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कड़ाके की ठंड में रात गुजारने को विवश हैं आदिम जनजाति परिवार

Updated at : 10 Dec 2025 4:47 PM (IST)
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कड़ाके की ठंड में रात गुजारने को विवश हैं आदिम जनजाति परिवार

प्रखंड क्षेत्र में आदिम जनजाति निवास करने वाले परिवार के लोग इस कड़ाके के ठंड में ठिठुर रहे हैं. दिसंबर माह बीते 10 दिन हो चुका है.

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फोटो 10सीएच 1:- अलाव का सहारा लेते आदिम जनजाति परिवार कुंदा. प्रखंड क्षेत्र में आदिम जनजाति निवास करने वाले परिवार के लोग इस कड़ाके के ठंड में ठिठुर रहे हैं. दिसंबर माह बीते 10 दिन हो चुका है. ठंड व शीतलहरी चरम पर है. न्यूनतम तापमान नौ डिग्री सेल्सियस पर पहुंच चुका है, लेकिन अबतक आदिम जनजाति परिवारों के बीच कंबल वितरण नहीं हुआ है. कंबल के अभाव में आदिम जनजाति परिवार के लोग दिन में धूप का सहारा ले रहे जबकि रातों में लकड़ी जलाकर अलाव के सहारे रात गुजारने को विवश हैं. कई परिवारों का आवास भी जर्जर हो चुका है. कुछ परिवार को आवास उपलब्ध कराया गया है. प्रखंड में कुल 230 आदिम जनजाति परिवार के लोग निवास करते हैं. संतोष बैगा ने बताया कि हम लोगों को अभी तक कंबल नहीं मिला है रात में आग जलाकर सोते हैं. सोमरी बिरहोरिन ने बताया कि ठंड काफी है लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कंबल नहीं मिला है बच्चे भी ठंड में ठिठुर रहे हैं. मुखिया सह मुखिया संघ के अध्यक्ष मनोज कुमार साहू ने कहा कि ठंड काफी बढ़ा हुआ है. अब तक कंबल उपलब्ध कराने की सूचना नहीं है.जिला प्रशासन से कंबल की मांग की गयी है. क्या कहते है बीडीओ बीडीओ साकेत कुमार सिन्हा ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा अब तक कंबल उपलब्ध नहीं कराया गया है. आवंटन मिलते ही प्राथमिकता के आधार पर कंबल दिया जायेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH NATH

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