Chaibasa News : टाटा स्टील विजय टू खदान में मजदूरों की आर्थिक नाकाबंदी शुरू, उत्पादन व ढुलाई कार्य ठप
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 24 Dec 2024 12:07 AM
प्रबंधन का कोई प्रतिनिधि मजदूरों से वार्ता के लिए नहीं पहुंचा
गुवा. टाटा स्टील की विजय-टू लौह अयस्क खदान में आर्थिक नाकेबंदी के तहत सोमवार को सुबह 5 बजे से झारखंड मजदूर यूनियन के मजदूरों ने उत्पादन व माल ढुलाई कार्य ठप कर दिया. मजदूरों ने खदान के सुरक्षा गार्डों तथा आवश्यक सेवा जैसे एम्बुलेंस, भोजन, पानी, डीजी चलाने के लिए डीजल आदि को आंदोलन से मुक्त रखा है. आर्थिक नाकेबंदी के दौरान टाटा स्टील अथवा इनके अधीन कार्यरत तमाम वेंडरों के एक भी अधिकारी व कर्मचारी को खदान के अंदर जाने नहीं दिया गया. प्रथम पाली के बाद द्वितीय एवं रात्रि पाली में भी यही स्थिति रहने की बात कही जा रही है. आंदोलन के कारण खदान से लौह अयस्क का न तो उत्पादन हुआ व ढुलाई हो पायी. आंदोलन स्थल पर किरीबुरु के इंस्पेक्टर बमबम कुमार, गुवा थाना प्रभारी नीतीश कुमार के अलावा भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा.
इधर, यूनियन के अध्यक्ष दीनबंधु पात्रो ने बताया की टाटा स्टील प्रबंधन उनकी 14 सूत्री मांगों को पूरा नहीं कर रहा है. पिछले दो साल से हम मांगों को लेकर कंपनी प्रबंधन से आग्रह करते आ रहे हैं. सोमवार सुबह से हम आर्थिक नाकेबंदी कर रहे हैं लेकिन अपराह्न तीन बजे तक कंपनी का कोई भी पदाधिकारी हमारी सुधि लेने नहीं आया. जबतक हमारी मांगे नहीं मानी जाती है तबतक हम यहां से हटने वाले नहीं हैं. तीनों पाली का उत्पादन व माल ढुलाई शत-प्रतिशत बंद है. टाटा स्टील की विजय-टू खदान में प्रतिदिन लगभग 6 हजार टन लौह अयस्क का उत्पादन व लगभग चार हजार टन लौह अयस्क का प्रेषण किया जाता है. यूनियन ने कहा है कि जैसे -जैसे आंदोलन आगे बढ़ेगा वैसे- वैसे कंपनी प्रबंधन को नुकसान का ग्राफ भी बढ़ता जायेगा. आंदोलन स्थल पर ही मजदूर खाना बना व खा रहे हैं.रात में तंबू लगाकर जंगल के बीच आंदोलन स्थल पर हीं सोयेंगे. आपस में चंदा कर सारे मजदूर खाद्य सामग्री खरीदे हुये हैं. पानी टेंकर व अन्य व्यवस्था भी किया गया है.यूनियन की मांगें इस प्रकार हैं
100 स्थानीय ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को स्थायी रोजगार देना, लंबे समय से कार्यरत स्थानीय मजदूरों का स्थायीकरण करना, मजदूरों को मेडिकल जांच में अनफिट पाये जाने पर कम्पनी-वेंडर द्वारा इलाज कराके दुबारा काम पर रखना, कम्पनी एवं ठेकेदार के अधिन कार्यरत मजदूरों को ई.एस.आई चिकित्सा सुविधा का लाभ देना, सभी ठेका मजदूरों को योग्यतानुसार सही वेतन देना, सभी ठेका मजदूरों को 20 प्रतिशत बोनस एवं डस्ट एलाउंस एक समान मिलना चाहिए, मजदूर की मृत्यु हो जाने पर उसका बेटा या पत्नी को नौकरी देना, कार्यस्थल में दुर्घटना होने पर मेडिकल सुविधा एवं वेतन भुगतान जारी रखना, मजदूर का मृत्यु या सेवानिवृत्त होने पर उनको उचित राशि देना, ठेका मजदूरों को नियुक्ति पत्र देना, कंपनी और ठेका मजदूरों के लिए कैंटीन की सुविधा, जब भी ठेकेदार बदलता है तो 45 से 90 दिन के अंदर फुल एवं फाइनल राशि का भुगतान होना, 5 साल काम करने पर ग्रेच्युटी मिलना, यदि मजदूर अपने कार्यकाल में गंभीर बीमारी से ग्रसित होता है तो उसके घरवालों को नौकरी देना आदि मांगे शामिल हैं.ये थे मौजूद
मौके पर झारखंड मजदूर यूनियन के कोल्हान प्रमंडल उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद मोहंती, जिलाध्यक्ष आशीष कुदादा, उपाध्यक्ष करनेश जेराई, महासचिव राजेंद्र चाम्पिया, बराईबुरु इकाई के अध्यक्ष दीनबंधु पात्रो, महासचिव दुलाल चाम्पिया, उपाध्यक्ष परमेश्वर बुरमा, पूर्व जीप सदस्य बामिया माझी, मधु सिधु, लखन चाम्पिया, बागी चाम्पिया, सुखराम सिधु, सादो देवगम, कमल बुरमा, मेघाहातुबुरु इकाई के महासचिव शांतिएल भेंगरा, सचिव बिनोद होनहागा आदि के अलावा गुवा व किरीबुरु इकाई के पदाधिकारी तथा सारंडा के विभिन्न गांवों के सैकड़ों ग्रामीण व महिलाएं पारंपरिक हथियारों से लैश होकर मौजूद थे.
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