Chaibasa News : अधिकारी की मौत के बाद कर्मियों ने किरीबुरु खदान में काम बंद किया

Author Akash
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Chaibasa News : अधिकारी की मौत के बाद कर्मियों ने किरीबुरु खदान में काम बंद किया

किरीबुरु अस्पताल की रेफरल व्यवस्था पर यूनियन प्रतिनिधियों ने उठाये सवाल

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किरीबुरु खदान प्रबंधन ने पांच दिनों की मोहलत मांगी, कर्मचारियों ने शुरू किया काम प्रतिनिधि, गुवा किरीबुरु खदान में कार्यरत अधिकारी उमाकांत मल्लिक (डिप्टी मैनेजर, माइनिंग विभाग) की रविवार रात में भुवनेश्वर में इलाज के दौरान मौत हो गयी. अधिकारी की मौत से नाराज कर्मचारियों ने रविवार रात में किरीबुरु खदान में रात्रि पाली में काम बंद कर दिया. इसमें सभी यूनियन के प्रतिनिधि शामिल हुए. किरीबुरु प्रबंधन ने इस मामले में पांच दिनों की मोहलत मांगी. इसके बाद कर्मचारी काम पर लौट गये. यूनियन के रामा पांडेय ने बताया कि रविवार को ड्यूटी जाने के दौरान उमाकांत मल्लिक ब्रेनस्ट्रोक से कोमा में चले गये. उन्हें रविवार रात में किरीबुरु अस्पताल में भर्ती कराया गया. यहां से उन्हें भुवनेश्वर के एक अस्पताल में रेफर कर दिया गया. रामा पांडेय ने आरोप लगाया कि अस्पताल में उपचार के दौरान नियमानुसार दो लाख रुपये की सीमा समाप्त होने के बाद रेफरल रिन्यू किया जाना था, पर सेल प्रबंधन एवं किरीबुरु अस्पताल ने समय पर आवश्यक रेफरल कागजात उपलब्ध नहीं कराये गये. रामा पांडेय ने बताया कि इस कारण अस्पताल ने मरीज को डिस्चार्ज कर दिया. अस्पताल की रेफरल व्यवस्था की खामियों के कारण और समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाने से कर्मचारी की रविवार रात में मौत हो गयी. मौत वाले दिन भी रेफरल की मांग की गयी, पर अस्पताल द्वारा यह कहकर इनकार कर दिया गया कि नो पेशेंट, नो रेफर. इस घटना से आक्रोशित कर्मचारियों ने रात्रि पाली में खदान बंद कर दी. इस मामले में प्रबंधन का पक्ष लेने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया. बंदी में सभी यूनियन शामिल हुईं बंदी में इंटक, एटक, एचएमएस, बीएमएस, सीटू, झारखंड मजदूर यूनियन एवं झरखेड़ा मजदूर संघर्ष संघ सहित सभी यूनियन शामिल रहीं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रात करीब एक बजे महाप्रबंधक खान पीआर शिरपुरकर, सीजीएम एचआर डी मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी साइट पर पहुंचे. कर्मचारियों व यूनियन प्रतिनिधियों से वार्ता की. प्रबंधन ने इडी माइंस से बात कर समाधान निकालने का आश्वासन दिया. प्रबंधन ने पांच दिनों का समय मांगा. इसके बाद कर्मचारी काम पर लौट गये.

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