पुरानी वायरलेस व्यवस्था पर झारखंड की पुलिस

देवघर: झारखंड अलग राज्य बने 13 साल बीत गये. पुलिस आधुनिकीकरण के नाम पर अब तक करोड़ों रुपये खर्च हो चुके. बावजूद इसके पुरानी वायरलेस व्यवस्था पर ही झारखंड पुलिस की संचार व्यवस्था टिकी है. सूत्रों के अनुसार झारखंड पुलिस का पूरा वायरलेस महकमा संसाधन की कमी से जूझ रहा है. संताल परगना के किसी […]
देवघर: झारखंड अलग राज्य बने 13 साल बीत गये. पुलिस आधुनिकीकरण के नाम पर अब तक करोड़ों रुपये खर्च हो चुके. बावजूद इसके पुरानी वायरलेस व्यवस्था पर ही झारखंड पुलिस की संचार व्यवस्था टिकी है.
सूत्रों के अनुसार झारखंड पुलिस का पूरा वायरलेस महकमा संसाधन की कमी से जूझ रहा है. संताल परगना के किसी जिले में पुलिस वायरलेस का अपना भवन नहीं है. वहीं कर्मियों की भी घोर कमी है. अधिकांश जगह कंट्रोल रूम से लेकर थानों तक ऑपरेटर नहीं है. मात्र एक-दो कर्मियों की पोस्टिंग है. वहीं सारी व्यवस्था गृहरक्षकों के सहयोग पर टिकी है.
हर जिले में पोल-नेट तो लगा किंतु रखरखाव के अभाव में अब वह भी मृतप्राय स्थिति में पहुंच गया है. वायरलेस का नया सेट नहीं है. वहीं बैट्री का भी घोर अभाव है. बात करते बीच में ही पुराना वायरलेस सेट हैंग कर जाता है व बैट्री का बैकअप नहीं मिलता है.
राजधानी में टेटरा का प्रयोग, उपराजधानी में नहीं
राज्य अलग होने के बाद वायरलेस में नयी टेक्नोलॉजी नहीं लाया गया. हर जिले में पोल-नेट लगा, जो रखरखाव के कारण मृतप्राय है. इसके बाद राजधानी रांची में टेटरा का नया प्रयोग हुआ, जो अच्छा काम कर रहा है. किंतु उपराजधानी व सांस्कृतिक राजधानी मानी जाने वाली देवघर इससे अछूता है.
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