ब्रजेश गंझू की मौत से TSPC के पुराने नेतृत्व को बड़ा झटका, कई प्रमुख कैडर गिरफ्तार; चतरा में कैसे कमजोर हुआ संगठन का नेटवर्क?
बृजेश गंझू
चतरा में टीएसपीसी संगठन को लगातार पुलिस कार्रवाई से बड़ा झटका लगा है. सुप्रीमो ब्रजेश गंझू की मौत और शीर्ष कैडरों की गिरफ्तारी से नेतृत्व का संकट गहरा गया है. संगठन के प्रभाव में आई भारी कमी.
चतरा. चतरा जिले में लंबे समय तक भाकपा माओवादी और टीएसपीसी के बीच वर्चस्व को लेकर संघर्ष चलता रहा है. माओवादी गतिविधियों में कमी आने के बाद टीएसपीसी ने कई इलाकों में अपनी सक्रियता बढ़ायी. समय-समय पर घटनाओं को अंजाम देकर संगठन अपनी मौजूदगी दर्ज कराता रहा. जैसे कि जुलाई 2026 में नरेश गंझू की गिरफ्तारी या फरवरी 2025 में आक्रमण गंझू की गिरफ्तारी.
हालांकि, पुलिस और सीआरपीएफ के लगातार संयुक्त अभियानों के बाद संगठन पर दबाव बढ़ता गया. कई वरीय उग्रवादियों की गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण से टीएसपीसी का नेटवर्क धीरे-धीरे कमजोर होता चला गया.
अब टीएसपीसी सुप्रीमो सरदार उर्फ ब्रजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोगता के मारे जाने से संगठन को एक और बड़ा झटका लगा है. आक्रमण गंझू की गिरफ्तारी और अन्य प्रमुख कैडरों के खिलाफ कार्रवाई के बाद शीर्ष नेतृत्व पर दबाव पहले से था. सरदार की मौत के बाद संगठन के शीर्ष नेतृत्व के सामने पैदा हुआ संकट और गहरा गया है.
आक्रमण की गिरफ्तारी से लगा था बड़ा झटका
टीएसपीसी के सेकेंड इन कमांड माने जाने वाले आक्रमण गंझू उर्फ रवींद्र गंझू उर्फ नेताजी की गिरफ्तारी फरवरी 2025 में संगठन के लिए महत्वपूर्ण घटनाओं में रही. हंटरगंज थाना क्षेत्र के पतसुगिया पुल के पास कार्रवाई कर उसे गिरफ्तार किया गया था. उसके सिर पर कुल 18 लाख रुपये का इनाम था, जिसमें 15 लाख रुपये राज्य पुलिस और तीन लाख रुपये एनआईए की ओर से थे.
पुलिस के अनुसार, आक्रमण के खिलाफ चतरा, पलामू, लातेहार और हजारीबाग समेत कई जिलों में मामले दर्ज थे. गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उसके पास से एम-16 ए-1 राइफल, एसएलआर, पिस्टल, अन्य हथियार और बड़ी संख्या में कारतूस बरामद करने की बात कही थी.
आक्रमण की गिरफ्तारी के बाद संगठन के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व को बड़ा झटका लगा. इसके बाद भी पुलिस का अभियान जारी रहा. जुलाई 2026 में भी चतरा पुलिस ने टीएसपीसी से जुड़े नरेश गंझू को गिरफ्तार करने की जानकारी दी थी.
कई बड़े नाम पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार
टीएसपीसी के खिलाफ लगातार कार्रवाई में कई वरीय उग्रवादियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. कोहराम, भीखन समेत कई प्रमुख नाम पुलिस कार्रवाई की जद में आये. वहीं मुकेश गंझू ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था. कई मुठभेड़ों में भी संगठन के सदस्य मारे गये.
लगातार गिरफ्तारी, आत्मसमर्पण और मुठभेड़ों के कारण संगठन के सक्रिय कैडरों पर दबाव बढ़ता गया.
लंबे समय से भूमिगत थे ब्रजेश गंझू
टीएसपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू लंबे समय से भूमिगत रहकर संगठन का संचालन कर रहा था. सार्वजनिक रूप से उसकी गतिविधियां सामने नहीं आती थीं, लेकिन समय-समय पर अलग-अलग नामों से संगठन की ओर से प्रेस विज्ञप्तियां जारी होती रही थीं. सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश में थीं.
ब्रजेश के मारे जाने और संगठन के दूसरे प्रमुख चेहरे आक्रमण गंझू की गिरफ्तारी के बाद टीएसपीसी के पुराने नेतृत्व ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचा है. ऐसे में संगठन के बचे हुए कैडरों की गतिविधियों पर सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी और कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
टीपीसी से टीएसपीसी तक पहुंचा संगठन
टीपीसी यानी तृतीय प्रस्तुति कमेटी का गठन माओवादी संगठन से अलग हुए धड़े के रूप में हुआ था. बाद में यही संगठन टीएसपीसी यानी तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी के नाम से जाना गया. चतरा, पलामू, लातेहार और आसपास के इलाकों में संगठन की गतिविधियां लंबे समय तक रही हैं.
संगठन के शुरुआती दौर में पुलिस संरक्षण के दावे भी किये जाते रहे हैं. बाद के वर्षों में टीएसपीसी स्वयं सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बन गया और उसके खिलाफ लगातार अभियान चलाये गये.
ये भी पढ़ें: रांची में स्वच्छता अभियान: सड़क किनारे से हटाया कचरे का ढेर, अब खुले में कचरा फेंका तो लगेगा ₹2 हजार जुर्माना
अमेरिकी हथियार मिलने से भी सुर्खियों में रहा टीएसपीसी
टीएसपीसी कैडरों के पास से विदेशी हथियार मिलने के मामले भी सामने आये हैं. आक्रमण गंझू की गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने अमेरिकी निर्मित एम-16 ए-1 राइफल बरामद करने की बात कही थी. राइफल पर अमेरिकी सरकार की संपत्ति का उल्लेख होने की खबरें भी सामने आयी थीं.
इससे पहले भी सुरक्षा बलों और टीएसपीसी के बीच कई मुठभेड़ हो चुकी हैं.
लगातार कार्रवाई से सिमटता गया प्रभाव
एक समय चतरा के कई जंगल और सीमावर्ती इलाके टीएसपीसी की गतिविधियों से प्रभावित थे. पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के लगातार अभियान के साथ संगठन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी तेज हुई. गिरफ्तारियां, आत्मसमर्पण और शीर्ष नेतृत्व पर कार्रवाई के बाद संगठन की गतिविधियों में लगातार कमी आयी.
आक्रमण गंझू की गिरफ्तारी के बाद अब ब्रजेश गंझू की मौत को टीएसपीसी के पुराने नेतृत्व के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है.
ये भी पढ़ें: लातेहार में नदी पार कर रहे ग्रामीणों पर मधुमक्खियों का हमला, कई घायल; गंभीर सुदेश्वर साव की इलाज के दौरान मौत
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए