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देवघर रोपवे हादसा: चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन में सेना के जवानों को कैसे मिली सफलता, जानें विस्तार से

त्रिकुट हादसे में फंसे लोगों को बचाने के लिए सेना के जवानों को 3 दिन बाद सफलता मिली, ये पहली बार है जब 900 फीट से अधिक ऊंचाई पर फंसे लोगों को एयरलिफ्ट किया गया. इनमें बड़ी भूमिका एयरफोर्स के जवानों की है

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
देवघर रोपवे हादसा
देवघर रोपवे हादसा
ट्विटर

देवघर: त्रिकुट रोप-वे हादसे में फंसे पर्यटकों को बचाने के लिए इंडियन एयरफोर्स, आइटीबीपी, एनडीआरएफ व सेना ने रेस्क्यू अॉपरेशन चलाया. 46 घंटे तक चले रेस्क्यू अॉपरेशन से 46 लोगों को नयी जिंदगी मिली. रोपवे में फंसे सभी पर्यटकों के लिए देवदूत बनकर जवान आये और जो सांसें अटकी थी, उन्हें नया जीवन दे गये.

एयरफोर्स के अधिकारियों की मानें तो देश में पहली बार रोपवे पर इतना लंबा रेस्क्यू अॉपरेशन चला. पहली बार 900 फीट से अधिक ऊंचाई पर फंसे लोगों को एयरलिफ्ट किया गया. यह भी पहली बार हुआ कि त्रिकुट रोप-वे के ऑपरेशन में एयरफोर्स, आइटीबीपी, एनडीआरएफ और पुलिस के जवान संयुक्त रूप से लगे और सफलतापूर्वक लोगों की जान बचायी.

रोप-वे हादसे के लिए होप-वे बने एयरफोर्स के जवान :

जब रविवार को हादसे की जानकारी मिली तो कैसे रेस्क्यू किया जायेगा, पहले स्थानीय स्तर पर देखा गया. लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना की मदद मांगी गयी. गोड्डा सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने जहां गृह मंत्री से बात करके सेना की मदद मांगी, वहीं राज्य सरकार ने भी केंद्र से रेस्क्यू के लिए सेना की मदद मांगी.

जब केंद्र से सेना के द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन को हरी झंडी मिल गयी और सोमवार की अहले सुबह ही एयरफोर्स के दो हेलीकॉप्टर और अधिकारी व जवान पहुंच गये. उनका साथ देने के लिए आइटीबीपी और एनडीआरएफ के जवान भी पहुंच गये, तब रोप-वे की ट्रॉली में फंसे लोगों के लिए एक आशा लेकर सेना आयी.

सेना के आने तक स्थानीय प्रशासन, पुलिस और स्थानीय लोगों ने किया बचाव कार्य :

घटना में जब तक सेना ने मोर्चा संभाला, उससे पहले यानी रविवार को शाम 4.30 बजे से पूरी रात स्थानीय प्रशासन, एनडीआरएफ और खासकर स्थानीय लोगों ने अपने स्तर से यथा संभव रेस्क्यू चलाया. रोपवे में अनुबंध पर काम करने वाले स्थानीय पन्नालाल ने रस्सी के सहारे ट्रॉली तक पहुंचे और 10 लोगों के सकुशल रेस्क्यू किया. वहीं देवघर एनडीआरएफ के जवानों ने ड्रोन से ट्रॉली में फंसे लोगों तक पानी व खाने-पीने की सामग्री भेजी.

लगातार मौजूद रहे डॉ निशिकांत दुबे

रेस्क्यू अॉपरेशन में सेना के जवानों का सभी ने उत्साह बढ़ाया. गोड्डा सांसद डॉ निशिकांत दुबे दिन-रात घटनास्थल पर ही डटे रहे. डॉ दुबे सुबह छह बजे राेप-वे पहुंच गये थे. डॉ दुबे समर्थकों के साथ रोपवे में फंसी ट्रॉली नंबर सात के करीब की पहाड़ी पर पहुंच गये. सांसद पहाड़ी पर ही बैठकर पूरे रेस्क्यू की मॉनिटरिंग करते रहे.

केंद्रीय गृह सचिव समेत मुख्य सचिव व तीनों सेना के अधिकारियों से फोन पर लगातार बात करते रहे. वहीं राज्य सरकार के पर्यटन मंत्री हफीजुल हसन, शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो के अलावा डीसी मंजूनाथ भजंत्री और एसपी सुभाष चंद्र जाट अपने पूरे प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों व कर्मियों की टीम के साथ दिन-रात डटे रहे. उपरोक्त के अलावा स्थानीय लोगों ने भी जंगल में रेस्क्यू में जवानों की मदद की और उनका हौसला बढ़ाया.

Posted By: Sameer Oraon

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