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री-एडमिशन पर दुमका डीसी ने जारी किया नोटिस, लिये गये वार्षिक शुल्क का करें समायोजन

दुमका: डीसी राहुल कुमार सिन्हा और डीएसइ सह आरटीइ के नोडेल पदाधिकारी मसूदी टुडू ने संयुक्त आदेश जारी कर निजी स्कूलों में ट्यूशन-फी व एग्जामिनेशन-फी को छोड़ कर री-एडमिशन, डेवलपमेंट-फी, मिसलेनियस-फी व ऐसे अन्य फी लेने से मना किया है. डीसी ने निजी स्कूलों के संचालकों के साथ 17 मार्च व 9 अप्रैल को बैठक […]

दुमका: डीसी राहुल कुमार सिन्हा और डीएसइ सह आरटीइ के नोडेल पदाधिकारी मसूदी टुडू ने संयुक्त आदेश जारी कर निजी स्कूलों में ट्यूशन-फी व एग्जामिनेशन-फी को छोड़ कर री-एडमिशन, डेवलपमेंट-फी, मिसलेनियस-फी व ऐसे अन्य फी लेने से मना किया है.

डीसी ने निजी स्कूलों के संचालकों के साथ 17 मार्च व 9 अप्रैल को बैठक की थी. गुरुवार को फिर संयुक्त आदेश में निजी स्कूलों के संचालक, प्रबंधक व प्रधानाध्यापक को आरटीइ के धारा 13 एवं सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में री-एडमिशन शुल्क लेने से मना किया गया है.

आदेश में कहा गया है कि यदि पूर्व में शिक्षण शुल्क के अलावा कोई अन्य शुल्क जैसे- विकास शुल्क, री एडमिशन शुल्क एवं मिसलेनियस शुल्क के रूप में कोई राशि ली गयी है तो, उस राशि का समायोजन अगले माह में लगने वाले शिक्षण शुल्क से किया जायेगा. री-एडमिशन शुल्क देने के लिए अभिभावक की बाध्यता नहीं होगी.

..तो निजी स्कूल को बंद करने की होगी कार्रवाई
डीसी ने कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि आरटीइ के प्रावधानों का अनुपालन नहीं करने वाले विद्यालयों की शिकायत मिलने पर स्पष्टीकरण पूछा जायेगा. संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर तीन सदस्यीय पदाधिकारियों की जांच दल गठित कर विद्यालय का निरीक्षण कराया जायेगा. आरोप सत्य प्रमाणित हुए तो जुर्माना या नियमानुसार दंड लगाया जायेगा. निजी स्कूल को बंद करने तक की कार्रवाई की जायेगी.
री-एडमिशन शुल्क नहीं देने पर छात्रों का नाम नहीं कटना चाहिए
री एडमिशन शुल्क नहीं देने की स्थिति में किसी भी छात्र-छात्र का नाम विद्यालय से काटा नहीं जायेगा और न ही नामांकन को अस्वीकृत किया जायेगा. यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि विद्यालय प्रबंधन को यह महसूस होता है कि शिक्षण शुल्क (ट्यूशन फी) में बढ़ोतरी करना आवश्यक है, तो अभिभावकों के साथ बैठक करेंगे. आपसी सामंजस्य अथवा सहमति के आधार पर केवल शिक्षण शुल्क में अधिकतम 15 प्रतिशत तक ही वृद्घि कर सकेंगे. आदेश में बताया गया है कि आरटीइ के तहत सभी गैर मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय को बंद करने का प्रावधान है. गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को डीएसइ को आवेदन देने को कहा गया है. आरटीइ की धारा 13(1) एवं (2) उपधारा (ए) एवं (बी) के अनुसार किसी भी छात्र/छात्र के नामांकन हेतु किसी भी प्रकार का कैपिटेशन फी नहीं लिया जायेगा. अभिभावक का कोई स्क्रीनिंग टेस्ट भी नहीं लिया जायेगा. ऐसा करने पर कैपिटेशन फी का दस गुणा राशि बतौर जुर्माना अदा करना होगा एवं स्क्रीनिंग टेस्ट के लिए प्रथम बार 25 हजार एवं उसके बाद हर बार 50 हजार रुपये का जुर्माना देना होगा.
दुकानों से पुस्तक खरीदने के लिए स्वतंत्र
आदेश में कहा गया है कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा विभिन्न कक्षाओं में पढ़ाये जाने वाली पाठ्य-पुस्तकों की सूची संबंधित छात्र-छात्रा अथवा उनके अभिभावक को उपलब्ध करायी जायेगी. उपलब्ध करायी गयी सूची के अनुसार किसी भी विक्रेता अथवा दुकान से पुस्तक -पोशाक खरीदने के लिए छात्र-छात्राएं अथवा उनके अभिभावक स्वतंत्र होंगे.

Prabhat Khabar Digital Desk
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