सरहुल झारखंड के सांस्कृतिक विरासत का उदाहरण है : सत्यानंद

Author Deepak
Updated:
विज्ञापन
सरहुल झारखंड के सांस्कृतिक विरासत का उदाहरण है : सत्यानंद

सदर प्रखंड के ब्राहमणा गांव के भोगता टोला में गुरुवार को सरहुल पूजा का आयोजन किया गया.

विज्ञापन

चतरा. सदर प्रखंड के ब्राहमणा गांव के भोगता टोला में गुरुवार को सरहुल पूजा का आयोजन किया गया. जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री सत्यानंद भोगता शामिल हुए. आयोजकों ने श्री भोगता को सरई फुल व अबीर गुलाल लगा कर स्वागत किया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि सरहुल पर्व प्रकृति संरक्षण का पर्व है. यह पर्व समृद्ध झारखंड के सांस्कृतिक विरासत का अनुपम उदाहरण है. प्रकृति व संस्कृति का अनुठा संयोग सरहुल को माना है. उन्होंने उपस्थित लोगो से पेड़ पौधे लगाने व बचाने की बात कही. श्री भोगता कार्यक्रम में मांदर बजाकर झूमे और लोगों को झुमाया. मौके पर जिलाध्यक्ष नवलकिशोर यादव, मुखिया संतोष भुइयां, प्रमोद भोगता, ईश्वर भोगता, राजकुमार भोगता, राजेंद्र भोगता, सकेंद्र भोगता, गणेश पाहन, धनेश्वर पाहन, लाखो पाहन समेत कई शामिल थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Deepak

लेखक के बारे में

By Deepak

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola