चतरा-सिमरिया रोड पर विराजपुर के पास40 घंटे से सड़क जाम, CRPF जवान की मौत के बाद फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

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40 घंटे से है सड़क जाम, सांसद विधायक पहुंचे

फोटो जाम स्थल पर बैठे सांसद, विधायक | Prabhat Khabar Network

Chatra News: चतरा में कोयला की गाड़ियों के खिलाफ 40 घंटे से सड़क जाम है. सांसद और विधायक ने ग्रामीणों की मांगों का समर्थन किया है. प्रशासन से वार्ता की मांग जारी है.

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Chatra News: चतरा-सिमरिया रोड पर विराजपुर के पास40 घंटे से सड़क जाम, मौके पर पहुंचे सांसद-विधायकटे से अधिक समय से सड़क जाम है. इससे कोयले की ढुलाई पूरी तरह ठप हो गयी है और आम लोगों को भी आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं और कोल वाहनों की चपेट में आने से लोगों की मौत को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. प्रदर्शनकारी सिमरिया-चतरा मार्ग से कोयले की ढुलाई बंद करने और सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों के लिए स्पष्ट मुआवजा नीति बनाने की मांग कर रहे हैं. ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े हैं और सड़क से हटने को तैयार नहीं हैं.

कोयले की गाड़ी ने ली सीआरपीएफ जवान की जान

बताया जाता है कि तीन दिन पहले एक कोयले की गाड़ी ने सीआरपीएफ जवान लक्ष्मण यादव को अपनी चपेट में ले लिया था. हादसे में जवान की मौत हो गयी. घटना के बाद मृतक के परिजन और स्थानीय ग्रामीण आक्रोशित हो गये. गुस्साये लोगों ने चतरा-सिमरिया पथ को विराजपुर के समीप जाम कर दिया. ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग पर कोल वाहनों से लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं. हादसों में कई लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाये जा रहे हैं. सीआरपीएफ जवान की मौत के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और ग्रामीण अनिश्चितकालीन सड़क जाम पर बैठ गये.

मुआवजा नीति बनाने की मांग

सड़क जाम कर रहे लोगों की प्रमुख मांग है कि सिमरिया-चतरा मार्ग से कोयले की ढुलाई बंद की जाये. इसके साथ ही कोल वाहनों से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों और घायलों के लिए स्पष्ट मुआवजा नीति बनायी जाये. झामुमो नेता मनोज चंद्रा ने ग्रामीणों की मांगों का समर्थन करते हुए आमरण अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने लोगों की मांगों पर गंभीरता से पहल नहीं की तो आंदोलन को और तेज किया जायेगा. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सड़क आम लोगों के आवागमन के लिए है, लेकिन बड़ी संख्या में कोल वाहनों के परिचालन के कारण ग्रामीणों का चलना तक मुश्किल हो गया है.

सीओ और बीडीओ की वार्ता भी रही बेनतीजा

सड़क जाम की सूचना मिलने के बाद सिमरिया के सीओ और बीडीओ जाम स्थल पर पहुंचे. दोनों अधिकारियों ने मृतक के परिजनों और प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया. अधिकारियों ने लोगों से सड़क जाम समाप्त कर आवागमन सामान्य करने की अपील की. हालांकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे. ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि जब तक कोयला ढुलाई और मुआवजा नीति को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा. अधिकारियों के समझाने के बावजूद सड़क जाम समाप्त नहीं हो सका.

सांसद और विधायक पहुंचे जाम स्थल

चतरा सांसद कालीचरण सिंह और सिमरिया विधायक कुमार उज्जवल भी जाम स्थल पर पहुंचे. दोनों जनप्रतिनिधियों ने मृतक के परिजनों और आंदोलन कर रहे ग्रामीणों से मुलाकात की. सांसद और विधायक ने सिमरिया-चतरा मार्ग से कोयले की ढुलाई बंद करने और दुर्घटना पीड़ितों के लिए मुआवजा नीति बनाने की मांग का समर्थन किया. जनप्रतिनिधियों ने इस मार्ग पर आये दिन हो रही सड़क दुर्घटनाओं और उनमें लोगों की मौत पर चिंता जतायी. उन्होंने कहा कि लगातार दुर्घटनाएं गंभीर विषय हैं और प्रशासन को इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है.

क्षमता से अधिक कोयला लेकर दिन-रात दौड़ते हैं हाइवा

स्थानीय लोगों के अनुसार सिमरिया-चतरा पथ पर दिन-रात बड़ी संख्या में कोयला लदे हाइवा चलते हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि कई कोल वाहन क्षमता से अधिक कोयला लेकर इस मार्ग से गुजरते हैं. पहले मगध और आम्रपाली कोल परियोजनाओं से कोयले की ढुलाई इस रास्ते से होती थी. अब हजारीबाग जिले के बड़कागांव स्थित पकरी बरवाडीह क्षेत्र से एनटीपीसी का कोयला लेकर बड़ी संख्या में हाइवा प्रतिदिन सिमरिया और चतरा होते हुए कटकमसांडी रेलवे साइडिंग तक जाते हैं. कोयला खाली करने के बाद ये वाहन इसी रास्ते से वापस लौटते हैं. इससे मार्ग पर चौबीस घंटे भारी वाहनों का दबाव बना रहता है.

हाइवा की ओवरटेकिंग से बढ़ रहा दुर्घटनाओं का खतरा

ग्रामीणों का आरोप है कि कोल वाहन चालक सड़क पर आगे निकलने की होड़ में एक-दूसरे को लगातार ओवरटेक करते हैं. तेज रफ्तार और ओवरटेकिंग के कारण छोटे वाहन चालकों, बाइक सवारों और पैदल चलने वाले लोगों को भारी परेशानी होती है. लोगों का कहना है कि सड़क पर हर समय हाइवा की कतार लगी रहती है. ऐसे में आम लोगों के लिए सुरक्षित तरीके से आवागमन करना मुश्किल हो गया है. ग्रामीण लगातार हो रही दुर्घटनाओं के पीछे भारी कोल वाहनों की तेज रफ्तार और बेतरतीब परिचालन को प्रमुख कारण बता रहे हैं.

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40 घंटे बाद भी वरीय अधिकारी नहीं पहुंचे

ग्रामीणों का आरोप है कि 40 घंटे से अधिक समय से सड़क जाम रहने के बावजूद जिला प्रशासन का कोई वरीय पदाधिकारी जाम स्थल पर नहीं पहुंचा है. इससे प्रदर्शनकारियों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है. आंदोलनकारी चतरा के डीसी और एसपी को जाम स्थल पर बुलाने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि वरीय अधिकारी मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों और मृतक के परिजनों से सीधी वार्ता करें तथा मांगों पर ठोस निर्णय लें. फिलहाल सड़क जाम जारी है और कोयले की ढुलाई पूरी तरह बंद है.

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