उपेक्षा: विभागीय कार्रवाई के पेच में फंसा देवघर का ब्लड बैंक, ब्लड बैंक को लाइसेंस का इंतजार

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देवघर: देवघर में सदर अस्पताल द्वारा संचालित एक मात्र ब्लड बैंक को लाइसेंस का इंतजार है. ब्लड बैंक के लाइसेंस की अवधि चार जुलाई 2014 को ही समाप्त हो गयी है. उसके बाद से बिना लाइसेंस से ही ब्लड बैंक संचालित है. ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ मनोज गुप्ता के अनुसार लाइसेंस नवीकरण के लिए […]

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देवघर: देवघर में सदर अस्पताल द्वारा संचालित एक मात्र ब्लड बैंक को लाइसेंस का इंतजार है. ब्लड बैंक के लाइसेंस की अवधि चार जुलाई 2014 को ही समाप्त हो गयी है. उसके बाद से बिना लाइसेंस से ही ब्लड बैंक संचालित है. ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ मनोज गुप्ता के अनुसार लाइसेंस नवीकरण के लिए आवेदन किया गया है. उसी आधार पर ब्लड बैंक में खून लेने-देने का कार्य चल रहा है.

जानकारी के अनुसार, ब्लड बैंक का लाइसेंस संख्या जेएच/बीबी/10/2004 है, जो पांच जुलाई 2009 से चार जुलाई 2014 तक के लिये वैध था. उक्त लाइसेंस नवीकरण 30.11.2010 में भारत सरकार के ड्रग कंट्रोलर जेनरल की अनुशंसा पर झारखंड के स्वास्थ्य निदेशक प्रमुख द्वारा जारी किया गया था. ब्लड बैंक प्रभारी द्वारा लाइसेंस नवीकरण के लिए आवेदन देने के बाद दो बार संयुक्त निदेशक का दौरा भी हो चुका है. दोनों बार में उनके द्वारा कुछ त्रुटियों में सुधार करने के निर्देश दिये गये थे. अंतिम बार संयुक्त निदेशक की टीम का दौरा श्रावणी मेला के पूर्व हुआ था. उनके कहने पर ब्लड बैंक की एसी दुरुस्त करायी गयी व पंखे उतरवाये गये, किंतु एलिजा उपकरण अब नहीं खरीदे जा सके हैं. इस वजह से ब्लड बैंक का लाइसेंस नवीकरण का मामला लटका हुआ है.
रक्त लेने के लिए करना पड़ता है डोनेशन : ब्लड बैंक से रक्त लेने के लिए मरीज के परिजन व संबंधी को डोनेशन करना पड़ता है और एचआइवी, हेपेटाइटेस बी, हेपेटाइटिस-सी, मलेरिया व वीडीआरएल जांच के लिए पांच सौ रुपये का भुगतान करना पड़ता है. थैलसिमिया मरीजों के लिए मुफ्त में ब्लड उपलब्ध कराने का प्रावधान है. वहीं कई लोग डोनेट कार्ड से व पैरवी के सहारे भी ब्लड प्राप्त कर लेते हैं.
नहीं है काउंसेलर व रिपोर्टिंग स्टाफ : ब्लड बैंक में काउंसेलर व रिपोर्टिंग स्टाफ नहीं हैं. ब्लड रिप्लेसमेंट करने के साथ-साथ अन्य कार्य एलटी ही करते हैं.

