उदासीनता: एक हजार छात्रों को देना था लोन, मात्र 76 को मिला, लक्ष्य के अनुरूप बैंक नहीं दे रहे शिक्षा ऋण

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देवघर: यदि उच्च शिक्षा प्राप्त करने में आर्थिक संकट आड़े आ रही है तो घबराने की जरूरत नहीं है. अभिभावक आर्थिक रूप से सबल नहीं हैं. यदि छात्र मेधावी है तो एजुकेशन लोन लेकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकते हैं. देवघर जिले में कई बैंक ऐसे हैं जो मेधावी छात्रों के सपने को पूरा करने […]

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देवघर: यदि उच्च शिक्षा प्राप्त करने में आर्थिक संकट आड़े आ रही है तो घबराने की जरूरत नहीं है. अभिभावक आर्थिक रूप से सबल नहीं हैं. यदि छात्र मेधावी है तो एजुकेशन लोन लेकर अपनी पढ़ाई पूरी कर सकते हैं. देवघर जिले में कई बैंक ऐसे हैं जो मेधावी छात्रों के सपने को पूरा करने में सहयोग करने को तत्पर हैं. वहीं जिले में कुछ ऐसे भी बैंक हैं जो एजुकेशन लोन देने से दूर भाग रहे हैं.
यही कारण है कि इस साल जिले के बैंकों को एक हजार छात्रों के बीच 60 करोड़ लोन देने का लक्ष्य रखा गया था. लेकिन अभी तक मात्र 76 छात्रों को ही लोन मिला है. यह राशि मात्र 2.37 करोड़ है.
स्थिति यह है कि देवघर जिले में 37 बैंक हैं जिसमें से मात्र 15 बैंकों ने ही एजुकेशन लोन दिया है. शेष 22 बैंकों का परफॉरमेंस शून्य है.
इन बैंकों का है अच्छा परफॉरमेंस
एजुकेशन लोन में जिले को एक हजार छात्रों को लोन देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. जिसमें से अभी तक मात्र 76 छात्रों को ही लोन मिला है. अभी तक कुल 2.37 करोड़ लोन का वितरण किया गया है. जिसमें सर्वाधिक लोन सेंट्रल बैंक ने 60 के लक्ष्य के विरुद्ध 14 छात्रों को 42 लाख लोन दिया. वहीं एसबीआइ ने 225 के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक मात्र छह छात्रों को 36.75 लाख लोन दिया है. इसी प्रकार इलाहाबाद बैंक ने 120 के विरुद्ध 22 छात्रों को 63.55 लाख, आंध्रा बैंक ने 07 व बैंक अॉफ महाराष्ट्रा ने 05 छात्रों को लोन दिया. लोन देने में केनरा बैंक, यूको बैंक, बैंक अॉफ बरौदा, सिंडिकेट बैंक, ओरिएंटल बैंक अॉफ कॉमर्स, देना बैंक, इंडियन बैंक,एचडीएफसी, एक्सिस बैंक आदि भी शामिल हैं. इन बैंकों ने एक या दो छात्रों को ही लोन स्वीकृत किया.
कई बैंकों ने तो लोन का खाता भी नहीं खोला
डीएलसीसी की बैठक में मिले आंकड़ों के मुताबिक देवघर जिले में एसबीआइ, इलाहाबाद बैंक, सेंट्रल बैंक अॉफ इंडिया, पीएनबी सहित कई अन्य ब्रांच को छोड़, अधिकांश बैंक शाखाएं एजुकेशन लोन देने के मामले में खाता भी नहीं खोल पाये हैं. ये ऐसे बैंक हैं जिन्होंने अब तक एक भी एजुकेशन लोन नहीं दिया है. परेशान अभिभावक बैंकों के चक्कर लगाते थक जाते हैं. लोन देने के मामले में बैंक आनाकानी करते हैं, कुछ बैंक करते भी हैं तो इतनी फॉर्मेलिटी और गारंटी की प्रक्रिया पूरी करवाते हैं कि अभिभावक परेशान हो जाते हैं.
लोन के इंतजार में कर्ज लेकर भरा फीस : जितेंद्र शर्मा
देवघर. जितेंद्र शर्मा देवघर के रहने वाले हैं. बेटा अभीजीत प्रकाश, बंगलौर में इंजीनियरिंग कर रहा है. फीस भरना बहुत जरूरी था. उन्होंने ने अपने बेटे को उच्च शिक्षा दिलवाने के लिए एसबीआइ से एजुकेशन लोन के लिए आवेदन दिया. साल के लगभग दो लाख फीस भरना पर रहा है. लोन लेने में इतनी प्रक्रिया अपनायी गयी कि इसमें एक माह से अधिक का वक्त लग गया. इस बीच बेंगलुरु में फीस भरना जरूरी था तो दो लाख रुपये कर्ज लेकर फीस भरे. एक माह बाद हालांकि लोन स्वीकृत हो गया. छह लाख लोन एसबीआइ ने स्वीकृत किया है. लोन की पहली किस्त के रूप में दो लाख रुपये बैंक ने कॉलेज में भर दिया है. देर ही सही परेशानी तो हुई लेकिन एसबीआइ ने लोन दे दिया. अब बेटे की पढ़ाई अच्छी तरह हो रही है.
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