जिउतिया व्रत: नहाय-खाय संपन्न, निर्जला व्रत आज
देवघर: पुत्र-पुत्रियों की बेहतरी-तरक्की के लिए किया जाना वाला दो दिवसीय जीवित पुत्रिका यानी जिउतिया व्रत मंगलवार से शुरू हो गया. नहाय-खाय के बाद बुधवार को संतान के दीर्घायु होने के लिए निर्जला उपवास तथा पूजा-अर्चना के साथ यह व्रत संपन्न होगा. महिलाएं बुधवार को निर्जला उपवास में रहेंगी. वहीं गुरुवार को पारण सुबह में […]
उसी दिन कुश से जीमूतवाहन की प्रतिमा बनाकर पूजा की जायेगी. ज्योतिषाचार्य श्री मिश्र ने आगे बताया कि ऐसी मान्यता है कि यह व्रत सौभाग्यवती स्त्रियों द्वारा अपनी संतान की आयु, आरोग्य तथा उनके कल्याण हेतु पूरे विधि-विधान से किया जाता है. यदि आप क्षेत्रीय संदर्भ से देखें तो इस व्रत के कई अन्य नाम आपको मिलेंगे, जैसे कि ‘जीतिया’ या ‘जीउतिया’ तथा ‘जिमूतवाहन व्रत’ आदि. इसके मूल में बच्चों की बेहतरी छुपी हुई है.
दरअसल पुत्र शब्द का प्रयोग संतान यानी पुत्र और पुत्री दोनों के लिए किया जाता है जैसे छात्र का प्रयोग हम छात्र और छात्राओं दोनों के लिए करते हैं. इस कारण कोई भ्रम नहीं रखना चाहिए. यह पर्व बेटा और बेटी दोनों के प्रति माता का समर्पण दर्शाता है. इस अवसर पर आज बाबा मंदिर में माताएं बड़ी संख्या में विधिवत पूजा पाठ के उपरांत जिवित पुत्रिका व्रत कथा का श्रवण करने पहुचेंगी.
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