Chaibasa News : जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में ग्रामसभा को सशक्त बनायें

संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं होगा, तो समस्या और बढ़ेगी
चाईबासा. जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए ग्रामसभा का सशक्त होना जरूरी है. ग्राम सभा मजबूत होगी, तो पंचायतों को जलवायु समर्थ कार्ययोजना बनाने में मदद मिलेगी. इसमें झारखंड सरकार मदद करने को प्रतिबद्ध है. उक्त बातें राजस्व, भूमि सुधार और परिवहन मंत्री दीपक बिरुवा ने कहीं. वे रविवार को कॉन्फ्रेंस ऑफ पंचायत कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे. मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और उसके असर को लेकर पंचायत स्तर पर कार्यक्रम महत्वपूर्ण पहल है. अगर संसाधनों का समुचित उपयोग नहीं होगा, तो समस्या और बढ़ेगी. झारखंड में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और उनसे लड़ने में पंचायतों की भूमिका को लेकर कार्यक्रम हुआ. इसमें 100 से ज्यादा पंचायत प्रतिनिधि, परंपरागत शासन प्रणाली के प्रतिनिधियों सहित कई गांव के लोगों ने हिस्सा लिया. आगामी दो अक्तूबर को होने वाली विशेष ग्रामसभा की बैठक में योजनाएं बनाने की प्रक्रिया और जमीन पर उतारने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया गया. जिला पंचायत राज पदाधिकारी सविता टोपनो ने कार्ययोजना बनाने को कहा.
‘भविष्य अपने गांव में’ का संदेश दिया गया :
उक्त आयोजन असर सोशल इम्पैक्ट एडवायजर्स, पॉलिसी एंड डेवलपमेंट एडवायजरी ग्रुप, मंथन युवा संस्थान, पंच सफर और कॉमन ग्राउंड ने किया. कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों को चार समूहों में बांटकर अलग-अलग विषय पर समस्याओं और उनके समाधानों को सूचीबद्ध किया गया. इसके विषय जलवायु परिवर्तन के कारण, जल संरक्षण एवं प्रबंधन के सुझाव, वन संरक्षण, संवर्धन व आजीविका और लघु वनोपज का संवर्धन रहे. प्रतिनिधियों ने ‘भविष्य अपने गांव में’ का संदेश दिया.झारखंड में मरुस्थलीकरण का बड़ा खतरा : मुन्ना झा
असर सोशल इम्पैक्ट के निदेशक मुन्ना झा ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. झारखंड सर्वाधिक प्रभावित होने वाले राज्यों में शामिल है. झारखंड में मरुस्थलीकरण का बड़ा खतरा है. ज्ञात हो कि वर्ष 2023 में कॉन्फ्रेंस ऑफ पंचायत में नींव पड़ी.गांवों में जलवायु परिवर्तन पर चर्चा करना जरूरी : गुलाब
पंच सफर के गुलाब चंद्र प्रजापति ने कहा कि गांवों में जलवायु परिवर्तन पर चर्चा नहीं हो पा रही. इसे बड़े स्तर पर ले जाना चुनौती है. पंचायत प्रतिनिधियों के साथ मुंडा-मानकी को शामिल किया जा रहा है. पंचायतों के सामुदायिक संसाधनों के डेटाबेस बनाने में मदद की जायेगी.क्लाइमेट एक्शन टास्क फोर्स का गठन जरूरी : कुणाल
पॉलिसी एंड डेवलपमेंट एडवायजरी ग्रुप के कुणाल सिंह ने कहा कि पिछले तीन साल में कॉन्फ्रेंस ऑफ पंचायत 400 से ज्यादा पंचायतों में पहुंचा है. करीब 60 फीसदी पंचायतों में प्रतिनिधि महिलाएं थीं. क्लाइमेट एक्शन टास्क फोर्स का गठन हो सकता है. डीएमएफटी फंड इस्तेमाल हो सकता है.भू-गर्भ जलस्तर घटा : सुधीर
