रिटायर्ड होने के बाद कोई खेतीबाड़ी तो कोई पुत्रों के व्यवसाय में कर रहे हैं सहयोग

Published by : VIKASH NATH Updated At : 31 Oct 2025 6:24 PM

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सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होना जीवन का अहम मोड़ होता है.

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चतरा. सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होना जीवन का अहम मोड़ होता है. कार्यकाल के दौरान व्यक्ति अपने परिवार, बच्चों की पढ़ाई, जीवन यापन की जिम्मेवारी निभाता है, लेकिन, रिटायर्ड होने के बाद एक नयी जिंदगी की शुरुआत होती है. सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिक इसे अक्सर अवसर के रूप में लेते है. वे समाजसेवी, खेतीबाड़ी, धार्मिक व पुत्रो के व्यवसाय कार्यों में सहयोग कर खुद को व्यस्त रख अगले पड़ाव की ओर बढ़ते हैं. धार्मिक कार्यों में जुड़े हैं कैलाश प्रसाद गुप्ता हंटरगंज प्रखंड के जोरी कला निवासी कैलाश प्रसाद गुप्ता 1988 में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग हजारीबाग डिविजन में पंप चालक के रूप में योगदान दिये. 35 सालों तक सेवा करने के बाद 2023 में सेवानिवृत्त हुए. इसके बाद धार्मिक कार्यों से जुड़ कर लोगो को धर्म के प्रति जागरूक कर रहे हैं. पर्यावरण के प्रति जागरूक कर रहे हैं इबरारूल हक हंटरगंज प्रखंड के जोरी कला निवासी मो इबरारूल हक 1981 में सरकारी शिक्षक बने थे. 32 वर्षों तक सेवा देने के बाद 2013 में मध्य विद्यालय कुरीद से सेवानिवृत्त हुए. इसके बाद घर के पास लगे बागवानी का देखभाल कर रहे हैं. साथ ही लोगों को बागवानी व पर्यावरण के प्रति जागरूक कर रहे हैं. पुत्रो के व्यवसाय में सहयोग कर रहे हैं जफर अख्तर हंटरगंज प्रखंड के जोरी कला निवासी मो जफर अख्तर 1981 में सरकारी शिक्षक बने. 32 वर्षो तक सेवा देने के बाद 2013 में मध्य विद्यालय सलैया से सेवानिवृत्त हुए. इसके बाद पुत्रों के व्यवसाय में सहयोग कर रहे है. साथ ही समाज व गांव के लोगों को शिक्षा के महत्व को बताते हुए जागरूक कर रहे हैं. सामाजिक कार्यो से जुड़े हैं अनिल मिश्रा हंटरगंज प्रखंड के होसिल गांव के अनिल कुमार मिश्रा 1981 में सरकारी शिक्षक बने. 35 वर्षो तक सेवा देने के बाद 2016 में मध्य विद्यालय पोस्तिया से सेवानिवृत हुए. इसके बाद सामाजिक कार्यो से जुड़ कर लोगो को सेवा दे रहे है. सामाज में फैले कुरीतियों को दूर करने के प्रति जागरूक कर रहे है. खेती बारी करा रहे हैं रामावतार महतो हंटरगंज प्रखंड के बारा गांव निवासी रामावतार महतो 1973 में वनरक्षी के रूप में योगदान दिया. 40 वर्षो तक सेवा देने के बाद 2013 में वनपाल पद से सेवानिवृत हुए. फिलहाल वे अपने गांव में रह कर खेतीबाड़ी करा रहे है. साथ ही आसपास के लोगो को खेती के तकनीकी की जानकारी दे रहे है.

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