करोड़ों की लैंग्वेज लैब बेकार, 8 वर्षों से धूल फांक रहे कंप्यूटर

तस्वीर: 13सीबीएस 34 विश्वविद्यालय के पीजी ब्लॉक में बंद पड़े लैंगवेज लैब | Prabhat Khabar Network
कोल्हान विश्वविद्यालय और कॉलेजों में करोड़ों की लागत से बनी डिजिटल लैंग्वेज लैब 8 वर्षों से बंद है। प्रशासनिक उदासीनता के कारण छात्र सुविधाओं से वंचित हैं।
प्रतिनिधि, चाईबासा
कोल्हान विश्वविद्यालय समेत विभिन्न अंगीभूत कॉलेजों में विद्यार्थियों को डिजिटल रूप से समृद्ध करने के उद्देश्य से बनायी गयी करोड़ों रुपये की डिजिटल लैंग्वेज लैब पिछले 8 वर्षों से बंद पड़ी है. वर्ष 2017 में स्थापित आधुनिक लैब प्रशासनिक उदासीनता के कारण आज सिर्फ कमरों की शोभा बढ़ा रही है. विश्वविद्यालय मुख्यालय (पीजी भवन) के साथ टाटा कॉलेज, महिला कॉलेज और जेएलएन कॉलेज में लगे कंप्यूटर, प्रोजेक्टर, एसी, स्मार्ट बोर्ड और वेब कैमरा उपयोग नहीं होने के कारण धूल फांक रहे हैं.इस व्यवस्था के तहत विश्वविद्यालय के पीजी ब्लॉक में 26 कंप्यूटर, टाटा कॉलेज में 15, महिला कॉलेज में 12 और जेएलएन कॉलेज में 8 कंप्यूटर शिक्षण का इंतजार कर रहे हैं. गौरतलब हो कि लैब निर्माण के बाद विश्वविद्यालय स्तर पर न तो इसके संचालन के लिए किसी को चार्ज दिया गया और न किसी तकनीकी विशेषज्ञ (टेक्निकल एक्सपर्ट) की बहाली की गयी. नतीजा यह हुआ कि बिना शुरुआत के ही पूरी व्यवस्था ठप हो गयी.
विद्यार्थियों के कम्यूनिकेशन स्किल को विकसित करना था लक्ष्यइस आधुनिक लैंग्वेज लैब का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के कम्यूनिकेशन स्किल (संवाद कौशल) को विकसित करना और ऑनलाइन शिक्षण को बढ़ावा देना था. इसके माध्यम से अंग्रेजी, बांग्ला और क्षेत्रीय जनजातीय भाषाओं के विद्यार्थियों को दूसरी भाषाएं सीखने तथा भाषा पर रिसर्च करने में मदद मिलती. साथ ही, विभिन्न शिक्षक अपने लेक्चर रिकॉर्ड कर ऑनलाइन अपलोड कर सकते थे, जिसका उपयोग प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र अपनी सुविधा के अनुसार कर पाते. लेकिन जिम्मेदारी तय नहीं होने से यह पूरी सरकारी संपत्ति पूरी तरह बेकार साबित हो रही है.
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