मंथन युवा संस्थान के सुधीर पाल ने कहा कि झारखंड के गांवों में जलवायु परिवर्तन का असर साफ है. पहले 40-50 फीट पर कुओं में पानी मिलता था. अब 100 फीट तक पानी नहीं मिल रहा है. हीट वेव की एडवायजरी गांवों के लिए जारी होने लगी है. जंगल कम हो रहे, वनोपज घट रहा है.वन ग्रामों में मूलभूत सुविधाएं व पट्टा दिलाने की मांग
चक्रधरपुर. मंत्री दीपक बिरुवा ने रविवार को वन विश्रामागार में झारखंड आंदोलनकारी मंच के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. बैठक में जनप्रतिनिधियों ने अपनी समस्याओं को लेकर मांगपत्र मंत्री को सौंपा. इसमें झारखंड वन भूमि पट्टा से वंचित गांवों के दावेदारों को शीघ्र भूमि पट्टा देने तथा सभी झारखंड वन ग्रामों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई. झारखंड आंदोलनकारी सह प्रखंड संयोजक बिरसा मुंडा ने कहा कि आज भी कई गांव ऐसे हैं जहां शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल और पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. 78 लोग वन ग्रामों की सूची में शामिल हैं, जिन्हें जल्द से जल्द वन पट्टा दिया जाए. जिले के विभिन्न प्रखंडों में 13 दिसंबर 2005 से पहले से झारखंड वन भूमि पर खेती करने या मकान बनाकर रह रहे लोगों को वन अधिकार अधिनियम के तहत व्यक्तिगत पट्टा दिया जाना चाहिए. जीविकोपार्जन के लिए वन भूमि पर निर्भर सभी लोगों को भी पट्टा मिले, जिसकी अधिकतम सीमा 10 एकड़ तय की जाए. बैठक में विधायक सुखराम उरांव, झारखंड आंदोलनकारी चिह्नितकरण आयोग के सदस्य भुवनेश्वर महतो, मिरगा प्रकाश मुंडा, दुखू बुढ, नवीन मुंडा, जेटा भेंगरा, सोमा कंडुलना, लाका लुगून, सुलेमान मुंडू, फिरोज बरजो, सलवान लोमगा, सुरा लुगून समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे.इधर, मंत्री दीपक बिरुवा ने कहा कि सरकार मूलभूत समस्याओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है. सूची में शामिल कुछ लोगों को वन पट्टा मिल चुका है, जबकि कुछ अभी भी वंचित हैं.क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्र, विद्यालय, स्वच्छ पेयजल और उप स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाओं की कमी है. इन सभी समस्याओं को दूर करने के लिए जिला स्तर पर अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी.
मंत्री दीपक बिरुवा को सौंपा गया मांगपत्र
1. जिन ग्रामों को वन भूमि पट्टा नहीं मिला है, उन्हें नियम के तहत जल्द दिया जाए.
2. जिन ग्रामों को सामुदायिक पट्टा नहीं मिला है, उन्हें भी दिया जाए.3. नियम अनुसार 10 एकड़ का पट्टा दिया जाए, कटौती की गई जमीन वापस हो.
4. पट्टा प्राप्त ग्रामों को राजस्व ग्राम घोषित किया जाए.5. विशेष ग्रामसभा कराकर सरकारी योजनाओं का चयन किया जाए.
6. दावा पत्र की प्रति दावेदार व ग्रामसभा को दी जाए.7. वन ग्रामों को बिजली, सड़क, पानी, आंगनबाड़ी, विद्यालय जैसी सुविधाएं दी जाएं.
8. 1980 से रह रहे ओबीसी को भी वन भूमि पट्टा दिया जाए.9. पट्टा धारकों को जाति, आवासीय, आय व अन्य प्रमाणपत्र जारी किए जाएं.
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