अधर में त्रिकुट जलाशय व डीआरडीओ जलापूर्ति योजना

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देवघर : करीब चार करोड़ की स्वीकृत त्रिकुट जलाशय योजना व डीआरडीओ जलापूर्ति योजना वन विभाग के फोरेस्ट क्लियरेंस की पेच में फंस गया है. त्रिकुट पहाड़ के झरनों का पानी स्टोर कर सिंचाई के लिए त्रिकुट जलाशय योजना की रुपरेखा बनी थी. करीब चार करोड़ की लागत से 20 जनवरी 2012 को स्वीकृत त्रिकुट […]

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देवघर : करीब चार करोड़ की स्वीकृत त्रिकुट जलाशय योजना व डीआरडीओ जलापूर्ति योजना वन विभाग के फोरेस्ट क्लियरेंस की पेच में फंस गया है. त्रिकुट पहाड़ के झरनों का पानी स्टोर कर सिंचाई के लिए त्रिकुट जलाशय योजना की रुपरेखा बनी थी. करीब चार करोड़ की लागत से 20 जनवरी 2012 को स्वीकृत त्रिकुट जलाशय योजना अब पूरी तरह से फोरेस्ट क्लीयरेंस में फंस गयी है.

डीआरडीओ ने दिया एनओसी : वन विभाग द्वारा अनापत्ति पत्र मांगे जाने के बाद लघु सिंचाई विभाग ने मार्च 2016 में पर्यावरण व डीआरडीओ से एनओसी लेने के लिए फाइल बढ़ायी. इसमें डीआरडीओ ने एनओसी भी दे दिया, चूंकि त्रिकुट जलाशय के पानी से ही डीआरडीओ में आवश्यकतानुसार जलापूर्ति संभव है. इसलिए डीआरडीओ ने अपनी सारी प्रक्रिया पूर्ण करने में बगैर देर किये लघु सिंचाई विभाग को एनओसी दे दिया. बावजूद वन विभाग द्वारा पूरी तरह से फॉरेस्ट क्लियरेंस नहीं दी गयी है.
दो वर्ष पहले ही मांगा था क्लियरेंस
जिले के अधिकांश सिंचाई योजना विभागीय पेच व लेटलतीफी की वजह से अटकी हुई है. लघु सिंचाई विभाग द्वारा जून 2015 ने वन विभाग से फॉरेस्ट क्लियरेंस मांगा था. इसके लिए त्रिकुट जलाशय योजना में पड़ने वाली वन भूमि के बदले जिला प्रशासन की अनुशंसा पर दहीजोर गांव में 98 एकड़ भूमि वन विभाग को मुहैया भी करा दिया गया है. लेकिन वन विभाग ने फॉरेस्ट क्लियरेंस के लिए लघु सिंचाई विभाग को पत्र लिखकर 10 बिंदुओं पर अनापत्ति पत्र मांगा है. इसमें पर्यावरण क्लियरेंस, डीआरडीओ से एनओसी समेत अन्य मामले हैं.
बढ़ती जा रही है प्राक्कलन राशि
विभागीय पेच व लेटलतीफी की वजह से त्रिकुट जलाशय योजना का प्राक्कलन राशि धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है. लघु सिंचाई विभाग ने पुन: त्रिकुट जलाशय योजना का प्राक्कलन रिवाइज कर चार करोड़ से बढ़ाकर 6.5 करोड़ रूपया कर दिया है. इसकी प्रशासनिक स्वीकृति भी मिल चुकी है. करीब 34 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बनने वाली इस त्रिकुट जलाशय योजना से डीआरडीओ में पेयजलापूर्ति व 200 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई का लक्ष्य है.
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