वैसे ब्लड बैंक का कार्य निबटाने के लिए एक प्रभारी डॉक्टर सहित प्रभार पर सदर अस्पताल के लिपिक, प्रतिनियुक्ति पर सीएस कार्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर, एक ए ग्रेड नर्स व पांच एलटी कार्यरत हैं.
नहीं है ब्लड कंपोनेट की सुविधा: ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेट की सुविधा नहीं है, जबकि ब्लड बैंक के एलटी कंपोनेट संप्रेषण प्रशिक्षण प्राप्त हैं. एक यूनिट ब्लड कंपोनेट से एक यूनिट एफएफपी, एक यूनिट आरबीसी, एक यूनिट प्लेटलेट्स, एक यूनिट प्लाज्मा व एक यूनिट क्रायो निकलता है, जो पांच मरीजों के काम आ सकता है. जानकारों के अनुसार, जिसे डब्लूबीसी कम रहता है, उसे एफएफपी चढ़ाया जाता है. बर्न मरीज को क्रायो चढ़ाया जाता है. कैंसर व डेंगू मरीजों के लिए प्लेटलेट्स व एफएफपी चढ़ता है.
मिल जाएगा लाइसेंस, सेवा पर कोई असर नहीं
अप्लाय फॉर पर ब्लड बैंक चल रहा है. लाइसेंस नवीकरण के लिए संयुक्त निदेशक के नेतृत्व में दो बार टीम का दौरा भी हो चुका है. टीम के कहने पर एसी ठीक कराया गया. पंखे उतरवाये गये. एलिजा उपकरण का क्रय नहीं हो सका है. सरकारी ब्लड बैंक है, इसलिए अब आखिरी बार टीम का दौरा होगा और नवीकरण लाइसेंस मिल जायेगा.
डॉ मनोज गुप्ता, प्रभारी, ब्लड बैंक सदर अस्पताल
रक्तदान में कई संस्थाएं हैं आगे
रक्तदान को लेकर आम लोगों में तो जागरुकता का अभाव है. लोगों में यह भय सताता है कि ब्लड देने से कमजोर हो जाएंगे. हालांकि रक्त देने वाले कमजोर नहीं होते, बल्कि हमेशा स्वस्थ रहते हैं. यहां रक्तदान शिविर लगाने वालों में संस्कार सहयोग समिति, लक्ष्मीपुर चौक के समीप के पुस्तकालय समिति, बीआइटी जसीडीह, एचडीएफसी बैंक, यूको बैंक, एसबीआइ, एसबीआइ, बंधन बैंक, रक्तदान-महादान ग्रुप व अन्य शामिल हैं.
नहीं चालू हो सका मेगा ब्लड बैंक
बांका के पूर्व सांसद दिग्विजय सिंह ने अपने सांसद निधि से कई साल पहले कुष्ठाश्रम अस्पताल परिसर में मेगा ब्लड बैंक का निर्माण कराया था, जो अब तक चालू नहीं हो सका. उक्त मेगा ब्लड बैंक भवन वर्तमान में रेड क्रॉस सोसाइटी के कब्जे में है. अगर उक्त मेगा ब्लड बैंक चालू हुआ रहता तो कब का ही ब्लड कंपोनेट सुविधा आरंभ हो जाता. पूर्व सांसद ने अपने कोष से ब्लड बैंक के उपकरण क्रय के लिए भी राशि दी थी, लेकिन उपकरण का क्रय नहीं हो सका. अगर मामले की उच्चस्तरीय जांच हो तो इसका खुलासा हो सकता है.
वर्ष भर में निकलता है करीब पांच हजार यूनिट ब्लड
ब्लड बैंक के रिकॉर्ड के अनुसार हर महीने 400 से 450 यूनिट रक्त मरीजों को दिया जाता है. तीन माह के आंकड़ों पर गौर करें तो अप्रैल 2017 में 329 यूनिट का कलेक्शन हुआ, जबकि 381 मरीजों के लिए रक्त निकला. इसी प्रकार मई माह में 382 यूनिट का कलेक्शन आया और 427 यूनिट रक्त की खपत हुई. जून महीने में 432 यूनिट कलेक्ट हुआ व 431 यूनिट खपत हुई. जुलाई माह में कलेक्शन का आंकड़ा 442 यूनिट व खपत का आंकड़ा 434 यूनिट रहा है. रक्तदाता संस्थाओं द्वारा अप्रैल माह में चार, मई माह में दो, जून व जुलाई माह में पांच-पांच कैंप आयोजित कर स्वैच्छिक रक्तदान किया गया है.
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