त तक होगा. इसके तहत जिला प्रशासन ने सभी पीडीएस दुकानदारों को चिह्नित कर प्रति दुकानदार 125 लीटर किरासन तेल आवंटित कर रही है. तथा वितरण के संपूर्ण पर्यवेक्षण की जवाबदेही संबंधित प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों को सौंपा है. वितरण के लिए प्रशासन ने 34 केंद्र बनाये हैं. इन्हीं केंद्रों के माध्यम से कुल 4250 लीटर किरासन तेल का वितरण किया जायेगा.

इन बिक्री केन्द्रों के खुलने का समय सुबह 8 बजे से दोपहर 12 तक तथा दोपहर बाद 3 से रात्रि 8 बजे तक होगा. इस संबंध में डीलरों को निर्देश दिया गया है कि सभी बिक्री केन्द्रों पर एक बैनर लगाये जाये, जिसमें श्रावणी मेला, 2016, किरासन तेल वितरण शिविर, जिला प्रशासन, देवघर, दुकानदार का नाम, अनुज्ञप्ति संख्या, किरासन तेल की मात्र एवं दर इत्यादि अंकित हो.वितरण विवरणी प्रत्येक दूसरे दिन पीडीएस डीलर देंगे, जिसका सत्यापन प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी करेंगे. जो भी डीलर इसका अनुपालन नहीं करेंगे व संबंधित प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी को वितरण की सूची नहीं देंगे, अगले दिन उस डीलर को केरोसिन तेल नहीं मिलेगा. किसी भी डीलर को तीन दिन से अधिक का तेल आवंटन नहीं किया जायेगा और इसकी सारी जवाबदेही संबंधित प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी की होगी.

100 किलो का कांवर लेकर पहुंचे बाबा दरबार

कोलकाता काशीपुर स्थित रामलीला बगान के डैडी कांवर संघ के सदस्य 100 किलो का आकर्षक कांवर लेकर बाबाधाम पहुंचे. इस ग्रुप में 18 युवकों का जत्था शामिल था. इससे पूर्व संघ में शामिल युवक तारकेश्वर धाम जाया करते थे. पहली बार ये लोग कांवर लेकर बाबाधाम की यात्रा पर आये हैं. इन लोगों ने सुल्तानगंज से शनिवार शाम 5 बजे जल भरा और बुधवार की सुबह 100 किलो का कांवर लेकर ये सभी दुम्मा पहुंचे. इन लोगों का कांवर पीतल का बना था, जिसमें दो गदा, त्रिशूल, घुंघरू व कई देवी-देवताओं की पीतल मूर्तियां भी लगी थी. ये कांवरिये शिव आकार के बने पीतल के घड़े में गंगा जल भरकर ला रहे थे. कांवरियो के जत्थे में पिंटू, सूरज, सागर, सोमनाथ, छोटका, अबी, बाबू, लखी चंद, कालू, रोनी, भोदू, पापाय, राजा, रोहित, बुबुन, आकाश, रामू, भोले आदि शामिल थे.

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