सारठ सीएचसी: एक चिकित्सक के भरोसे 1.69 लाख की आबादी, सर्जन नहीं, रेफर किये जाते हैं मरीज

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सारठ: सारठ प्रखंड के 1.69 लाख की आबादी यहां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर है. तीन करोड़ भारी-भरकम राशि खर्च कर इस भवन को अत्याधुनिक तो बना दिया गया मगर पर्याप्त सुविधाएं नहीं दी गयी. सीएचसी में छह चिकित्सकों का पद स्वीकृत है, लेकिन केवल दो पदस्थापित हैं. एकमात्र आयुष चिकित्सक डॉ यशोधरा नायक […]

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सारठ: सारठ प्रखंड के 1.69 लाख की आबादी यहां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर है. तीन करोड़ भारी-भरकम राशि खर्च कर इस भवन को अत्याधुनिक तो बना दिया गया मगर पर्याप्त सुविधाएं नहीं दी गयी. सीएचसी में छह चिकित्सकों का पद स्वीकृत है, लेकिन केवल दो पदस्थापित हैं. एकमात्र आयुष चिकित्सक डॉ यशोधरा नायक 24 घंटे सामान्य से लेकर गंभीर मरीजों को अपनी सेवा दे रही है. आपात स्थिति से निबटने की कोई व्यवस्था नहीं है. यदि कोई इमरजेंसी हो तो यहां से मरीजों को सीधे रेफर कर दिया जाता है.

ऑपरेशन थियेटर रहने के बाद भी यहां सर्जन नहीं हैं. सीएचसी में नर्स भी नहीं है. इसके अलावा कुपोषितों के इलाज के लिए एमटीसी सेंटर भी यहां नहीं है. कुपोषण के शिकार बच्चों को मधुपुर या फिर पालोजोरी में भरती कराना पड़ता है. यही नहीं सीएचसी में आवश्यकता पड़ने पर सिजेरियन की भी व्यवस्था नहीं है. एक साल पहले राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने सीएचसी का निरीक्षण किया था. उन्होंने इसे रेफरल अस्पताल का दरजा देने की घोषणा थी, लेकिन उनके जाते-जाते घोषणा भूली-बिसरी बात हो गयी.

मरीजों को मिलने वाली सुविधा: ओपीडी में मरीजों को सामान्य बीमारियों के लिए दवा दी जाती है. लैब में टीएलसी, डीएलसी, हेमोग्लोबिन, इएसआर, यूरीन रुटीन जांच, ब्लड सुगर, ब्लड ग्रुपिंग, मलेरिया, बलगम, प्रेग्नेंसी, एचआइवी, भीडीआरएल, हेपेटाइटिस बी, की जांच की जाती है. 40 रुपये शुल्क देय पर एक्स-रे भी किया जाता है. सामान्य प्रसव की सुविधा भी हैं. पारिवारिक नियोजन के तहत ऑपरेशन किया जाता है. पिछले वर्ष जेएसवाइ के तहत प्रसव के वाद सैकड़ों मां को 76 लाख व परिवार नियोजन के तहत 8.50 लाख भुगतान किया गया है.
सीएचसी में जरूरी सुविधाएं
सारठ सीएचसी को रेफरल अस्पताल का दरजा मिले. एक नियमित सर्जन की जरूरत है. ताकि आसपास के सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के गंभीर मरीजों या फिर किसी दुर्घटना को आपात स्थिति में रेफर करने के बजाय यहीं सुविधा मिल सके. सीएचसी में मरीजों के हार्मोन जांच, थायराइड जांच, बांझपन जांच की सुविधा दी जाने की जरूरत है.
समय पर नहीं मिल पाता एंबुलेंस: क्षेत्र में हादसा या गंभीर स्थिति में मरीजों को ले जाने के लिए समय पर एंबुलेंस नहीं मिल पाता है. अधिकतर समय बामनगामा पंचायत के एंबुलेंस पर ही निर्भरता बढ़ जाती है.
आयुष चिकित्सक डा यशोधरा नायक देती हैं मरीजों को सेवा
सीएचसी में आरबीएसके अायुष चिकित्सक डा यशोधरा नायक ने बताया कि चिकित्सक की कमी है. जिस कारण उन्हें भी ओपीडी देखना पड़ता है. यहां ओपीडी में मरीजों की संख्या रोज 100 से ज्यादा होती है.
-डा यशोधरा नायक
कहते हैं सीएचसी प्रभारी
सीएचसी सारठ की व्यवस्था पर प्रभारी डा विधु विबोध ने कहा कि मेन पावर की कमी है. 80 कर्मी के जगह मात्र 30 काम कर रहे हैं. ड्रेसर नहीं है. चिकित्सक की कमी है. दो चिकित्सक हैं. मीटिंग के दिन आयुष चिकित्सक ही ओपीडी संभालती है.
डॉ विधु विबोध, सीएचसी प्रभारी
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